Sunday, September 29, 2019

जानिए नवरात्र का इतिहास और उस समय व्रत करने से कितना होगा फायदा

28 सितंबर 2019

*🚩नवरात्रि पर देवी पूजन और नौ दिन के व्रत का बहुत महत्व है । माँ दुर्गा के नौ रूपों की अराधना का पावन पर्व शुरू हो रहा है । इस साल 10 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक नवरात्र मनाया जाएगा ।*

*🚩नवरात्रि एक बड़ा हिंदू पर्व है । नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'नौ रातें' । इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति (देवी) के नौ रूपों की पूजा की जाती है । दसवां दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है ।*

*🚩नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है । पौष, चैत्र, आषाढ़,अश्विन प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है । नवरात्रि के नौ रातों में तीन देवियों - महालक्ष्मी, महासरस्वती या सरस्वती और दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा होती है जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं ।  इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति (देवी) के नौ रूपों की पूजा की जाती है ।  दुर्गा का मतलब जीवन के दुख कॊ हटानेवाली होता है । नवरात्रि एक महत्वपूर्ण प्रमुख त्यौहार है जिसे पूरे भारत और अन्य देशों में महान उत्साह के साथ मनाया जाता है ।*

*🚩आश्विन शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक का पर्व शारदीय नवरात्र के रूप में जाना जाता है । यह व्रत-उपवास व जप-ध्यान का पर्व है ।*

*🚩‘श्रीमद्देवी भागवत’ में आता है कि विद्या, धन व पुत्र के अभिलाषी को नवरात्र-व्रत का अनुष्ठान करना चाहिए । जिसका राज्य छिन गया हो, ऐसे नरेश को पुनः गद्दी पर बिठाने की क्षमता इस व्रत में है ।*

*🚩नौ देवियाँ है :-* 

*🚩शैलपुत्री - इसका अर्थ- पहाड़ों की पुत्री होता है ।*

*🚩ब्रह्मचारिणी - इसका अर्थ- ब्रह्मचारिणी ।*

*🚩चंद्रघंटा - इसका अर्थ- चाँद की तरह चमकने वाली ।*

*🚩कूष्माण्डा - इसका अर्थ- पूरा जगत उनके पैर में है ।*

*🚩स्कंदमाता - इसका अर्थ- कार्तिक स्वामी की माता ।*

*🚩कात्यायनी - इसका अर्थ- कात्यायन आश्रम में जन्मि ।*

*🚩कालरात्रि - इसका अर्थ- काल का नाश करने वाली ।*

*🚩महागौरी - इसका अर्थ- सफेद रंग वाली माँ ।*

*🚩सिद्धिदात्री - इसका अर्थ- सर्व सिद्धि देने वाली ।*

*🚩शक्ति की उपासना का पर्व शारदीय नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है ।*

*🚩सर्वप्रथम भगवान श्रीरामचंद्रजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और उसके बाद दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की । तब से असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा ।*

*🚩आदिशक्ति के हर रूप की नवरात्र के नौ दिनों में क्रमशः अलग-अलग पूजा की जाती है । माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है । ये सभी प्रकार की सिद्धियाँ देने वाली हैं । इनका वाहन सिंह है और कमल पुष्प पर ही आसीन होती हैं । नवरात्रि के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है ।*

*🚩नवदुर्गा और दस महाविद्याओं में काली ही प्रथम प्रमुख हैं । भगवान शिव की शक्तियों में उग्र और सौम्य, दो रूपों में अनेक रूप धारण करने वाली दश महाविद्या अनंत सिद्धियाँ प्रदान करने में समर्थ हैं । दसवें स्थान पर कमला वैष्णवी शक्ति हैं, जो प्राकृतिक संपत्तियों की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी हैं । देवता, मानव, दानव सभी इनकी कृपा के बिना पंगु हैं, इसलिए आगम-निगम दोनों में इनकी उपासना समान रूप से वर्णित है । सभी देवता, राक्षस, मनुष्य, गंधर्व इनकी कृपा-प्रसाद के लिए लालायित रहते हैं ।*

