Saturday, January 20, 2018

सिनेमाघरों का फैसला: गुजरात में नही चलेगी पद्मावत फिल्म, करनी सेना ने भी दी धमकी

January 20, 2018

पद्मावती फिल्म के संजय भंसाली ने जबसे शूटिंग शुरू की है तब से विवादों में घिरा हुआ है, माँ पद्मावती के साथ खिलवाड़ हिन्दुओं को पसंद नही है इसलिए उसका पुरजोर से विरोध कर रहे है।

आपको बता दें कि कुछ दिन पहले सेंसर बोर्ड ने पद्मावती नाम बदलकर पद्मावत कर दिया, फिर भी कई राज्यों ने बेन करके रखा था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऑडर दे दिया कि सभी राज्यों में चलनी चाहिए अब उसको हरि झंडी मिल गई है ।

 यहाँ सोचने वाली बात ये है कि आम जनता का 20-20 साल तक कोर्ट में केस चलता है फिर भी उनको न्याय नही मिलता, लेकिन पद्मावत फ़िल्म को 36 घण्टे में ही फैसला दे दिया गया कि सभी राज्यों में रिलीज की जाये, ये आम जनता के साथ धोखा नहीं तो और क्या है ??? जिसे आम जनता समझ रही है ।
Decision of cinemas: Padmavat film will not run in Gujarat, Karani army also threatens

सुप्रीम कोर्ट ने पद्मावत को सभी राज्यों में चलाने का आदेश तो दे दिया लेकिन गुजरात सिनेमाघरों के मालिकों ने एक अहम निर्णय लेते हुए कहा है कि #पद्मावत गुजरात राज्य के सिनेमाघरों में नहीं दिखाएंगे। 

गुजरात में मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन की बैठक हुई और सिनेमा हॉल के मालिकों ने भंसाली की फिल्म पद्मावत का बहिष्कार कर दिया, सिनेमा हॉल मालिकों ने ऐलान किया कि वो भंसाली की फिल्म अपने सिनेमा हॉल में लगाएंगे ही नहीं, न लगेगी भंसाली की फिल्म और न ही इस बेहूदा फिल्म को कोई देखेगा ।

सिनेमा हॉल के मालिकों ने फिल्मी धंधे को नहीं बल्कि हिन्दू स्वाभिमान को महत्त्व दिया  है, मीडिया के लोग भंसाली की फिल्म का समर्थन कर रहे हैं, बहुत से नेता भी भंसाली की फिल्म का समर्थन कर रहे हैं, ये समर्थन इसलिए कर रहे हैं क्यूंकि भंसाली ने करोडो रुपए का खर्च इनपर भी किया है, पर गुजराती सिनेमा हॉल मालिकों ने हिन्दू स्वाभिमान को झुकने नहीं दिया और भंसाली की बेहूदा फिल्म पद्मावत का बहिष्कार कर दिया ।

 सर्वोच्य न्यायपालिका ने 25 जनवरी को इस फिल्म को देश भर के सिनमाघरों में रिलीज करने के आदेश दे दिए है। लेकिन कोर्ट के इस फैसले का पूरे देश में हिन्दू समाज विरोध कर रहा है। लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने जल्दबाजी में यह निर्णय लिया है। इससे पहले भी देश में उन फिल्मों को बैन किया गया है, जिनमें इतिहास के साथ छेड़-छाड़ की गयी थी, तो कोर्ट ने इस बार क्यूँ पद्मावत को बैन नहीं किया? क्या सुप्रीम कोर्ट पर उनके ही जजों द्वारा लगाये आरोप सही है? वहीं कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि कोर्ट का ये निर्णय निंदनीय है।

करणी सेना के लोकेंद्र सिंह कालवी ने कहा है कि पद्मावत फिल्म अगर सिनेमा हॉल में लग गई तो यह मेरी मृत्यु के समान होगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी पिक्चर हॉल को खून से लिखे इतिहास पर कालिख नहीं पोतने देंगे।

कालवी ने फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली पर निशाना साधते हुए कहा कि मुंबई में बैठे कुछ लोग अपने मन मुताबिक इतिहास को परिभाषित कर रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। कालवी ने कहा कि भंसाली के पैसों से ज्यादा हमारी माताओं, बहनों की इज्जत है। जिसे किसी भी हाल में सिनेमाघरों में प्रदर्शित नहीं होने देंगे, चाहे इसके लिए जान ही क्यूँ न देनी पड़े । उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि यह फिल्म लगी तो बहुत कुछ जल जाएगा।

बता दें कि उपदेश राणा ने तो पद्मावत फ़िल्म चलने पर फेसबुक पर लाइव आकर आत्मदाह करने को कहा है ।

पूरे हिन्दुस्तान में पद्मावत फ़िल्म का विरोध हो रहा है लेकिन न सरकार सुन रही है और न ही न्यायालय।
भारत में सबसे मजबूत भावना हिन्दुओं की ही है वो कभी आहत होती ही नहीं है, या यूँ कहें सत्ता के दलाल और दोगले मिलार्ड हिन्दुओं की भावना को भावना समझते ही नहीं हैं।

🚩#हिन्दू धर्म के #खिलाफ #बॉलीवुड की #घिनौनी #साजिश...
   
