Sunday, June 24, 2018

रानी दुर्गावती ने तीन बार अकेले मुगल सेना को रौंद दिया था, जानिए इतिहास

24 June 2018

🚩भारत में शूर, बुद्धिमान और साहसी कई वीरांगना पैदा हुई, जिनके नाम से ही मुगल सल्तनत काँपने लगती थी पर दुर्भाग्य की बात यह है कि भारत के इतिहास में उनको कहीं स्थान नहीं दिया गया इसके विपरीत क्रूर, लुटेरे, बलात्कारी मुगलों का इतिहास पढ़ाया जाता है । आज अगर सही इतिहास पढ़ाया जाए तो हमारी भावी पीढ़ी पश्चिमी संस्कृति की तरफ मुड़कर भी नही देखेगी इतना महान इतिहास है अपना । 
Rani Durgavati tripled the Mughal army three times, know history

🚩भारत की नारियों में अथाह सामर्थ्य है, अथाह शक्ति है। अपनी छुपी हुई शक्ति को जाग्रत करके अवश्य महान बन सकती है । आइये ऐसी एक महान नारी की याददाश्त को ताजा करते हैं ।

🚩रानी दुर्गावतीका जन्म 10 जून, 1525 को तथा हिंदु कालगणनानुसार आषाढ शुक्ल द्वितीयाको चंदेल राजा कीर्ति सिंह तथा रानी कमलावतीके गर्भसे हुआ । वे बाल्यावस्थासे ही शूर, बुद्धिमान और साहसी थीं । उन्होंने युद्धकलाका प्रशिक्षण भी उसी समय लिया । प्रचाप (बंदूक) भाला, तलवार और धनुष-बाण चलानेमें वह प्रवीण थी । गोंड राज्यके शिल्पकार राजा संग्रामसिंह बहुत शूर तथा पराक्रमी थे । उनके सुपुत्र वीरदलपति सिंहका विवाह रानी दुर्गावतीके साथ वर्ष 1542 में हुआ । वर्ष 1541 में राजा संग्राम सिंहका निधन होनेसे राज्यका कार्यकाज वीरदलपति सिंह ही देखते थे । उन दोनोंका वैवाहिक जीवन 7-8 वर्ष अच्छेसे चल रहा था । इसी कालावधिमें उन्हें वीरनारायण सिंह नामक एक सुपुत्र भी हुआ ।

🚩 रानी दुर्गावतीने गोंड राजवंशवकी बागडोर (लगाम) थाम ली

🚩दलपतशाहकी मृत्यु लगभग 1550 ईसवी सदीमें हुई । उस समय वीर नारायणकी आयु बहुत अल्प होनेके कारण, रानी दुर्गावतीने गोंड राज्यकी बागडोर (लगाम) अपने हाथोंमें थाम ली । अधर कायस्थ एवं मन ठाकुर, इन दो मंत्रियोंने सफलतापूर्वक तथा प्रभावी रूपसे राज्यका प्रशासन चलानेमें रानीकी मदद की । रानीने सिंगौरगढसे अपनी राजधानी चौरागढ स्थानांतरित की । सातपुडा पर्वतसे घिरे इस दुर्गका (किलेका) रणनीतिकी दृष्टिसे बडा महत्त्व था ।

🚩कहा जाता है कि इस कालावधिमें व्यापार बडा फूला-फला । प्रजा संपन्न एवं समृद्ध थी । अपने पतिके पूर्वजोंकी तरह रानीने भी राज्यकी सीमा बढाई तथा बडी कुशलता, उदारता एवं साहसके साथ गोंडवनका राजनैतिक एकीकरण ( गर्‍हा-काटंगा) प्रस्थापित किया । राज्यके 23000 गांवोंमेंसे 12000 गांवोंका व्यवस्थापन उसकी सरकार करती थी । अच्छी तरहसे सुसज्जित सेनामें 20,000 घुडसवार तथा 1000 हाथीदलके साध बडी संख्यामें पैदलसेना भी अंतर्भूत थी । रानी दुर्गावतीमें सौंदर्य एवं उदारताका धैर्य एवं