*🚩नवरात्रि भारत के विभिन्न भागों में अलग ढंग से मनायी जाती है । गुजरात में इस त्यौहार को बड़े पैमाने से मनाया जाता है । गुजरात में नवरात्रि समारोह डांडिया और गरबा के रूप में जान पड़ता है । यह आधी रात तक चलता है । डांडिया का अनुभव बड़ा ही असाधारण है । देवी के सम्मान में भक्ति प्रदर्शन के रूप में गरबा, 'आरती' से पहले किया जाता है और डांडिया समारोह उसके बाद । पश्चिम #बंगाल के राज्य में बंगालियों के मुख्य त्यौहारो में दुर्गा पूजा बंगाली कैलेंडर में, सबसे अलंकृत रूप में उभरा है । इस अदभुत उत्सव का जश्न नीचे दक्षिण, मैसूर के राजसी क्वार्टर को पूरे महीने प्रकाशित करके मनाया जाता है ।*

*नवरात्रि उत्सव देवी अंबा (शक्ति) का प्रतिनिधित्व है । वसंत की शुरुआत और #शरद ऋतु की शुरुआत, जलवायु और सूरज के प्रभावों का महत्वपूर्ण संगम माना जाता है । इन दो समय माँ दुर्गा की पूजा के लिए पवित्र अवसर माने जाते है । त्यौहार की तिथियाँ चंद्र कैलेंडर के अनुसार निर्धारित होती हैं । #नवरात्रि पर्व, #माँ-दुर्गा की अवधारणा भक्ति और परमात्मा की शक्ति (उदात्त, परम, परम रचनात्मक ऊर्जा) की पूजा का सबसे शुभ और अनोखा अवधि माना जाता है । यह पूजावैदिक युग से पहले, प्रागैतिहासिक काल से है । ऋषि के वैदिक युग के बाद से, नवरात्रि के दौरान की भक्ति प्रथाओं में से मुख्य रूप गायत्री साधना का हैं ।*

*🚩नवरात्रि के पहले तीन*

*🚩नवरात्रि के पहले तीन दिन देवी #दुर्गा की पूजा करने के लिए समर्पित किए गए हैं । यह पूजा ऊर्जा और शक्ति की जाती है । प्रत्येक दिन दुर्गा के एक अलग रूप को समर्पित है । #त्यौहार के पहले दिन बालिकाओं की पूजा की जाती है । दूसरे दिन युवती की पूजा की जाती है । तीसरे दिन जो महिला परिपक्वता के चरण में पहुँच गयी है उसकि पूजा की जाती है । देवी दुर्गा के विनाशकारी पहलु सब बुराई प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त करने के प्रतिबद्धता के प्रतीक है।*

*🚩देवी की आरती*

*🚩व्यक्ति जब #अहंकार, क्रोध, वासना और अन्य पशु प्रवृत्ति की बुराई प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त कर लेता है, वह एक शून्य का अनुभव करता है। यह शून्य आध्यात्मिक धन से भर जाता है। प्रयोजन के लिए, व्यक्ति सभी भौतिकवादी, आध्यात्मिक धन और समृद्धि प्राप्त करने के लिए देवी लक्ष्मी की पूजा करता है । नवरात्रि के चौथे, पांचवें और छठे दिन #लक्ष्मी- समृद्धि और शांति की देवी की पूजा करने के लिए समर्पित है । शायद व्यक्ति बुरी प्रवृत्तियों और धन पर विजय प्राप्त कर लेता है, पर वह अभी सच्चे ज्ञान से वंचित है । ज्ञान एक मानवीय जीवन जीने के लिए आवश्यक है भले हि वह सत्ता और धन के साथ समृद्ध है । इसलिए, नवरात्रि के पांचवें दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। सभी पुस्तकों और अन्य साहित्य सामग्रीयों को एक स्थान पर इकट्ठा कर दिया जाता है और एक दीया, देवी आह्वान और आशीर्वाद लेने के लिए, देवता के सामने जलाया जाता है ।*

*🚩नवरात्रि का सातवां और आठवां दिन*

*सातवें दिन, कला और ज्ञान की देवी, #सरस्वती, की पूजा की है । प्रार्थनायें, आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश के उद्देश्य के साथ की जाती हैं । आठवे दिन पर एक 'यज्ञ' किया जाता है। यह एक बलिदान है जो देवी दुर्गा को सम्मान तथा उनको विदा करता है ।*

