Saturday, September 3, 2016

आखिर कौन हैं मदर टेरेसा - जानिया "अग्नेसे गोंकशे बोजशियु" की पूरी सच्चाई

🚩#मदर_टेरेसा के लिए #पश्चिमी #पत्रकारों का क्या कहना है...!!!
🚩आइये जानें....
🚩#कोलकाता में #गरीबों के लिए काम करने वाली #रोमन कैथो लिक नन मदर टेरेसा को रविवार (4 सितंबर 2016) को संत घोषित किया जायेगा । इसके साथ ही उनके आलोचक इस बात पर तकरार करेंगे कि क्या यह विज्ञान और तर्क पर आस्था की जीत है ?
🚩नोबेल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा का निधन 87 साल की उम्र में 1997 में हुआ था । उन्होंने 1950 में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की थी ।
🚩मदर टेरेसा पर हमेशा वेटिकन की मदद और #मिशनरीज_ऑफ_चैरिटी की मदद से “धर्म परिवर्तन” का आरोप तो लगता ही रहा है, लेकिन बात कुछ और भी है, जो उन्हें “दया की मूर्ति”, “मानवता की सेविका”, “बेसहारा और गरीबों की मसीहा”... आदि वाली “लार्जर दैन लाईफ” छवि पर ग्रहण लगाती है ।
🚩मजे की बात यह है कि इनमें से अधिकतर आरोप (या कहें कि खुलासे) पश्चिम की प्रेस या #ईसाई पत्रकारों आदि ने ही किये हैं ।जिससे संदेह और भी गहरा हो जाता है ।
🚩सच क्या है वो पत्रकारों से जानिए....
Jago Hindustani - Who-is-Mother-Teresa-know-The-Whole-Truth-about-Anjezë-Gonxhe-Bojaxhiu