🚩बुद्धिमत्ताका सुंदर संगम था । अपनी प्रजाके सुखके लिए उन्होंने राज्यमें कई काम करवाए तथा अपनी प्रजाका ह्रदय (दिल) जीत लिया । जबलपुरके निकट ‘रानीताल’ नामका भव्य जलाशय बनवाया । उनकी पहलसे प्रेरित होकर उनके अनुयायियोंने चेरीतल का निर्माण किया तथा अधर कायस्थने जबलपुरसे तीन मीलकी दूरीपर अधरतलका निर्माण किया । उन्होंने अपने राज्यमें अध्ययनको भी बढावा दिया ।

🚩आक्रमणकारी बाजबहादुर जैसे शक्तिशाली राजाको युद्ध में हराना

🚩राजा दलपतिसिंहके निधनके उपरांत कुछ शत्रुओंकी कुदृष्टि इस समृद्धशाली राज्यपर पडी । मालवाका मांडलिक राजा बाजबहादुरने विचार किया, हम एक दिनमें गोंडवाना अपने अधिकारमें लेंगे । उसने बडी आशासे गोंडवानापर आक्रमण किया; परंतु रानीने उसे पराजित किया । उसका कारण था रानीका संगठन चातुर्य । रानी दुर्गावतीद्वारा बाजबहादुर जैसे शक्तिशाली राजाको युद्धमें हरानेसे उसकी कीर्ति सर्वदूर फैल गई । सम्राट अकबरके कानोंतक जब पहुंची तो वह चकित हो गया । रानीका साहस और पराक्रम देखकर उसके प्रति आदर व्यक्त करनेके लिए अपनी राजसभाके (दरबार) विद्वान `गोमहापात्र’ तथा `नरहरिमहापात्र’को रानीकी राजसभामें भेज दिया । रानीने भी उन्हें आदर तथा पुरस्कार देकर सम्मानित किया । इससे अकबरने सन् 1540 में वीरनारायणसिंहको  राज्यका शासक मानकर स्वीकार किया । इस प्रकारसे शक्तिशाली राज्यसे मित्रता बढने लगी । रानी तलवारकी अपेक्षा बंदूकका प्रयोग अधिक करती थी । बंदूकसे लक्ष साधनेमें वह अधिक दक्ष थी । ‘एक गोली एक बली’, ऐसी उनकी आखेटकी पद्धति थी । रानी दुर्गावती राज्यकार्य संभालनेमें बहुत चतुर, पराक्रमी और दूरदर्शी थी ।

🚩अकबरका सेनानी तीन बार रानिसे पराजित

🚩अकबरने वर्ष 1563 में आसफ खान नामक बलाढ्य सेनानीको (सरदार) गोंडवानापर आक्रमण करने भेज दिया । यह समाचार मिलते ही रानीने अपनी व्यूहरचना आरंभ कर दी । सर्वप्रथम अपने विश्वसनीय दूतोंद्वारा अपने मांडलिक राजाओं तथा सेनानायकोंको सावधान हो जानेकी सूचनाएं भेज दीं । अपनी सेनाकी कुछ टुकडियोंको घने जंगलमें छिपा रखा और शेषको अपने साथ लेकर रानी निकल पडी । रानीने सैनिकोंको मार्गदर्शन किया । एक पर्वतकी तलहटीपर आसफ खान और रानी दुर्गावतीका सामना हुआ । बडे आवेशसे युद्ध हुआ । मुगल सेना विशाल थी । उसमें बंदूकधारी सैनिक अधिक थे । इस कारण रानीके सैनिक मरने लगे; परंतु इतनेमें जंगलमें छिपी सेनाने अचानक धनुष-बाणसे आक्रमण कर, बाणोंकी वर्षा की । इससे मुगल सेनाको भारी क्षति पहुंची और रानी दुर्गावतीने आसफ खानको पराजित किया । आसफ खानने एक वर्षकी अवधिमें ३ बार आक्रमण किया और तीनों ही बार वह पराजित हुआ ।

