Tuesday, August 9, 2016

भारत की चरमराती न्याय व्यवस्था दोषी कौन ?

🚩आखिर #नैया पार लगेगी कैसे… जरा विचार कीजिए....
🚩यह #इंडिया है यहां #न्याय तब मिलता है जब आप न्याय की उम्मीद छोड़ दें। दूसरे शब्दों में कहे तो #कानून #सत्ताधीशों की रखैल है। जो अपने सुविधा अनुसार कानून की परिभाषा बदलवा देते हैं। या पैसे के दम पर सुनवाई टलती रहती है। वहीं अदालत आरोपी को विचाराधीन कैदी बनाकर ही #फैसले से पहले ही वर्षों का सजा दे देता है । कुल मिलाकर कहे तो कानून एक वर्ग के लिए ही हितकारी है। शेष को #न्याय मिलते सालों लग जाते हैं।
🚩#भारत में वर्ष 2011 की स्थिति में 2.63 करोड़ मामले #अदालतों में लंबित हैं, जिनके निराकरण में, यदि कोई नया #मामला दाखिल न हो तो 24 वर्ष लगेंगे। और जिस तरह से मामले दर्ज हो रहे हैं, यदि वैसे ही होते रहे तो वर्ष 2030 में भारत की अदालतों में 24 करोड़ मामले लंबित होंगे।
jago hindustani - Partial Judicial System, 

🚩#मुकद्दमेबाज़ी वह अथाह #कुआं है, जिसमें . . . सबकुछ समा जाता है। वर्तमान की #कानून-व्यवस्था जिसके तहत चलनेवाले मुकद्दमे बरसों-बरस घिसटते रहते थे, और इंसाफ की उम्मीद करनेवाले मुकद्दमा लड़ते-लड़ते कंगाल हो जाते थे। देश में कानून और #न्याय-व्यवस्था इतनी जटिल है और #अन्याय, #भेदभाव और मुँह देखा न्याय करना इतना आम है कि लोग कानून के नाम से ही चिढ़ने लगे हैं ।
🚩हजार करोड़ लेकर उड़न-छू हो जानेवाले विजय माल्या जिस तरह लंदन में जाम टकराकर भारतीय कानूनों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, सजा होने के बाद सलमान, जयललिता को बरी कर देना - उससे हर भारतीय यह सोचने पर मजबूर है कि क्या देश में ‘#कानून सचमुच सबके लिए समान है?’
🚩महान #विलियम_गैडिस ने सही कहा था -‘न्याय! ये क्या होता है? इस दुनिया में तो न्याय के नाम पर एक ही चीज मिलती है और वह है कानून, कानून और कानून !!’ भारत में ये परिदृश्य आम है और उदाहरणों की अनंत फेहरिस्त।
🚩#मॉरीशस से #लंदन तक हुए #संदेहास्पद ट्रांसफर और माल्या के गायब होने की दास्तां पोटली में बंद हो जाती है लेकिन जिसने भी यहां रहकर न्याय की उम्मीद की, वह सींखचों के पीछे बिना आरोप तय हुए पड़ा है।
🚩3 वर्षों से #न्याय पाने की उम्मीद में संत #आसारामजी_बापू की 9 वीं जमानत याचिका #हाईकोर्ट में लगायी गयी थी । #अधिवक्ताओं ने संत आसारामजी बापू की उम्र, #ट्रायल के लंबे समय और #बीमारियों के आधार पर जमानत की पैरवी की । तीन साल से #जोधपुर #जेल में बंद संत आसारामजी बापू की ओर से दायर जमानत याचिका में कहा गया कि इस मामले में सभी महत्वपूर्ण गवाह के बयान हो चुके है।
🚩#सुप्रीम_कोर्ट भी वर्ष 2015 में कह चुका है कि सभी के बयान होने पर जमानत याचिका दायर की जा सकती है। ऐसे में अब #गवाह को प्रभावित करने वाले हालात भी नहीं रहे।
🚩साथ ही #संत_आसारामजी बापू को अपने खिलाफ लगे आरोपों के बचाव को साक्ष्य एकत्र करने है। ऐसे में उन्हें जमानत प्रदान की जाए।
🚩लेकिन #सलमान_खान को सजा होने के बाद भी बरी करनेवाली जोधपुर #उच्चन्यायालय ने याचिका खारिज कर दी । #सर्वोच्च_न्यायालय के #अधिवक्ता सेवाराम ने कहा कि कोर्ट आसारामजी बापू को जमानत देना ही नहीं चाहता ।
🚩दूसरी और देखा जाय तो सलमान खान को 5 साल की सजा मिलने के बावजूद जमानत मिला व बाद में निर्दोष बरी हो गये । #तमिलनाडु की पूर्व #सीएम जे जयललिता को 2014 में भ्रष्टाचार के मामले में 4 साल की सजा सुनाई गई थी। वह 21 दिनों बाद जमानत लेने में सफल रही थीं। बाद में न्यायालय द्वारा निर्दोष बरी हो गयी ।
🚩#बिहार के नेता #लालू_प्रसाद यादव को चारा #घोटाला केस में सजा मिलने के बाद 80 दिन में जमानत मिल गया । #तरूण_तेजपाल को भी जमानत मिल गया । वही कैंसर से पीड़ित #क्लीनचिट मिलने पर भी #साध्वी_प्रज्ञा जिन्हें 9 साल से बिना सुनवाई या सजा के भी लंबा समय #जेल में गुजार रही है एक ओर अभीतक एक भी आरोप सिद्ध नही हुआ है वे संत आसाराम बापू का केस जिन्हें बीमारी के चलते भी जमानत नहीं मिली रही ।
🚩व्यवस्था से हैरान परेशान लोगों के लिए अदालतें न्याय के मंदिर के रुप में उम्मीद का अंतिम द्वार होते हैं । दुनिया भर में प्रचलित यह धारणा भारत में आकर तार-तार होती नजर आती है ।