🚩#ब्रिटेन में जन्मे और स्वतंत्र विचारों के लेखक क्रिस्टोफर हिचेंस उन्हें कुछ इस तरह से ब्यान करते हैं, "वो एक धार्मिक रुढ़िवादी, एक #राजनीतिक गुप्तचर, एक कट्टर उपदेशक और दुनिया भर की #धर्मनिरपेक्ष ताकतों की साथी थी ।"
🚩मिशनरीज ऑफ चैरिटी के प्रचार #पुस्तिका पर बात करते हुए नन की आलोचना में हिचेंस इसे 'दु:ख का #संप्रदाय' कहते हैं।
वो आरोप लगाते हैं कि मदर टेरेसा ने गोद लिए हुए अपने शहर को नरक की तरह पेश किया और अधिनायकों से दोस्ती की । हिचेंस ने मदर टेरेसा को संदेह में खड़ा करते हुए एक डॉक्यूमेंट्री 'हेल्स एंगेल' भी बनाई है ।
🚩कई साल बाद 2003 में लंदन के स्थित डॉक्टर अरूप चटर्जी ने, मिशनरीज ऑफ चैरिटी से जुड़े 100 लोगों का #इंटरव्यू लेने के बाद, मदर टेरेसा की तीखी आलोचना करते हुए एक लेख प्रकाशित किया ।
🚩उनके मुताबिक, उनके बनवाए घरों में बाकि चीजों के अलावा स्वच्छता के बदतर हालात, #इंजेक्शन में एक ही सुई का बार-बार इस्तेमाल और देखभाल की घटिया व्यवस्था होती है ।
🚩मदर टेरेसा की आलोचना करने वाले कुछ और भी लोग हैं।
🚩मियामी के हेमली गोंदालेथ ने साल 2008 में कोलकाता में गरीबों के लिए बनवाए गए टेरेसा के एक घर में दो महीने तक काम किया था ।
🚩उनके मुताबिक "मुझे यह देखकर हैरत हुई कि चैरिटी किस भयानक लापरवाही के साथ काम करती है । यह लोगों के मन में चैरिटी के काम को लेकर जो विचार था, उसके ठीक विपरीत था" ।
🚩मदर टेरेसा के चमत्कारों पर सवाल....!!!
🚩#गोंदालेथ ने बताया, "लोगों की देखभाल की ठोस योजना, उपकरणों को आधुनिक बनाना और मदद के लिए हजारों लोगों से कोसों दूर, मदर टेरेसा गरीबों की दोस्त नहीं, बल्कि गरीबी को बढ़ावा देने वाली थी" ।
🚩फिलहाल गोंदालेथ मदर टेरेसा की आलोचना करते हुए एक फेसबुक पेज चलाते हैं और दान दाताओं को, जिन्हें ज्यादा पता नहीं होता है, उन्हें इस संगठन की जानकारी देते हैं ।
🚩हाल के वर्षों में सनल एदमारुकु जैसे #भारतीय_रेशनलिस्टों ने उन चमत्कारों पर सवाल उठाए हैं, जिनके लिए मदर टेरेसा को संत की उपाधि दी गई ।
🚩उनके मुताबिक, "वेटिकन की नजर में एक संत बनने के लिए, किसी चमत्कार को, किसी की मौत के बाद उनके लिए की जाने वाली #प्रार्थना से जोड़ दें ।
🚩असल में किसी घटना को चमत्कार मानने से पहले सबूतों के साथ उन घटनाओं की जांच की जानी चाहिए । अक्सर यह सब बीमारियों के ठीक होने की ऐसी घटनाएं होती हैं, जिनकी कोई चिकित्सीय व्याख्या नहीं की जा सकती"।
🚩मदर टेरेसा की मौत के पांच साल बाद पोप जॉन पॉल द्वितीय ने उनके एक चमत्कार को स्वीकार किया था ।
🚩एक बंगाली #आदिवासी महिला मोनिका बेसरा को पेट का अल्सर था, जो ठीक हो गया । कहा गया कि यह मदर टेरेसा के अलौकिक ताकत की वजह से हुआ ।
🚩इसी घटना की वजह से टेरेसा को 2003 में 'धन्य' (बिटिफ़िकेशन) घोषित किया गया । उसके बाद पोप फ्रांसिस ने 2015 में उनके दूसरे चमत्कार को अपनी स्वीकृति दी, जब साल 2008 में ब्राजील के एक आदमी का #ब्रेन_ट्यूमर ठीक हो गया ।
🚩मोनिका बेसरा की कहानी –
#पश्चिम_बंगाल की एक क्रिश्चियन आदिवासी महिला जिसका नाम मोनिका बेसरा है, उसे टीबी और पेट में ट्यूमर हो गया था। बेलूरघाट के #सरकारी #अस्पताल के डॉ. रंजन मुस्ताफ उसका इलाज कर रहे थे। उनके इलाज से मोनिका को काफी फायदा हो रहा था और एक बीमारी लगभग ठीक हो गई थी। मोनिका के पति मि. सीको ने इस बात को स्वीकार किया था। वे बेहद गरीब हैं और उनके पाँच बच्चे हैं, कैथोलिक ननों ने उनसे सम्पर्क किया, बच्चों की उत्तम शिक्षा-दीक्षा का आश्वासन दिया, उस परिवार को थोड़ी सी जमीन भी दी और ताबड़तोड़ मोनिका का “ब्रेनवॉश” किया गया, जिससे मदर टेरेसा के “चमत्कार” की कहानी दुनिया को बताई जा सके और उन्हें संत घोषित करने में आसानी हो।
अचानक एक दिन मोनिका बेसरा ने अपने लॉकेट में मदर टेरेसा की तस्वीर देखी और उसका ट्यूमर पूरी तरह से ठीक हो गया। जब एक चैरिटी संस्था ने उस अस्पताल का दौरा कर हकीकत जाननी चाही, तो पाया गया कि मोनिका बेसरा से सम्बन्धित सारा रिकॉर्ड गायब हो चुका है (“टाईम” पत्रिका ने इस बात का उल्लेख किया है)
🚩सनल एदमारुकु टेरेसा के पहले चमत्कार पर कहते हैं कि किसी महिला के पेट पर किसी नन की तस्वीर रख देने से वो ठीक कैसे हो सकती है, जबकि सबूत यह दिखा रहे थे कि उनका इलाज दवाओं से हुआ है ।
🚩वो कहते हैं, "ज्यादातर लोग मदर टेरेसा का विरोध नहीं करना चाहते, क्योंकि उनकी छवि गरीबों के लिए काम करने वालों की रही है । अगर आप मदर टेरेसा पर सवाल उठाते हैं, तो आपको गरीब विरोधी माना जाएगा । उन्होंने कहा कि मेरे मन में उनके खिलाफ कुछ भी नहीं है, लेकिन किसी चमत्कार को बेचना अवैज्ञानिक सोच है।"
🚩इस मुद्दे पर अरूप चटर्जी उत्तेजित होकर कहते हैं, "ये कथित चमत्कार बहुत बेकार और बचकानी बात है और इसे तो चुनौती भी दी जा सकती है।"
🚩इस मसले पर ताजा चुनौती जागरूक लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक ग्रुप ने पेश की है । इन लोगों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से वेटिकन में रविवार को होने वाले मदर टेरेसा के उपाधि समारोह में शामिल होने के फैसलें पर फिर से विचार करने का आग्रह किया है ।
🚩इस याचिका में कहा गया है, "जिस देश का संविधान अपने #नागरिकों से #वैज्ञानिक सोच रखने को कहता है, उसकी विदेश मंत्री का चमत्कारों के आधार पर मिली किसी उपाधि समारोह में जाना, उनकी बुद्धि पर संदेह पैदा करता है।"
🚩#जर्मन_पत्रकार वाल्टर व्युलेन्वेबर ने अपनी पत्रिका “स्टर्न” में लिखा है कि अकेले जर्मनी से लगभग तीन मिलियन डालर का चन्दा मदर की मिशनरी को जाता है, और जिस देश में टैक्स चोरी के आरोप में स्टेफी ग्राफ के पिता तक को जेल हो जाती है, वहाँ से आये हुए पैसे का आज तक कोई ऑडिट नहीं हुआ कि पैसा कहाँ से आता है, कहाँ जाता है, कैसे खर्च किया जाता है... आदि।
🚩#अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पत्रकार क्रिस्टोफर हिचेन्स ने कोलकाता प्रवास के अनुभव पर एक किताब लिखी “हैल्स एन्जेल” (नर्क की परी)। इसमें उन्होंने कहा है कि “कैथोलिक समुदाय विश्व का सबसे ताकतवर समुदाय है, जिन्हें पोप नियंत्रित करते हैं, #चैरिटी चलाना, मिशनरियाँ चलाना, धर्म परिवर्तन करना आदि इनके मुख्य काम हैं...” जाहिर है कि इसलिए मदर टेरेसा को टेम्पलटन सम्मान, #नोबल_सम्मान, मानव अमेरिकी नागरिकता जैसे कई सम्मान मिले हैं ।
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