*🚩नवरात्रि का नौवां दिन*

*नौवा दिन नवरात्रि समारोह का अंतिम दिन है । यह महानवमी के नाम से भी जाना जाता है । इस दिन पर, कन्या पूजन होता है । उसमे नौ #कन्याओं की पूजा होती है जो अभी तक यौवन की अवस्था तक नहीं पहुँची है । इन नौ कन्याओं को देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है । कन्याओं का सम्मान तथा स्वागत करने के लिए उनके पैर धोए जाते हैं। #पूजा के अंत में कन्याओं को उपहार के रूप में नए कपड़े पेश किए जाते हैं ।*

*🚩नवरात्रि के व्रत में इन बातों का रखना चाहिए ख्याल:*
*- नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखने वालों को दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाने चाहिए । इस #दौरान बच्चों का मुंडन करवाना शुभ होता है ।*
*- नौ दिनों तक नाखून नहीं काटने चाहिए ।*
*- इस दौरान खाने में प्याज, #लहसुन और नॉन वेज बिल्कुल न खाएं ।*
*- नौ दिन का व्रत रखने वालों को काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए ।*
*- व्रत रखने वाले लोगों को बेल्ट, चप्पल-जूते, बैग जैसी चमड़े की चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए ।*
*- #व्रत में नौ दिनों तक खाने में अनाज और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए । खाने में कुट्टू का आटा, समारी के चावल, सिंघाड़े का आटा, सेंधा नमक, फल, आलू, मेवे, मूंगफली खा सकते हैं ।*
*- #विष्णु पुराण के अनुसार, नवरात्रि व्रत के समय दिन में सोने, #तम्बाकू चबाने और शारीरिक संबंध बनाने से भी व्रत का फल नहीं मिलता है ।*

*🚩यदि कोई पूरे नवरात्र के उपवास न कर सकता हो तो सप्तमी, अष्टमी और नवमी - तीन दिन उपवास करके #देवी की #पूजा करने से वह नवरात्र के #उपवास के फल को प्राप्त करता है ।*

*नवरात्र पर जागरण*
*🚩नवरात्र पर उत्तम #जागरण वह है, जिसमें*
*(1) #शास्त्र-अनुसार चर्चा हो ।*
*(2) #दीपक प्रज्वलित हो ।*
*(3) #भक्तिभाव से युक्त माँ का कीर्तन हो ।*
*(4) वाद्य, ताल आदि से युक्त सात्त्विक संगीत हो ।*
*(5) प्रसन्नता हो ।*
*(6) #सात्त्विक नृत्य हो, ऐसा नहीं कि डिस्को या अन्य कोई पाश्चात्य नृत्य किया ।*
*(7) #माँ #जगदम्बा पर नजर हो, ऐसा नहीं कि किसीको गंदी नजर से देखें ।*
*(8) मनोरंजन सात्त्विक हो; रस्साकशी, लाठी-खेंच आदि कार्यक्रम हों ।*

*🚩#नवरात्र का व्रत सभी मनुष्यों को नियमित तौर पर करना ही चाहिए । जिससे घर में सुख, शांति, बरकत व मधुरता आती है । #आध्यात्मिकता का प्रादुर्भाव होता है । घर की बाधाएँ व क्लेश दूर होते हैं । अपने जीवन में व्यक्तित्व और चरित्र के निर्माण होता है । आपसी जीवन में प्रेम और समन्वय बढ़ता है ।*

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जानिए नवरात्रि में गरबा खेलने का इतिहास, रखनी चाहिए दो सावधानी

29 सितंबर 2019

नवरात्रि में विभिन्न प्रांतों में किए जानेवाले धार्मिक कार्यक्रमों की एक महत्त्वपूर्ण विधि है, गरबा । नवरात्रों में गुजरात में मातृशक्ति के प्रतीक अनेक छिद्रों वाले मिट्टी के कलश में रखे दीपक का पूजन करते हैं । यह `दीपगर्भ’ स्त्री की सृजनशक्ति का प्रतीक है । इस मान्यता से नौ दिन `दीपगर्भ’ पूजा जाता  है । `दीपगर्भ’ से `दीप’ शब्द का लोप होकर गर्भ-गरभो-गरबो अथवा गरबा शब्द प्रचलित हुआ ।

‘गरबा खेलने’ का क्या अर्थ है ?
*‘गरबा खेलने’ को ही हिंदु धर्म में तालियों के लयबद्ध स्वर में देवी का भक्तिरस पूर्ण गुणगानात्मक भजन कहते हैं । गरबा खेलना, अर्थात तालियों की नादात्मक सगुण उपासना से श्री दुर्गादेवी को ध्यान से जाग्रत कर, उन्हें ब्रह्मांड के लिए कार्य करने हेतु मारक  रूप धारण करने का आवाहन करना ।*