🚩देश में हिरासत में 9000 से ज्यादा मौतें होती हैं । 2.78 लाख विचराधीन कैदी है । इनमें से कई ऐसे हैं जो उस अपराध के लिए मुकर्रर सजा के ज्यादा समय जेलों में बिता चुके हैं। हमारे यहाँ #न्याय की प्रक्रिया अन्याय के रास्ते पर अक्सर ही चल पड़ती है, क्यूंकि उसे विशेष अधिकार तो हैं, पर न्याय देने की जवाबदेहिता का अभाव रखा गया है, शायद यह भी सत्ताधीशों की सोची समझी व्यवस्था है। 
🚩#ब्रिटेन ने हजारों उन #भारतीयों को फाँसी पर टाँग दिया जो #न्याय, #गरिमा, अधिकार और #स्वाधीनता की माँग करते थे। ब्रिटेन ने #न्यायपालिका की व्यवस्था बनायी, पर उसका मकसद न्याय देना नहीं, बल्कि न्याय के सिद्धांतों को दरकिनार करते हुए उन लोगों को सजा देना था जो #ब्रिटिश राजसत्ता के खिलाफ खड़े हो रहे थे, जो #स्वतंत्र चाहते थे।
🚩वही #नीति वर्तमान में भी चल रहा है । साजिश के तहत निर्दोष लोगों का मुकदमा जानबूझ कर लंबा घसीटा जाता है। फैसला आने में बरसों लग जाते हैं। ऐसे मामलों में बहुधा कानून के हाथों निर्दोषों की हार हो जाती है। अगर कभी न्याय मिलता भी है तो इतनी देर से कि उसका कोई अर्थ नहीं रह जाता।
🚩उजड़ा-उजड़ा चमन है साथियों, भीगे-भीगे नयन है साथियों ।
नैया पार लगेगी कैसे, #भ्रष्टाचारियों के भरोसे वतन है साथियों ।।
🚩#न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार से रूबरू होने पर हकीकत का पता चलता है। अहसास होता है कि न्याय की सीढ़ियां चढ़ने के लिए पग-पग पर पैसे का सहारा जरूरी है। इस चक्रव्यूह में फँस कर इंसाफ पाने की उम्मीद अक्सर चकनाचूर हो जाती है। अगर कानून सबके लिए समान है तो उसका पैमाना एक समान क्यों नहीं? कानून और उसकी सजा सबके लिए एक जैसी होने की बात कही जाती है लेकिन क्या ऐसा होता है? क्या ऐसे कानून से हमलोग का भला होगा ? नैया पार लगेगी कैसे … जरा विचार कीजिए ।
🚩अभी #हिन्दुस्तनियों को जागृत होकर अन्याय भरे कानून का विरोध करना होगा जिससे सभी #देशवासियों को समान रूप से न्याय मिल सके ।
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