🚩#हिंदूधर्म को #नष्ट #करने के लिये #बॉलीवुड में अनेकों #प्रयास किये जा रहे हैं और जब विषय हमारी श्रद्धाओं का होता है तो बॉलीवुड,मीडिया अक्सर उसे गलत ढंग से दर्शाता है जैसे मूवी में डाकूओं और विलेन  का तिलक लगाना, मूर्ति पूजा को गलत ठहराना, गंदे-गंदे एक्शन और गानों में राम नाम और श्रीकृष्ण नाम को रटना, साधुओं को पाखंडी साबित करने का प्रयास करना, धार्मिक भजनों पर महिलाओं को नग्न करके नचाना आदि...!!!

🚩आज के युवावर्ग में अपनी हिन्दू संस्कृति के प्रति कूट कूट कर #नकारात्मकता भरी जा रही है और नशे और #चरित्रहीनता का शिकार बनाया जा रहा है।

🚩धार्मिक स्तर पर उनके विश्वास को तोडा जा रहा है।

🚩उदाहरण के तौर पर बेहतरीन शराबी गानों को परोसना और उसमें नग्न महिलाओं को भड़कीले तरीके से नचाना आदि ।

🚩ये सब देखकर कम उम्र के युवा निर्णय लेने की क्षमता को खोते जा रहे हैं और इन भद्दे और वेश्यावृति के अश्लील गानों पर थिरकते हैं और अपने व्यक्तित्व को भी उन्हीं के अनुसार ढाल रहे हैं।

🚩उन्हें देखकर स्पष्ट है कि मैकॉले ने जो सपना देखा था भारत को धार्मिक और चारित्रिक रुप से नष्ट करके गुलाम बनाये रखने का, आज वह सत्य प्रतीत हो रहा है।

🚩परन्तु भारत कोई जमीन का टुकडा नहीं अपितु ये हमारे महान ऋषि मुनियों और वीरों के तप और बलिदान से सींची धरोहर है।

🚩हमें खुशी है कि आज उन्हीं ऋषियों और वीरों की संतानों ने फिर जन्म लिया है और वही इन गलत कृत्यों का विरोध भी कर रहे हैं और अगर हम सभी संगठित हो जायें तो शीघ्र ही इन सभी बुराईयों को जड़ से उखाड कर फैंक सकते हैं ।

🚩#बॉलीवुड केवल #हिन्दू #भगवान, #देवी-देवता और #साधू-संतों के #विरोध में ही क्यों? 
अन्य धर्मों के लिए #क्यों #नही?

🚩आओ संगठित होकर #चरित्रहीनता की  खाई में गिराने वाले #बॉलीवुड और #मीडिया को #मुँहतोड़ #जबाब दें,और अपने #देश को #विश्वगुरु के पद तक पहुँचाने में सहयोगी हो।

🚩उठाइये अपनी आवाज अभी से #बॉलीवुड #मुर्दाबाद, #हिन्दू संस्कृति #जिंदाबाद ।


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Friday, January 19, 2018

कश्‍मीरी पंडितों पर भयंकर अत्याचार, 20 जनवरी को काफिर करार दिया गया था

January 19, 2018

🚩20 जनवरी जब-जब यह तारीख आती है, #कश्‍मीरी #पंडितों के जख्‍म हरे हो जाते हैं। यही वह तारीख है जिसने #जम्‍मू कश्‍मीर में बसे कश्‍मीरी पंडितों को अपने ही #देश में शरणार्थी बनकर रहने को मजबूर कर दिया। इस तारीख ने उनके लिए जिंदगी के मायने ही बदल दिए थे।

🚩कश्‍मीरी पंडितों को बताया काफिर!!

🚩20 जनवरी 1999 को कश्‍मीर की मस्जिदों से कश्‍मीरी पंडितों को काफिर करार दिया गया। #मस्जिदों से लाउडस्‍पीकरों के जरिए ऐलान किया गया, 'कश्‍मीरी पंडित या तो मुसलमान धर्म अपना लें, या चले जाएं या फिर मरने के लिए तैयार रहें।' यह ऐलान इसलिए किया गया ताकि #कश्‍मीरी पंडितों के घरों को पहचाना जा सके और उन्‍हें या तो इस्‍लाम कुबूल करने के लिए मजबूर किया जाए या फिर उन्‍हें मार दिया जाए।
Fierce tyranny on Kashmiri Pandits was declared kaphar on January 20

🚩14 सितंबर, 1989 को बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष टिक्कू लाल टपलू की हत्या से कश्मीर में शुरू हुए आतंक का दौर समय के साथ और वीभत्स होता चला गया।

🚩टिक्कू की हत्या के महीने भर बाद ही जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता मकबूल बट को मौत की सजा सुनाने वाले सेवानिवृत्त सत्र #न्यायाधीश नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी गई। फिर 13 फरवरी को श्रीनगर के टेलीविजन #केंद्र के निदेशक लासा कौल की निर्मम हत्या के साथ ही आतंक अपने चरम पर पहुंच गया था। उस दौर के अधिकतर #हिंदू नेताओं की हत्या कर दी गई। उसके बाद 300 से अधिक हिंदू-महिलाओं और पुरुषों की आतंकियों ने हत्या की।