🚩गोंडवानाकी स्वतंत्रताके लिए आत्मबलिदान देनेवाली रानी

🚩अंतमें वर्ष 1564 में आसफखानने सिंगारगढपर घेरा डाला; परंतु रानी वहांसे भागनेमें सफल हुई । यह समाचार पाते ही आसफखानने रानीका पीछा किया । पुनः युद्ध आरंभ हो गया । दोनो ओरसे सैनिकोंको भारी क्षति पहुंची । रानी प्राणोंपर खेलकर युद्ध कर रही थीं । इतनेमें रानीके पुत्र वीरनारायण सिंहके अत्यंत घायल होनेका समाचार सुनकर सेनामें भगदड मच गई । सैनिक भागने लगे । रानीके पास केवल 300 सैनिक थे । उन्हीं सैनिकोंके साथ रानी स्वयं घायल होनेपर भी आसफखानसे शौर्यसे लड रही थी । उसकी अवस्था और परिस्थिति देखकर सैनिकोंने उसे सुरक्षित स्थानपर चलनेकी विनती की; परंतु रानीने कहा, ‘‘मैं युद्ध भूमि छोडकर नहीं जाऊंगी, इस युद्धमें मुझे विजय अथवा मृत्युमें से एक चाहिए ।” अंतमें घायल तथा थकी हुई अवस्थामें उसने एक सैनिकको पास बुलाकर कहा, “अब हमसे तलवार घुमाना असंभव है; परंतु हमारे शरीरका नख भी शत्रुके हाथ न लगे, यही हमारी अंतिम इच्छा है । इसलिए आप भालेसे हमें मार दीजिए । हमें वीरमृत्यु चाहिए और वह आप हमें दीजिए”; परंतु सैनिक वह साहस न कर सका, तो रानीने स्वयं ही अपनी तलवार गलेपर चला ली ।

🚩वह दिन था 24 जून 1564 का, इस प्रकार युद्ध भूमिपर गोंडवानाके लिए अर्थात् अपने देशकी स्वतंत्रताके लिए अंतिम क्षणतक वह झूझती रही । गोंडवानापर वर्ष 1549 से 1564 अर्थात् 15 वर्ष तक रानी दुर्गावतीका अधिराज्य था, जो मुगलोंने नष्ट किया । इस प्रकार महान पराक्रमी रानी दुर्गावतीका अंत हुआ । इस महान वीरांगनाको हमारा शतशः प्रणाम !

🚩जिस स्थानपर उन्होंने अपने प्राण त्याग किए, वह स्थान स्वतंत्रता सेनानियोंके लिए निरंतर प्रेरणाका स्रोत रहा है ।

🚩उनकी स्मृतिमें 1883 में मध्यप्रदेश सरकारने जबलपुर विश्वविद्यालयका नाम रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय रखा ।

🚩इस बहादुर रानीके नामपर भारत सरकारने 24 जून 1988 को डाकका टिकट प्रचलित कर (जारी कर) उनके बलिदानको श्रद्धांजली अर्पित की ।

🚩गोंडवानाको स्वतंत्र करने हेतु जिसने प्राणांतिक युद्ध किया और जिसके रुधिरकी प्रत्येक बूंदमें गोंडवानाके स्वतंत्रताकी लालसा थी, वह रणरागिनी थी महारानी दुर्गावती । उनका इतिहास हमें नित्य प्रेरणादायी है ।

🚩आज की भारतीय नारियाँ इन आदर्श नारियों से प्रेरणा पाकर आगे बढ़े, पाश्चात्य संस्कृति की तरफ न भागे । भारत की नारियां अपने बच्चों में सदाचार, संयम आदि उत्तम संस्कारों का सिंचन करें तो वह दिन दूर नहीं, जिस दिन पूरे विश्व में भारतीय सनातन धर्म और संस्कृति की दिव्य पताका पुनः लहरायेगी।

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Saturday, June 23, 2018

पहले सरकारीकरण किए मंदिरों के भ्रष्टाचार का उत्तर दें सरकार - हिन्दू जनजागृति समिति

🚩कांग्रेस सरकार ने पहले सरकारी खजाना खाली कर दिया और उसके बाद उनकी वक्रदृष्टि हिन्दू मंदिरों में श्रद्धालुआें के धन पर पड़ी । इस धन को हड़पने के लिए उन्होंने हिन्दुआें के मंदिरों का सरकारीकरण आरंभ किया । इसके द्वारा मंदिर के श्रद्धालुआें के करोडों रुपए लूटे तथा हज यात्रा एवं चर्च के विकास के लिए उस धन का उपयोग किया ।
🚩हाल ही में कर्नाटक में हुए चुनावों के समय भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में हिन्दुआें के सरकारीकरण हुए मंदिर हिन्दुआें को वापस करेंगे, ऐसी एक प्रमुख घोषणा की थी । परंतु महाराष्ट्र में यही भाजपा सरकार हिन्दुआें से मंदिर छीनकर उनका सरकारीकरण कर रही है ।
Answer to the corruption of the first government-made
 temples Government - Hindu Janajagruti Samiti