नवरात्रि में अनुचित कृत्यों को रोकें:

पूर्वकाल में ‘गरबा’ नृत्य के समय देवी, कृष्णलीला एवं संत रचित गीत ही गाए जाते थे । वर्तमान काल में भगवान के इस सामूहिक नृत्य की उपसना में विकृतियां आ गई हैं । ‘रिमिक्स’, पश्चिमी संगीत अथवा चलचित्रों के गीतों की ताल पर अश्लील हावभाव में मनोरंजन के लिए गरबे के स्थान पर ‘डिस्को-डांडिया’ खेला जाता है । गरबे को निमित्त बनाकर व्याभिचार आदि भी किया जाता है । पूजास्थल पर तंबाकू सेवन, मद्यपान, ध्वनि प्रदूषण आदि अनुचित कृत्य भी किए जाते हैं । मूलत: एक धार्मिक उत्सव के रूप में मनाए जाने वाले इस कार्यक्रम को व्यावसायिक रूप प्राप्त हुआ है । ये धर्म एवं संस्कृति की हानि करना है । इसे रोकने हेतु उचित कृत्य करना अर्थात कालानुसार आवश्यक धर्मपालन करना ही है ।

*🚩क्या अनुचित रूप से गरबा खेलने से मां की कृपा होगी?*

*अनुचित रूप से गरबा खेलते समय बढ़े रज-तम के कारण उस स्थान पर कष्टदायक तरंगें अधिक मात्रा में आकृष्ट होती हैं । अनिष्ट शक्तियां काली शक्ति प्रक्षेपित करती हैं । इस काली शक्ति का वहां उपस्थित व्यक्तियों पर न्यूनाधिक मात्रा में परिणाम होता है । परिणामस्वरूप व्यक्ति बहिर्मुख और विषयों के आधीन होता है ।*

*🚩देवी की उपासनास्वरूप परंपरागत गरबा:-*

*जब हम उत्कट भाव से देवताओं का आदर-सम्मान करेंगे, तभी उनकी कृपा प्राप्त कर पाएंगे । गरबा नृत्य में होने वाले अनाचारों जैसे कृत्यों से नहीं, भावपूर्ण पूजन से भक्त पर देवीमां की पूर्ण कृपा होती है । इसलिए गरबा खेलने को हिंदु धर्म में देवी की उपासना मानते हैं । इसमें देवी का भक्तिरसपूर्ण गुणगान करते हैं ।*

*इस समय देवी के समक्ष पारंपरिक भावपूर्ण नृत्य के साथ तालियों एवं छोटे-छोटे डंडों से लयबद्ध ध्वनि भी करते हैं । मूल पारंपरिक गरबा नृत्य में तीन तालियां बजाई जाती हैं । पहली ताली नीचे झुककर, दूसरी ताली खड़े होकर और तीसरी ताली हाथ ऊपर उठाकर बजाई जाती है ।*

*🚩इस समय देवी के समक्ष पारंपरिक भावपूर्ण नृत्य किया जाता हैं । नृत्य में प्रत्येक स्तर पर तीन तालियां बजायी जाती हैं एवं छोटे छोटे डंडो से लयबद्ध ध्वनि भी करते हैं । गरबा खेलते समय गोल घेरा बनाते हैं । साथ ही देवीके गीत अथवा भजन गाते हैं ।*

*इस प्रकार तालियां बजाकर भजन एवं नृत्य करना एक प्रकार से सगुण उपासना ही है । इस उपासना पद्धति में तालियों के नादसे श्री दुर्गादेवी को जागृत करते हैं । और ब्रह्मांड में कार्य करने के लिए मारक रूप धारण करने के लिए आवाहन करते हैं ।*

*🚩सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।*
*शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते ।।*