🚩1989 के बाद कश्मीर घाटी में हिन्दुओं के साथ हुए नरसंहार से कश्मीरी पंडित और सिख भी वहां से पलायन कर गए। कश्मीर में वर्ष 1990 में हथियारबंद आंदोलन शुरू होने के बाद से अब तक लाखों कश्मीरी पंडित अपना घर-बार छोडकर चले गए। उस समय हुए नरसंहार में हजारों पंडितों का कत्लेआम हुआ था। #आतंकियों ने #सामूहिक #बलात्कार किया और उसके बाद मार-मारकर उनकी #हत्या कर दी। घाटी में कई कश्मीरी पंडितों की बस्तियों में बडी संख्या में महिलाओं और लडकियों के साथ सामूहिक बलात्कार और #लड़कियों के #अपहरण किए गए। 

🚩कश्मीर में हिन्दुओं पर हमलों का सिलसिला 1989 में जिहाद के लिए गठित जमात-ए-इस्लामी ने शुरू किया था जिसने कश्मीर में इस्लामिक ड्रेस कोड लागू कर दिया। आतंकी संघटन का नारा था- ‘हम सब एक, तुम भागो या मरो !’ इसके बाद कश्मीरी पंडितों ने घाटी छोड दी। करोडों के मालिक कश्मीरी पंडित अपनी पुश्तैनी जमीन-जायदाद छोडकर शरणार्थी शिविरों में रहने को मजबूर हो गए। हिंसा के प्रारंभिक दौर में 300 से अधिक हिन्दू महिलाओं और पुरुषों की हत्या हुई थी ।

🚩घाटी में कश्मीरी पंडितों के बुरे दिनों की शुरुआत 14 सितंबर 1989 से हुई थी। कश्मीर में आतंकवाद के चलते लगभग 7 लाख से अधिक कश्मीरी पंडित विस्थापित हो गए और वे जम्मू सहित देश के अन्य हिस्सों में जाकर रहने लगे। कभी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के एक क्षेत्र में हिन्दुओं और शियाओं की तादाद बहुत होती थी परंतु वर्तमान में वहां हिन्दू तो एक भी नहीं बचा और शिया समय-समय पर पलायन करके भारत में आते रहे जिनके आने का क्रम अभी भी जारी है ।

🚩विस्थापित कश्मीरी पंडितों का एक संघटन है ‘पनुन कश्मीर’ ! इसकी स्थापना सन 1990 के दिसंबर माह में की गई थी। इस संघटन की मांग है कि, कश्मीर के हिन्दुओं के लिए कश्मीर घाटी में अलग राज्य का निर्माण किया जाए। पनुन कश्मीर, कश्मीर का वह हिस्सा है, जहां घनीभूत रूप से कश्मीरी पंडित रहते थे। परंतु 1989 से 1995 के बीच नरसंहार का एक ऐसा दौर चला कि, पंडितों को कश्मीर से पलायन होने पर मजबूर होना पडा ।

🚩आंकडों के अनुसार, इस नरसंहार में 6,000 कश्मीरी पंडितों को मारा गया। 7,50,000 पंडितों को पलायन के लिए मजबूर किया गया। 1,500 मंदिर नष्ट कर दिए गए। कश्मीरी पंडितों के 600 गांवों को इस्लामी नाम दिया गया। केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों के अब केवल 808 परिवार रह रहे हैं तथा उनके 59,442 पंजीकृत प्रवासी परिवार घाटी के बाहर रह रहे हैं। कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन से पहले से पहले वहां उनके 430 मंदिर थे। अब इनमें से मात्र 260 सुरक्षित बचे हैं जिनमें से 170 मंदिर क्षतिग्रस्त हैं !

🚩डर की वजह से वापस लौटने से कतराते!!

🚩आज भी कश्‍मीरी पंडितों के अंदर का #डर उन्‍हें वापस लौटने से रोक देता है। #कश्‍मीरी पंडितों ने घाटी छोड़ने से पहले अपने घरों को कौड़‍ियों के दाम पर बेचा था। 28 वर्षों में कीमतें तीन गुना तक बढ़ गई हैं। आज अगर वह वापस आना भी चाहें तो नहीं आ सकते क्‍योंकि न तो उनका घर है और न ही घाटी में उनकी जमीन बची है। 

केंद्र #सरकार कब हिंदुओं के नाम से जाने वाले हिंदुस्तान में हिंदुओं को #सुरक्षित करेगी ?