🚩सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार धर्मनिरपेक्ष सरकार को हिन्दुआें के मंदिर चलाने का अधिकार नहीं है । न्यायालय ने केवल प्रबंधन कि त्रुटियां दूर कर मंदिर पुनः उस समाज को लौटाने के निर्देश दिए हैं । ऐसा होते हुए भी भाजपा सरकार ने शिंगणापूर के श्री शनैश्‍वर देवस्थान का सरकारीकरण करने का निर्णय लिया । इस निर्णय का हिन्दू जनजागृति समिति निषेध करती है । शासन ने यदि यह निर्णय निरस्त नहीं किया तो जनांदोलन किया जाएगा, ऐसी चेतावनी समिति के महाराष्ट्र संगठक श्री. सुनील घनवट ने दी है ।
🚩श्री. घनवट ने आगे कहा कि इससे पहले भी शासन ने पंढरपुर स्थित श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर, तुळजापुर का श्री तुळजाभवानी मंदिर, मुंबई का श्री सिद्धीविनायक मंदिर, शिर्डी का श्री साई संस्थान, तथा ‘पश्‍चिम महाराष्ट्र देवस्थान समिति’ बनाकर उसके द्वारा पूरे 3067 मंदिर अपने नियंत्रण में लिए । इसमें कोल्हापुर के श्री महालक्ष्मी एवं श्री ज्योतिबा देवस्थान का भी समावेश है । इन सभी मंदिरों का सुव्यवस्थापन करने के नाम पर सरकारीकरण किया गया । प्रत्यक्ष में इसके विपरीत मंदिरों के व्यवस्थापन में शासकीय समितियों ने बडी मात्रा में भ्रष्टाचार कर करोडों रुपयो का धन लुटा है । इस विषय में ‘सीआइडी’ जांच तथा न्यायालय में याचिका चल रही है । देवनिधि लूटनेवाले पापी व्यक्तियों को दंड न देनेवाले शासन को श्री शनैश्‍वर देवस्थान को नियंत्रित करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं । शासन ने नियंत्रण में लिए मंदिरों का धन लूटनेवालों पर अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की उन भ्रष्टाचारियों को खुला क्यों छोड रखा है इसका उत्तर देना आवश्यक है अन्यथा शासन पर श्री शनिदेव का ही नहीं हिन्दुआें का भी कोप होगा ।
🚩हिन्दू श्रद्धालु मंदिरों में दान, सामाजिक और शासकीय कामों के लिए नहीं करता, धर्मकार्य के लिए करता है । इस दान का उपयोग धर्मकार्य में ही होना चाहिए ऐसा कार्य वास्तविक भक्त ही कर सकते हैं । इसलिए शासन आज तक अधिग्रहित किए सभी मंदिर भक्तों को सौंप दें । भ्रष्टाचार हुए मंदिर के दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई करे अन्यथा हिन्दू जनजागृति समिति सडक पर उतरकर राज्यव्यापी आंदोलन करेगी ऐसी चेतावनी भी श्री. घनवट ने इस समय दी ।
🚩सरकारी कामकाज मे लगभग सभी जगा भ्रष्टाचार मिलता है अब वे हिन्दुओ की आस्था के प्रीतक मंदिरो को भी सरकारी करण करने लगे है तो फिर उसमें भ्रष्टाचार होना स्वाभाविक ही है।
🚩हिन्दू कितना भी आर्थिक रूप से कमजोर हो लेकिन फिर भी अपनी जिस देवस्थान में आस्था रखता है वहाँ कुछ के कुछ भेट चढाता ही है वे इसलिए चढ़ाता है कि उन पैसे का सही इस्तेमाल होगा और सत्कर्म में लगेगा जिससे उसका और उसके परिवार का उद्धार होगा और ऐसे भी हिन्दू धर्म मे कमाई का दसवां हिस्सा दान करने का शास्त्र का नियम है तो लगभग सभी हिन्दू मंदिरो या आश्रमों में जाकर दान करते है और उन दान के पैसे से धर्म, राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिये कार्य होते है ।
🚩सरकार अगर इन मंदिरों को सरकारी करण कर लेती है तो धर्म और राष्ट के हित के कार्य रुक जाएंगे और भ्रष्टाचार में पैसे चले जायेंगे इसलिए सरकार को मंदिरो को सरकारी तंत्र से मुक्त कर देना चाहिए ।
🚩सरकार कभी चर्च या मस्जिद को नियंत्रिण में लेने के लिए विचार करती है? अगर नही तो फिर मन्दिरों को ही  नियंत्रण में लेना चाहती है? जबकि चर्चो और मस्जिदों में धर्मिक उन्माद बढ़ाया जाता है जो देश के लिए हानिकारक है और मंदिरों में शांति का पाठ पढ़ाया जाता है जो देश के लिए हितकारी है अतः अभी सरकार को शिघ्र मंदिरो को सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त कर देना चाहिए ।
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Friday, June 22, 2018