*नवरात्रि महिषासुर मर्दिनी मां श्री दुर्गादेवी का त्यौहार है । देवी ने महिषासुर नामक असुर के साथ नौ दिन अर्थात प्रतिपदा से नवमीतक युद्ध कर, नवमी की रात्रि उसका वध किया । उस समय से देवी को ‘महिषासुरमर्दिनी’ के नाम से जाना जाता है । जग में जब-जब तामसी, आसुरी एवं क्रूर लोग प्रबल होकर, सात्त्विक, उदारात्मक एवं धर्मनिष्ठ सज्जनोंको छलते हैं, तब देवी धर्मसंस्थापना हेतु पुनः-पुनः अवतार धारण करती हैं । उनके निमित्त यह नवरात्रि का व्रत है ।*
*संदर्भ – सनातन का ग्रंथ, ‘देवीपूजनसे संबंधित कृत्यों का शास्त्र‘ एवं अन्य ग्रंथ*

*🚩ऐसे पवित्र त्यौहार में व्यभिचार करना, मद्यपान करना, लड़का-लकड़ियों के प्रति बुरी नजर रखना, अश्लील कपड़े पहनना ये सब अनुचित है, इससे मां प्रसन्न नहीं होतीं इससे तो और नाराज होती हैं इसलिए नवरात्रि में पवित्रता बनाए रखें ।*

*नवरात्रि में लव जिहाद के किस्से भी बढ़ जाते हैं हिन्दू युवतियों को ध्यान रखना चाहिए कि कहीं कोई जिहादी हिन्दू बनकर आपको प्रेम जाल में फंसा तो नहीं रहा है न? नहीं तो आपको लव जिहाद में फंसाकर आपकी और आपके परिवार की जिंदगी बर्बाद कर देगा ।*

*🚩देवी मां का अनादर रोकना:-*

*आजकल चित्र, नाटक, विज्ञापन इत्यादि द्वारा देवी-देवताओं का अनादर किया जा रहा है । इससे धर्महानि होती है ।*

*🚩देवी के संदर्भ में अवमानना का उदाहरण:-*

*हिन्दूद्वेषी चित्रकार म.फि. हुसेन ने हिन्दुओं के देवताओं के नग्न चित्र बनाकर उनकी सार्वजनिक बिक्री के लिए रखा; व्याख्यान,  पुस्तक आदि के माध्यम से देवताओं की आलोचना की जाती है; व्यापारी वर्ग अपने उत्पादों के विज्ञापनों में देवताओं का मॉडेल के रूप में प्रयोग करते हैं; देवताओं की वेशभूषा पहनकर भीख मांगी जाती है ।*

*ग्रीस अर्थात यूनान की ‘सदर्न कम्फर्ट विस्की’ नामक कंपनी ने एक विज्ञापन में श्रीदुर्गादेवी के आठों हाथों में विस्की की बोतल दर्शायी । हिंदू जनजागृति समिति ने भारत में ग्रीस के राजदूत को निषेध पत्र भेजा । इस विरोध के कारण यह चित्र कंपनी द्वारा हटाया गया ।*

*🚩‘बायर’ नामक कंपनी के ‘सॅन्क्य् श्यूर् सॅन्क्य्’ नामक मच्छर भगाने की औषधिके विज्ञापन में पहले चित्र में कालीमां के दस हाथों में शस्त्र दिखाया । दूसरे चित्र में देवी के दो हाथ ही शस्त्ररहित दिखाए गए हैं, क्योंकि उनके पास बायर कंपनी की मच्छर मारनेवाली दवाई है, इस अपमान की जानकारी मिलते ही हिंदू जनजागृति समिति ने कंपनी को निषेध पत्र भेजकर रोष व्यक्त किया । निषेध की ओर तत्काल ध्यान देकर कंपनी ने क्षमायाचना की । कंपनी ने समितिको भेजे अपने पत्र में कहा, हमारे कारण आपको हुई असुविधा एवं कष्ट के लिए हम आपकी क्षमा मांगते है । हम हिंदू धर्म का आदर करते है । आपका विश्वसनीय – मार्क क्लाफेन ।*

*🚩सभी को नवरात्रि में पवित्रता बनाए रखनी चाहिए और कोई देवी माँ का अपमान करता है तो उसको करारा जवाब देना चाहिए ।*

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Friday, September 27, 2019

जाने सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध क्यों करना चाहिए, नहीं करने से क्या होगी हानि ?