🚩कश्मीरी पंडितों की आज की स्थिति

🚩आज 4.5 लाख कश्मीरी पंडित अपने देश में ही शरणार्थी की तरह रह रहे हैं।  पूरे देश या विदेश में कोई भी नहीं है उनको देखने वाला । उनके लिए तो मीडिया भी नहीं है जो उनके साथ हुए अत्याचार को बताये । कोई भी सरकार या पार्टी या संस्था नहीं है जो कि विस्थापित कश्मीरियों को उनके पूर्वजों के भूमि में वापस ले जाने की बात करे । कोई भी नहीं इस दुनिया में जो कश्मीरी पंडितो के लिए "न्याय" की मांग करे । पढ़े लिखे कश्मीरी पंडित आज भिखारियों की तरह पिछले 24 सालो से टेंट में रह रहे है । उन्हें मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं, पीने के लिए पानी तक की समस्या है। भारतीय और विश्व की मीडिया, मानवाधिकार संस्थाए गुजरात दंगो में मरे 750 मुस्लिमों (310 मारे गए हिन्दुओं को भूलकर) की बात करते हैं, लेकिन यहाँ तो कश्मीरी पंडितों की बात करने वाला कोई नहीं है क्योकि वो हिन्दू हैं। 20,000 कश्मीरी हिन्दू तो केवल धूप की गर्मी सहन न कर पाने के कारण मर गए क्योकि वो कश्मीर के ठन्डे मौसम में रहने के आदी थे ।

🚩अभी तो उच्चतम न्यायालय ने कश्मीर में 27 वर्ष पहले हुए कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की दोबारा जांच के निर्देश देने से इनकार कर दिया है । अब तो कश्मीरी पंडितों के लिये कोई चारा नहीं बचा है।

🚩कश्मीरी पंडितो और भारतीय सेना के खिलाफ भारतीय मीडिया का षड्यंत्र -

🚩आज देश के लोगों को कश्मीरी पंडितों के मानवाधिकारों के बारे में भारतीय मीडिया नहीं बताती है लेकिन आंतकवादियों के मानवाधिकारों के बारे में जरुर बताती है । आज सभी को यह बताया जा रहा था है कि #ASFA नामक कानून का #भारतीय सेना #द्वारा काफी ज्यादा #दुरूपयोग किया जाता है । कश्मीर में अलगाववादी संगठन मासूम लोगों की हत्या करते है और भारतीय सेना के जवान जब उन आतंकियों के खिलाफ कोई करवाई करते हैं, तो यह अलगाववादी नेता अपने खरीदी हुई मीडिया की सहायता से चीखना चिल्लाना शुरू कर देते हैं, कि देखो हमारे ऊपर कितना अत्याचार हो रहा है !

🚩हिंदुस्तान में #सेक्युलर राजनीति #सेक्युलर नेता, #सेक्युलर लोकतंत्र, #सेक्युलर संविधान, #सेक्युलर न्यायापालिका से हिन्दुओं को उम्मीद रखने की जरूरत नही है क्योंकि ये कभी हिंदुओं की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरेंगे ।

🚩 #हिंदुओं को सरकार, #न्यायालय द्वारा कोई सहायता या न्याय न मिलने का एक कारण ये भी है कि हिंदुओं में एकता नही है, जिस दिन #एकता हो जायेगी उस दिन से सब सही हो जाएगा ।

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Thursday, January 18, 2018

12 लाख रुपये आयकर भरनेवाला, आयआयटी इंजीनियर नौकरी छोड़कर लेगा दीक्षा

January 18, 2018

भारत एक आध्यात्मिक देश है । आध्यात्मिक जगत की गहराइयों में पहुँचाने वाले ऋषि-मुनियों ने ऐसी खोजें की है कि आज का वैज्ञानिक कल्पना भी नही कर सकता, आज के कई वैज्ञानिक तो ऋषि-मुनियों की खोजी हुई खोजों को उनके साहित्य द्वारा पढ़कर खोज करते हैं और अपने नाम का लेबल लगा देते हैं, लेकिन ऋषि-मुनियों ने योग-साधना द्वारा कितनी खोजें की, उस पर प्रकाश नहीं डालते ।
Income tax refund of 12 lakh rupees, IIT engineer will quit job

आज की युवापीढ़ी भी पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित है और अशांत, खिन्न , चिंतामय जीवन व्यतीत कर रही है । अपनी चिंताओं को मिटाने के लिये शराब का सहारा लेते हैं, व्यसन करते हैं, क्लबों में जाना अपनी शान समझते हैं, सुखी रहने के लिए पार्टियो में जाना, फिल्में देखना,व्यभिचार करना उनके जीवन का अंश बन गया है पर इससे आज तक किसी के दुःख दूर नही हुए बल्कि इससे वैमनस्यता बढ़ी है, आत्महत्याएं बढ़ी हैं, खिन्नता बढ़ी है ।

जीवन जीने की सही शैली तो हमें हमारे ऋषि मुनियों से ही मिली है इसलिए भारत अपने ऋषि मुनियों के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है । वास्तविक सुख का स्त्रोत तो भीतर ही है । अगर आज का मानव अपने सनातन सत्य की ओर, अपनी वास्तविकता की ओर वापिस आ जाये तो जिस सुख के लिए वो दर-दर की ठोकरें खा रहा है वो तो उसके घर की चीज हो जाये ।

इतिहास में कई उदाहरण मिलते है जो नश्वर जगत का आकर्षण छोड़कर शाश्वत परमात्मा का सुख पाने के लिए निकल पड़े और उन्होंने ही फिर जगत का कल्याण किया है । आज भी सच्चे संत इस धरा पर हैं जिनके मार्गदर्शन में लाखों नहीं करोड़ों का जीवन सदमार्ग पर चल पड़ा है ।