कर्नाटक में हिन्दुओं को फंसाकर आतंकवादी ठहराने की साजिश कर रही कांग्रेस

22 June 2018

🚩कर्नाटक में सत्ता वापसी के बाद हिंदुओं को एक बार फिर आतंकवादी घोषित करने के पीछे कांग्रेसी साजिश सामने आ रही है। दो दिन पहले ही जहां दिग्विजय सिंह ने ‘संघी आतंकवाद’ कहकर नया नाम देने कि कोशिश की वहीं कर्नाटक में गौरी लंकेश हत्याकांड में हिंदुओं को फंसाने कि साजिश शुरू हो गई है !

🚩कर्नाटक में हिंदू जनजागृति और श्रीराम सेना को फंसाने की साजिश
Congress trying to defame Hindus by hanging in Karnataka

🚩कर्नाटक में दोबारा सत्ता में आते ही कांग्रेस ने हिंदू जनजागृति समिति और श्रीराम सेना को निशाना बनाना शुरू कर दिया। पुलिस ने परशुराम वाघमोरे नाम के एक व्यक्ती को गिरफ्तार कर उससे हत्या का गुनाह जबरदस्ती कबूल भी करवा लिया। कर्नाटक चुनाव से ठीक पहले हिंदू संगठनों को घेरने का काम शुरू कर दिया गया। अब पता चला है कि इस केस में जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है उन्हें टॉर्चर करके गुनाह कबूल करवाया जा रहा है !

🚩एसआईटी जांच की प्रक्रिया में अब भी  कई पेंच उलझे हैं कई सवाल

🚩गृह विभाग भी कांग्रेस के पास है इसलिए यह साफ है कि कर्नाटक के पुलिस तंत्र पर अब भी कांग्रेस का कब्जा है ! अब खबरें आ रही हैं कि आरोपियों कि गिरफ्तारी में न्यायिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसकी शिकायत मिलने पर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इस शिकायत पर मजिस्ट्रेट से रिपोर्ट मांगी है। गौरतलब है कि पुलिस की थेयरी में कई गडबडियां साफ दिखाई दे रही हैं ! दावा किया जा रहा है कि वाघमोरे ने कहा है कि ‘मैंने हिंदू धर्म को बचाने के लिए गौरी लंकेश की हत्या की’। इसके लिए उसे 13 हजार रुपये दिए गए। यह अपने आप में बताता है कि एसआईटी कि कहानी में क्या गड़बड़ है ! दरअसल जांच में आरोपियों के पास कोई पैसा भेजे जाने या खर्च होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है इसलिए 13 हजार रुपये कि मामूली रकम बताई गई है। पुलिस ने अब तक कुल 4 लोगों को पकड़ा है किंतु हत्या में उपयोग हथियार से लेकर घटनाक्रम पर कुछ भी जानकारी देने में नाकाम रही है !

🚩तथाकथित सेक्यूलर मीडिया फैला रही है फर्जी खबरें...

🚩कर्नाटक पुलिस की एसआईटी के हाथ अब तक कोई सबूत नहीं लगा है लिहाजा मीडिया में फर्जी खबरें छपवाकर हिंदू संगठनों के खिलाफ माहौल बनाना शुरू कर दिया गया ! जो संकेत मिल रहे हैं उनके अनुसार कांग्रेस पार्टी कि इस साजिश में सेक्युलर मीडिया खुलकर साथ दे रहा है !