27 सितंबर 2019

*🚩 हिन्दू धर्म में एक अत्यंत सुरभित पुष्प है कृतज्ञता की भावना, जो कि बालक में अपने माता-पिता के प्रति स्पष्ट परिलक्षित होती है । हिन्दू धर्म का व्यक्ति अपने जीवित माता-पिता की सेवा तो करता ही है, उनके देहावसान के बाद भी उनके कल्याण की भावना करता है एवं उनके अधूरे शुभ कार्यों को पूर्ण करने का प्रयत्न करता है । 'श्राद्ध-विधि' इसी भावना पर आधारित है । इस साल सर्वपितृ अमावस्या 28 सितंबर को है ।*

*🚩पुराणों में आता है कि आश्विन(गुजरात-महाराष्ट्र के मुताबिक भाद्रपद) कृष्ण पक्ष की अमावस (पितृमोक्ष अमावस) के दिन सूर्य एवं चन्द्र की युति होती है । सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है । इस दिन हमारे पितर यमलोक से अपना निवास छोड़कर सूक्ष्म रूप से मृत्युलोक (पृथ्वीलोक) में अपने वंशजों के निवास स्थान में रहते हैं । अतः उस दिन उनके लिए विभिन्न श्राद्ध करने से वे तृप्त होते हैं ।*

*🚩राजा रोहिताश्व ने मार्कण्डेयजी से प्रार्थना की : ‘‘भगवन् ! मैं श्राद्धकल्प का यथार्थरूप से श्रवण करना चाहता हूँ ।*

*🚩मार्कण्डेयजी ने कहा : ‘‘राजन् ! इसी विषय में आनर्त-नरेश ने भर्तृयज्ञ से पूछा था । तब भर्तृयज्ञ ने कहा था : ‘राजन् ! विद्वान पुरुष को अमावस्या  के दिन श्राद्ध अवश्य करना चाहिए । क्षुधा से क्षीण हुए पितर श्राद्धान्न की आशा से अमावस्या तिथि आने की प्रतीक्षा करते रहते हैं । जो अमावस्या को जल या शाक से भी श्राद्ध करता है, उसके पितर तृप्त होते हैं और उसके समस्त पातकों का नाश हो जाता है ।*

*🚩आनर्त-नरेश बोले : ‘ब्रह्मन् ! मरे हुए जीव तो अपने कर्मानुसार शुभाशुभ गति को प्राप्त होते हैं, फिर श्राद्धकाल में वे अपने पुत्र के घर कैसे पहुँच पाते हैं ?*

*🚩भर्तृयज्ञ : ‘राजन् ! जो लोग यहाँ मरते हैं उनमें से कितने ही इस लोक में जन्म लेते हैं, कितने ही पुण्यात्मा स्वर्गलोक में स्थित होते हैं और कितने ही पापात्मा जीव यमलोक के निवासी हो जाते हैं । कुछ जीव भोगानुकूल शरीर धारण करके अपने किये हुए शुभ या अशुभ कर्म का उपभोग करते हैं ।*

*राजन् ! यमलोक या स्वर्गलोक में रहनेवाले पितरों को भी तब तक भूख-प्यास अधिक होती है, जब तक कि वे माता या पिता से तीन पीढ़ी के अंतर्गत रहते हैं । जब तक वे मातामह, प्रमातामह या वृद्धप्रमातामह और पिता, पितामह या प्रपितामह पद पर रहते हैं, तब तक श्राद्धभाग लेने के लिए उनमें भूख-प्यास की अधिकता होती है ।*

*🚩 पितृलोक या देवलोक के पितर श्राद्धकाल में सूक्ष्म शरीर से श्राद्धीय ब्राह्मणों के शरीर में स्थित होकर श्राद्धभाग से तृप्त होते हैं, परंतु जो पितर कहीं शुभाशुभ भोग हेतु स्थित हैं या जन्म ले चुके हैं, उनका भाग दिव्य पितर लेते हैं और जीव जहाँ जिस शरीर में होता है, वहाँ तदनुकूल भोगों की प्राप्ति कराकर उसे तृप्ति पहुँचाते हैं ।*

*🚩ये दिव्य पितर नित्य और सर्वज्ञ होते हैं । पितरों के उद्देश्य से शक्ति के अनुसार सदा ही अन्न और जल का दान करते रहना चाहिए । जो नीच मानव पितरों के लिए अन्न और जल न देकर आप ही भोजन करता है या जल पीता है, वह पितरों का द्रोही है । उसके पितर स्वर्ग में अन्न और जल नहीं पाते हैं । श्राद्ध द्वारा तृप्त किये हुए पितर मनुष्य को मनोवांछित भोग प्रदान करते हैं ।*