राजा भर्तृहरि की तरह बाहर का सुख तुच्छ समझकर आंतरिक सुख की अनुभूति करने के लिए इंजीनियर संकेत पारेख ने दीक्षा लेने का निर्णय लिया है ।

आयआयटी मुंबई से पढाई कर चुके 29 वर्ष के केमिकल इंजीनियर संकेत पारेख की जिंदगी अपने सीनियर से ऑनलाइन चैट करने के बाद पूरी तरह से बदल चुकी है । उनके पास बहुत अच्छी नौकरी थी और वह यूएस से पोस्ट ग्रेजुएशन करने की योजना बना रहे थे । परंतु चैटिंग के बाद अब वह उन 16 लोगों में शामिल हैं जोकि बोरीवली (मुंबई) में 22 जनवरी को दीक्षा ले रहे हैं ! ये सभी जैन आचार्य युगभूषण सुरीजी से शिक्षा ले रहे थे ।

पारेख वैष्णव परिवार से संबंध रखते हैं परंतु वो आयआयटी में अपने सीनियर भाविक शाह की वजह से जैन धर्म की आेर रुझान रखने लगे । भाविक ने 2013 में दीक्षा ली थी । पारेख ने कहा कि वह पहले नास्तिक थे और वह अपने करियर के लिए बहुत गंभीर थे परंतु उन्होंने जब से दीक्षा लेने का मन बनाया है तब से वह शांति अनुभव कर रहे हैं !

पारेख ने बताया कि मैं भाविक के साथ चैटिंग कर रहा था जोकि कनाडा में यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा में 2010 में इंटर्नशिप कर रहे थे । उस समय मैं फाइनल ईयर में था, यह सामान्य चैटिंग थी, मुझे नहीं पता था कि आत्मा के ज्ञान के विषय में कैसे बात करनी है !

यह पहली बार था जब मैं इस विषय के बारे में सोच रहा था । मैं इसमें गहराई से उतरता गया और जैन धर्म के प्रति पढना शुरू किया । उन्होंने बताया कि अब मैंने सारे गैजेट्स का प्रयोग करना छोड दिया है । अब वो कंप्यूटर का प्रयोग भी नहीं करते, जिससे वो चैटिंग किया करते थे ।

पारेख ने अपनी पगार के बारे में नहीं बताया हालांकि उन्होंने कहा कि वह 12 लाख रुपये हर साल इनकम टैक्स भर रहे थे । पारेख ने बताया कि उनके पिता की कुछ वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है । इसलिए उन्होंने अपनी मां और बडी बहन को बताया कि वह दीक्षा लेना चाहते हैं । उन्होंने अपनी मां से कहा कि बस यही एक माध्यम है जिससे वो खुश रह सकते हैं । हालांकि शुरुआत में मां को मनाना मुश्किल था !

जिनका आध्यात्मिक स्तर अच्छा है, वही एेसा विचार कर सकते है । अध्यात्म यह कृती का शास्त्र है । अध्यात्म में बताए गए सूत्र जब तक कृती में नहीं लाए जाते, तब तक उनका महत्त्व मनुष्य को पता नहीं चलता । एेसा होते हुए भी तथाकथित बुद्धीजीवी एवं आधुनिकतावादी जिनका अध्यात्म के विषयमें कोर्इ अभ्यास नहीं है, वह इसपर टीका करते है ।

इतिहास में कई उदाहरण मिलते है जो नश्वर जगत का आकर्षण छोड़कर श्वासत परमात्मा का सुख पाने के लिए निकल पड़े और उन्होंने ही फिर जगत का कल्याण किया है ।

ऐसे ही एक थी मल्लिकायनाथ

जैन धर्म में कुल 24 तीर्थांकर हो चुके हैं। उनमें एक राजकन्या भी तीर्थंकर हो गयी, जिसका नाम था मल्लियनाथ। राजकुमारी मल्लिका इतनी खूबसूरत थी कि कई राजकुमार व राजा उसके साथ ब्याह रचाना चाहते थे लेकिन वह किसी को पसंद नहीं करती थी आखिरकार उन राजकुमारों व राजाओं ने आपस में एकजुट मल्लिका के पिता को किसी युद्ध में हराकर उसका अपहरण करने की योजना बनायी।

मल्लिका को इस बात का पता चल गया। उसने राजकुमारों व राजाओं को कहलवाया कि 'आप लोग मुझ पर कुर्बान हैं तो मैं भी आप सब पर कुर्बान हूँ। तिथि निश्चित करिये। आप लोग आकर बातचीत करें। मैं आप सबको अपना सौंदर्य दे दूँगी।"

इधर मल्लिका ने अपने जैसी ही एक सुन्दर मूर्ति बनवायी एवं निश्चित की गयी तिथि से दो-चार दिन पहले से वह अपना भोजन उसमें डाल देती थी। जिस महल में राजकुमारों व राजाओं को मुलाकात देनी थी, उसी में एक ओर वह मूर्ति रखवा दी गयी। निश्चित तिथि पर सारे राजा व राजकुमार आ गये। मूर्ति इतनी हूबहू थी कि उसकी ओर देखकर राजकुमार विचार ही कर रहे थे कि 'अब बोलेगी... अब बोलेगी....' इतने में मल्लिका स्वयं आयी तो सारे राजा व राजकुमार उसे देखकर दंग रह गये कि 'वास्तविक मल्लिका हमारे सामने बैठी है तो यह कौन है ?"