🚩इसी के तहत हर उस व्यक्ति को निशाना बनाया जा रहा है जो पुलिस कि थेयरी पर सवाल उठाने कि कोशिश कर रहा है ! कुछ स्थानीय लोगों ने आरोपियों कि कानूनी मदद के लिए पैसे जुटाना शुरू किया तो उसके खिलाफ दिल्ली के अखबारों में लंबे-लंबे लेख लिखे गए !

🚩इसी तरह श्रीराम सेना के प्रमोद मुतालिक के बयान को खूब तूल दिया गया ताकि इसी बहाने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम उछाला जा सके !

🚩तथाकथित सेक्यूलरों को हिंदुओं में ही दिखता है ‘आतंकवाद’, इस मौलाना में क्यों नहीं ?

🚩दो दिन पहले ही सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक मौलाना सरेआम गाय काटने कि बात कह रहा है। मना करने पर उसकी भी कुर्बानी देने की धमकी दे रहा है किंतु इस तथाकथित सेक्यूलर मीडिया ने मौलाना तनवीर हाशमी के बयान को कोई महत्त्व नहीं दिया ! महत्वपूर्ण यह भी है कि इसी मंच पर कांग्रेस पार्टी के मंत्री शिवानंद पाटिल बैठे हुए थे किंतु तथाकथित सेक्यूलरवादियों को यह नहीं दिखा ! इसकी खबरों को दबा दिया गया।

🚩सीबीआई जांच कि सिफारिश क्यों नहीं कर रही कांग्रेस कि सरकार ?

🚩गौरी लंकेश की हत्या 5 सितंबर 2017 को गोली मारकर कर दी गई थी। शुरुआत में यह बात सामने आई थी कि हत्या में नक्सलियों का हाथ है ! आरोप है कि तब चुनाव को देखते हुए कांग्रेस सरकार ने जांच को धीमा करवा दिया था और अब जब वो एक बार फिर से सत्ता में है उसने अपना असली खेल शुरू कर दिया है ! पहले भी इस मामले कि जांच सीबीआई से करवाने कि मांग की जाती रही है किंतु कांग्रेस ने इस मांग को जैसे अनसुना कर दिया है। जाहिर है हिंदू आतंकवाद को लेकर कांग्रेस के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए इस बार भी उसकी नीयत ठीक नहीं लग रही है !

🚩पुलिस ने नक्सलवादियों कि आपसी दुश्मनी को ठहराया था जिम्मेदार

🚩हत्या के बाद शुरुआती जांच में ही यह निकलकर आ गया था कि गौरी लंकेश कि अपनों से भी दुश्मनी थी। वामपंथियों और नक्सलियों से गौरी लंकेश के तनाव की खबरें भी आम थीं। दरअसल 2014 में कांग्रेस सरकार ने उन्हें नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए बनाई गई कमेटी का सदस्य बना दिया था। स्पष्ट है कि वह सत्ता के करीब थीं लेकिन यह भी साफ है कि वो अपनों के ही निशाने पर भी थीं !

🚩मौत से कुछ दिन पहले के ये दो ट्वीट इस बात का इशारा भी करते हैं कि गौरी और उनके वामपंथी (शायद नक्सली) साथियों में कोई विवाद चल रहा था। गौरी लंकेश ने पहले ट्वीट में लिखा, ‘मुझे ऐसा क्यों लगता है कि हममें से कुछ लोग अपने आपसे ही लड़ाई लड रहे हैं ? हम अपने सबसे बड़े दुश्मन को जानते हैं। क्या हम सब इस पर ध्यान लगा सकते हैं ?’

🚩एक अन्य ट्वीट में लंकेश ने लिखा, ‘हम लोग कुछ फर्जी पोस्ट शेयर करने कि गलती करते हैं। आइए, एक-दूसरे को चेताएं और एक-दूसरे को एक्सपोज करने कि कोशिश न करें !’

🚩बहरहाल गौरी लंकेश से नक्सलियों के संबंध थे ये तो जगजाहिर है किंतु मनमुटाव कि खबरें सामने आने के बाद कर्नाटक के गृहमंत्री ने भी इस ओर इशारा किया था कि वे इसकी जांच करवाएंगे !