*🚩आनर्त-नरेश : ‘ब्रह्मन् ! श्राद्ध के लिए और भी तो नाना प्रकार के पवित्रतम काल हैं, फिर अमावस्या को ही विशेषरूप से श्राद्ध करने की बात क्यों कही गयी है ?*

*🚩भर्तृयज्ञ : ‘राजन् ! यह सत्य है कि श्राद्ध के योग्य और भी बहुत-से समय हैं । मन्वादि तिथि, युगादि तिथि, संक्रांतिकाल, व्यतीपात, चंद्रग्रहण तथा सूर्यग्रहण - इन सभी समयों में पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध करना चाहिए । पुण्य-तीर्थ, पुण्य-मंदिर, श्राद्धयोग्य ब्राह्मण तथा श्राद्धयोग्य उत्तम पदार्थ प्राप्त होने पर बुद्धिमान पुरुषों को बिना पर्व के भी श्राद्ध करना चाहिए । अमावस्या को विशेषरूप से श्राद्ध करने का आदेश दिया गया है, इसका कारण है कि सूर्य की सहस्रों किरणों में जो सबसे प्रमुख है उसका नाम ''अमा'' है । उस "अमा'' नामक प्रधान किरण के तेज से ही सूर्यदेव तीनों लोकों को प्रकाशित करते हैं । उसी "अमा" में तिथि विशेष को चंद्रदेव  निवास  करते  हैं,  इसलिए  उसका  नाम अमावस्या है । यही कारण है कि अमावस्या प्रत्येक धर्मकार्य के लिए अक्षय फल देनेवाली बतायी गयी है । श्राद्धकर्म में तो इसका विशेष महत्त्व है ही ।*

*🚩श्राद्ध की महिमा बताते हुए ब्रह्माजी ने कहा है : ‘यदि मनुष्य पिता, पितामह और प्रपितामह के उद्देश्य से तथा मातामह,  प्रमातामह और वृद्धप्रमातामह के उद्देश्य से श्राद्ध-तर्पण करेंगे तो उतने से ही उनके पिता और माता से लेकर मुझ तक सभी पितर तृप्त हो जायेंगे ।*

*🚩जिस अन्न से मनुष्य अपने पितरों की तुष्टि के लिए श्रेष्ठ ब्राह्मणों को तृप्त करेगा और उसीसे भक्तिपूर्वक पितरों के निमित्त पिंडदान भी देगा, उससे पितरों को सनातन तृप्ति प्राप्त होगी ।*

*🚩पितृपक्ष में शाक के द्वारा भी जो पितरों का श्राद्ध नहीं करेगा, वह धनहीन चाण्डाल होगा । ऐसे व्यक्ति से जो बैठना, सोना, खाना, पीना, छूना-छुआना अथवा वार्तालाप आदि व्यवहार करेंगे, वे भी महापापी माने जाएंगे । उनके यहाँ संतान की वृद्धि नहीं होगी । किसी प्रकार भी उन्हें सुख और धन-धान्य की प्राप्ति नहीं होगी ।*

*🚩यदि श्राद्ध करने की क्षमता, शक्ति, रुपया-पैसा नहीं है तो श्राद्ध के दिन पानी का लोटा भरकर रखें फिर भगवदगीता के सातवें अध्याय का पाठ करें और 1 माला द्वादश मंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" और एक माला "ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधादेव्यै स्वाहा" की करें और लोटे में भरे हुए पानी से सूर्यं भगवान को अर्घ्य दे फिर 11.36  से 12.24 के बीच के समय (कुतप वेला) में गाय को चारा खिला दें । चारा खरीदने का भी पैसा नहीं है, ऐसी कोई समस्या है तो उस समय दोनों भुजाएँ ऊँची कर लें, आँखें बंद करके सूर्यनारायण का ध्यान करें : ‘हमारे पिता को, दादा को, फलाने को आप तृप्त करें, उन्हें आप सुख दें, आप समर्थ हैं । मेरे पास धन नहीं है, सामग्री नहीं है, विधि का ज्ञान नहीं है, घर में कोई करने-करानेवाला नहीं है, मैं असमर्थ हूँ लेकिन आपके लिए मेरा सद्भाव है, श्रद्धा है । इससे भी आप तृप्त हो सकते हैं । इससे आपको मंगलमय लाभ होगा ।*

*🚩श्राद्ध कैसे करें, लिंक क्लिक करके देखिये*

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