मल्लिका बोलीः "यह प्रतिमा है। मुझे यही विश्वास था कि आप सब इसको ही सच्ची मानेंगे और सचमुच में मैंने इसमें सच्चाई छुपाकर रखी है। आपको जो सौंदर्य चाहिए वह मैंने इसमें छुपाकर रखा है।" यह कहकर ज्यों ही मूर्ति का ढक्कन खोला गया, त्यों ही सारा कक्ष दुर्गन्ध से भर गया। पिछले चार-पाँच दिन से जो भोजन उसमें डाला गया था, उसके सड़ जाने से ऐसी भयंकर बदबू निकल रही थी कि सब 'छि...छि...छि...' कर उठे।

तब मल्लिका ने वहाँ आये हुए राजाओं व राजकुमारों को सम्बोधित करते हुए कहाः "भाइयो ! जिस अन्न, जल, दूध, फल, सब्जी इत्यादि को खाकर यह शरीर सुन्दर दिखता है, मैंने वे ही खाद्य-सामग्रियाँ चार-पाँच दिनों से इसमें डाल रखी थीं। अब ये सड़कर दुर्गन्ध पैदा कर रही हैं। दुर्गन्ध पैदा करने वाली इन खाद्यान्नों से बनी हुई चमड़ी पर आप इतने फिदा हो रहे हो तो इस अन्न को रक्त बनाकर सौंदर्य देने वाला वह आत्मा कितना सुंदर होगा।"

मल्लिका की इस सारगर्भित बातों का राजा एवं राजकुमारों पर गहरा असर हुआ और उन्होंने कामविकार से अपना पिण्ड छुड़ाने का संकल्प किया। उधर मल्लिका संत-शरण में पहुँच गयी और उनके मार्गदर्शन से अपने आत्मा को पाकर मल्लियनाथ तीर्थंकर बन गयी। आज भी मल्लियनाथ जैन धर्म के प्रसिद्ध उन्नीसवें तीर्थंकर के रूप में सम्मानित होकर पूजी जा रही हैं।

Wednesday, January 17, 2018

अमेरिका वैज्ञानिकों ने किया शोध, संस्कृत मंत्रों के उच्चारण से बढती है स्मरणशक्ति

January 17, 2018

भारतवासियों को पता है कि संस्कृत हमारी प्राचीन भाषा है । हिन्दुआें के धर्मग्रंथ भी इसी भाषा में है । संस्कृत को हम देववाणी भी कहते है । प्राचीन काल में शिक्षा इसी भाषा में दी जाती थी । इसलिए प्राचीन काल के लोग संस्कारी, चारित्र्यवान, शिलवान, धर्मपरायण, कर्तव्यनिष्ठ थे। परंतु जैसे ही मेकॉले की शिक्षा पद्धती भारत में आर्इ, भारतीय  महान संस्कृत को भारतवासी भुल गए । 

मेकाॅले की मॉडर्न शिक्षाप्रणाली से भारत में समाज अधोगती की आेर जाता दिखार्इ दे रहा है। जिसके परिणाम आज सभी आेर भ्रष्ठाचार, बलात्कार, व्यभीचार, घोटाले पनप रहे है । यह किसकी देन है ? आज जहां भारतीय अपनी प्राचीन संस्कृति तथा संस्कृत भाषा को पिछडापन मानकर पाश्चिमी सभ्यता को चुन रहे है, वही पश्चिमी लोग भारत की महान संस्कृती तथा संस्कृत भाषा की आेर आकर्षित हो रहे है । 
US scientists do research, enhances memory of Sanskrit mantras

विदेशी संस्कृत भाषा पर संशोधन कर रहे है एवं भारतीय संस्कृती की महानता विश्व के सामने ला रहे है । इसके कर्इ उदाहरण हमने देखे है । एेसा ही एक संशोधन आज हम देखेंगे । जिससे आपको अपने भारतीय होनेपर गर्व महसुस होगा । 

एक अमेरिकी पत्रिका में दावा किया गया है कि, वैदिक मंत्रों को याद करने से दिमाग के उसे हिस्से में बढोतरी होती है जिसका काम संज्ञान लेना है, यानी की चीजों को याद करना है ।

डॉ. जेम्स हार्टजेल नाम के न्यूरो साइंटिस्ट के इस शोध को साइंटिफिक अमेरिकन नाम के जरनल ने प्रकाशित किया है । न्यूरो साइंटिस्ट डॉ. हार्टजेल ने अपने शोध के बाद ‘द संस्कृत इफेक्ट’ नाम का टर्म तैयार किया है । वह अपने रिपोर्ट में लिखते हैं कि भारतीय मान्यता यह कहती है कि वैदिक मंत्रों का लगातार उच्चारण करने और उसे याद करने का प्रयास करने से स्मरणशक्ति और सोच बढती है । इस धारणा की जांच के लिए डॉ. जेम्स और इटली के ट्रेन्टो यूनिवर्सिटी के उनके साथी ने भारत स्थित नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर के डॉ. तन्मय नाथ और डॉ. नंदिनी चटर्जी के साथ टीम बनाई ।