🚩सिद्धारमैया सरकार में गहरी पैठ रखती थीं गौरी लंकेश...

🚩गौरी लंकेश कि हत्या के बाद जिस तरीके से कर्नाटक के कांग्रेसी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच गए उससे लोगों के मन में सवाल उठने शुरु हो गए थे। दरअसल कहा जा रहा है कि गौरी लंकेश मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सरकार से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले पर ही जांच कर रही थी। एबीपी न्यूज के संवाददाता विकास भदौरिया ने तब ट्वीट किया था कि वह कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार से जुड़ी एक खबर पर काम कर रही थीं। उनके अलावा भी कई स्थानीय और दूसरे पत्रकारों ने इस एंगल कि आेर लोगों का ध्यान दिलाया था !

🚩कविता लंकेश ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से नहीं की बात !

🚩इस हत्या का दूसरा पहलू यह है कि सिद्धारमैया ने यह स्वीकार किया है कि गौरी लंकेश उनसे मिलती रही हैं किंतु उन्होंने किसी तरह के डर की बात कभी नहीं की थी। मुख्यमंत्री के अनुसार गौरी लंकेश चार सितंबर को उनसे मिलनेवाली थीं किंतु वह मिलने नहीं पहुंचीं। अगले दिन पांच सितंबर को उनकी हत्या हो जाती है और मुख्यमंत्री तत्काल प्रतिक्रिया देते हैं और हत्यारों को पकड़ने की बात करते हुए एसआइटी का गठन भी कर देते हैं !

🚩इन सब के बीच ये खबरें भी आम थी कि हत्या के बाद जब मुख्यमंत्री ने गौरी लंकेश की बहन कविता लंकेश से फोन पर बात करनी चाही तो उन्होंने बात करने से इंकार कर दिया। गौरतलब है कि कविता लंकेश और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बीच हत्या से कुछ दिनों पहले तक बेहद अच्छे संबंध हुआ करते थे। इतना ही नहीं जिस फिल्म में सिद्धारमैया एक्टिंग कर रहे हैं उसकी प्रोड्यूसर भी कविता लंकेश ही हैं ! फिर आखिर क्या हुआ है जो कविता लंकेश ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से बात नहीं की ?

🚩डी के शिवकुमार का ‘कच्चा चिट्ठा’ खोलनेवाली थीं गौरी लंकेश ?

🚩गौरी लंकेश का कांग्रेसी नेताओं से कनेक्शन किसी से छिपा नहीं है लेकिन कांग्रेस के ही गद्दार नेता डी के शिवकुमार से उनकी तनातनी की खबरें भी सामने आई थीं ! दरअसल डी के शिवकुमार वही हैं जिन्होंने 2017 में गुजरात में राज्यसभा चुनाव के दौरान प्रदेश के विधायकों को अपने आलीशान रिसार्ट में पनाह देकर अहमद पटेल की राज्यसभा में जीत पक्की करने की कांग्रेसी रणनीति पर अमल किया था। शिवकुमार 68 शहरों में अकूत संपत्ति के मालिक हैं ! आयकर विभाग आज भी उनकी काली कमाई को खंगालने में लगा है। ऐसी खबरें हैं कि गौरी लंकेश भी डी के शिवकुमार का ‘कच्चा-चिट्ठा’ खोलने के काम में लगी थीं !

🚩नीचे वह जवाब देखा जा सकता है जिसमें गौरी लंकेश ने खुद ही बताया था कि उनकी पत्रिका कांग्रेस विधायक डीके शिवकुमार के खिलाफ एक खबर पर काम कर रही है !

🚩साफ है कि सिद्धारमैया सरकार गौरी लंकेश की हत्या के पीछे हिंदू संगठनों का हाथ ठहराकर इसे सांप्रदायिक एंगल देने के साथ ही कांग्रेसी कनेक्शन को भी छिपाना चाह रही है ! ऐसे में इस हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंप दी जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। क्या सिद्धारमैया सरकार ऐसा करेगी ?
स्त्रोत : परफॉर्म इंडिया

🚩हिंदुनिष्ठ और हिन्दू-साधु संतों कि छवि खराब करके अंतराष्ट्रीय तक हिंदुओं को नीचा दिखाने की साजिश चल रही है उससे हिन्दू सावधान रहें ।

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