द हिन्दू’ में छपी रिपोर्ट के अनुसार, एक्सपर्ट की इस टीम ने 42 वॉलंटियर्स को चुना, जिनमें 21 प्रशिक्षित वैदिक पंडित (22 साल) थे । इन लोगों ने 7 सालों तक शुक्ला यजुर्वेद के उच्चारण में पारंगत प्राप्त की थी । ये सभी पंडित देहली के एक वैदिक विद्यालय के थे । जबकि एक कॉलेज के छात्रों में 21 को संस्कृत उच्चारण के लिए चुना गया । इस टीम ने इन सभी 42 प्रतिभागियों के ब्रेन की मैपिंग की । इसके लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया । नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर के पास मौजूद इस तकनीक से दिमाग के अलग अलग हिस्सों का आकार की जानकारी ली जा सकती है ।

टीम ने जब 21 पंडितों और 21 दूसरे वालंटियर्स के ब्रेन की मैपिंग की तो दोनों में काफी अंतर पाया गया । उन्होंने पाया कि वे छात्र जो संस्कृत उच्चारण में पारंगत थे उनके दिमाग का वो हिस्सा, जहां से याददाश्त, भावनाएं, निर्णय लेने की क्षमता नियंत्रित होती है, वो ज्यादा सघन था । इसमें ज्यादा अहम बात यह है कि दिमाग की संरचना में ये परिवर्तन तात्कालिक नहीं थे बल्कि वैज्ञानिकों के अनुसार, जो छात्र वैदिक मंत्रों के उच्चारण में पारंगत थे उनमें बदलाव लंबे समय तक रहने वाले थे । इसका अर्थ यह है कि संस्कृत में प्रशिक्षित छात्रों की याददाश्त, निर्णय लेने की क्षमता, अनुभूति की क्षमता लंबे समय तक कायम रहने वाली थी ।


आपको बता दे कि संस्कृत में 1700 धातुएं, 70 प्रत्यय और 80 उपसर्ग हैं, इनके योग से जो शब्द बनते हैं, उनकी #संख्या 27 लाख 20 हजार होती है। यदि दो शब्दों से बने सामासिक शब्दों को जोड़ते हैं तो उनकी संख्या लगभग 769 करोड़ हो जाती है। #संस्कृत #इंडो-यूरोपियन लैंग्वेज की सबसे #प्राचीन भाषा है और सबसे वैज्ञानिक भाषा भी है। इसके सकारात्मक तरंगों के कारण ही ज्यादातर श्लोक संस्कृत में हैं। भारत में संस्कृत से लोगों का जुड़ाव खत्म हो रहा है लेकिन विदेशों में इसके प्रति रुझाान बढ़ रहा है ।

संस्कृत ही एक मात्र साधन हैं, जो क्रमशः अंगुलियों एवं जीभ को लचीला बनाते हैं।  इसके अध्ययन करने वाले छात्रों को गणित, विज्ञान एवं अन्य भाषाएं ग्रहण करने में सहायता मिलती है। वैदिक ग्रंथों की बात छोड़ भी दी जाए, तो भी #संस्कृत भाषा में #साहित्य की रचना प्राचीनकाल से निरंतर होती आ रही है। संस्कृत केवल एक भाषा मात्र नहीं है, अपितु एक विचार भी है। #संस्कृत एक #भाषा मात्र नहीं, बल्कि एक #संस्कृति है और #संस्कार भी है। #संस्कृत में विश्व का #कल्याण है, #शांति है, #सहयोग है और #वसुधैव कुटुंबकम की भावना भी है ।

सभी भारतवासियों को मेकाॅले की मॉडर्न शिक्षाप्रणाली को त्याग करके संस्कृत भाषा का महत्त्व समझकर शिक्षा एवं सभी जगा उसे बढावा देने हेतु प्रयास करने का संकल्प करें।

Saturday, October 14, 2017

षडयंत्र का पर्दाफाश : ABP न्यूज ने लड़की पर दबाब डाला संतों के खिलाफ बोलने के लिए

अक्टूबर 14, 2017

🚩मुम्बई : इलेक्ट्रॉनिक न्यूज चैनल #ABP न्यूज का चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, ABP न्यूज कैसे #षड्यंत्र करता है और कैसे #झूठी #कहानियां #बनाकर #साजिश रचता है वो वहाँ जॉब करने वाली खुशबू नाम की लड़की ने उनका #पर्दाफाश किया ।

🚩कुछ दिन पहले कांदिवली, मुंम्बई के नम्र मुनि महाराज के खिलाफ ABP न्यूज में आकर एक लड़की यौन शोषण का आरोप लगाया, और कहा कि नम्र मुनि के आश्रम में लड़कियों का यौन शोषण होता है और नम्र मुनि के लेपटॉप में कई लड़कियों के अश्लील फोटो भी मिले हैं । आश्रम में फैशन डिजाइन का खेल खेला जाता है, मॉडलिंग द्वारा अश्लीलता बढाई जाती है ।
🚩लडक़ी द्वारा आरोप लगे, टीवी चैनलों में खूब दिखाया गया लेकिन जैसे ही लड़की वहाँ से भागकर नम्र मुनि के आश्रम में आई और जो सच्चाई बताई वो चौकाने वाली है,मीडिया के झूठ का पोल खुल गया ।

🚩30 वर्षीय लड़की खुशबू ने बताया कि मैं ABP न्यूज में जॉब करती थी और नम्र मुनि से जुड़ी थी । ABP न्यूज की बड़ी एडिटर शिला रावल और हार्दिक हुंडिया था, मैं नम्र मुनि से दीक्षा लेना चाहती थी पर नम्र मुनि ने मना कर दिया जिससे मैंने उनका आश्रम छोड़ दिया, वो शिला रावल और हार्दिक हुंडिया को पता चल गया और मुझे बोला गया कि तू नम्र मुनि के खिलाफ ऐसा ऐसा बोल तो हम तुझे बड़ा बना देंगे और तेरा नाम होगा, वहाँ जॉब कर रही खुशबू ने दबाव में आकर बोल दिया कि मेरे साथ कई बार नम्र मुनि ने यौन शोषण किया और कई लड़कियों का हुआ है ।



🚩आरोप लगाने वाली खुशबू लड़की ने बताया कि मेरे को शिला रावल और हार्दिक हुंडिया ने बताया कि जैसे राम रहीम को एक्सपोज किया है वैसे ही नम्र मुनि का करना है, हार्दिक ने आगे ये भी बताया कि और भी आगे संतो के खिलाफ ऐसा दिखाना है ।

🚩खुशबू ने बताया कि मेरे पर दबाव डाला और मेरे से जबरदस्ती ईमेल करवाये कि लिखो कि मेरे साथ नम्र मुनि ने यौन शोषण किया है और कैमरे के सामने ये सब बोलते समय कैसी एक्टिन करना है वो भी सिखाया गया था । खुशबू को एक स्क्रिप्ट भी दी गई थी जिसमें कैसे नम्र मुनि के खिलाफ केस दर्ज करना है और मीडिया के सामने नम्र मुनि के खिलाफ कैसे बोलना है उसकी जानकारी थी ।


🚩30 वर्षीय खुशबू का स्पष्ट कहना है कि मेरे पर ABP न्यूज एडिटर महिला शिला रावल और हार्दिक हुंडिया ने दबाव डाला था, मैने भी दबाव में आकर ये सब बोल दिया ।
आगे कहा कि और भी संतों को बदनाम करवाने की साजिश रची जा रही है ।

🚩अब आप समझ गये होंगे कि हिन्दू साधु-संतों के खिलाफ कितना बड़ा षडयंत्र चल रहा है, उनको बदनाम करने का, हिन्दू धर्म को खत्म करने की साजिश चल रही है।

🚩आपको बता दें कि हिन्दू संत आशारामजी बापू को भी बदनाम करने के लिए विदेश से भारी फंडिग आती है, विनोद गुप्ता उर्फ भोलानंद ने मीडिया के सामने आकर बताया था।





🚩भोलानंद ने बताया कि मुम्बई में मेरे योगा सेंटर चलते थे, उसमे इंडिया न्यूज का मुख्य मनीष अवस्थी, इंडिया टीवी का वसीम अख्तर, न्यूज-24 और ‘एबीपी न्यूज वाले आकर योगा करने वाली बहनों को बोलते थे कि आप संत आसारामजी बापू के खिलाफ बोलोगेे तो हम आपको करोड़पति बना देंगे, मेरे पास भी संत आशारामजी बापू के खिलाफ स्क्रिप्ट लेकर आये थे उसमे लिखा था कि बापू आसारामजी ने 15-16 लड़कियों का बलात्कार किया, जमीन हड़प ली आदि-आदि लिखा था ।

🚩भोलानंद को बोला गया कि अगर मीडिया में आकर बोलोगे तो हम आपको फ्लेट दिलवा देंगे और 5-6 करोड़ रूपये देंगे । भोलानंद ने बताया कि इंडिया न्यूज का दीपक चौरसिया भी मुझे फोन करके बताता था कि बापू आसारामजी के खिलाफ क्या-क्या बोलना है ।

🚩भारतीय मीडिया में ईसाई मिशनरियों द्वारा वेटिकन सिटी से और मुस्लिम देशों से भारतीय संस्कृति को खत्म करने के लिए और संस्कृति के आधार स्तंभ साधु-संतों को बदनाम करने के लिए भारी फंडिग आती है । क्योंकि साधु-संत धर्मान्तरण में भारी रुकावट डालते हैं ।

🚩सवाल उठता है कि 10-20 हजार की नौकरी करने वाले पत्रकार करोड़पति कैसे बन जाते है? उनकी संपत्ति की जांच होनी चाहिए और संतो के खिलाफ षड्यंत्र रचने वाले मीडिया हाउस के मालिकों एवं पत्रकारों को जेल भेज देना चाहिए ।

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