Wednesday, March 23, 2016

Daily Misuse of Water in Slaughter House is not Shown by Media

🚩आवो मनायें #वैदिक_होली....
💥#मीडिया सूखे रंगों से होली खेलने की सलाह देती हैं ।
💥#सूखे #केमिकल #रंगों से होली खेलने की सलाह देनेवाले लोग वस्तुस्थिति से अनभिज्ञ हैं ।
💥क्योंकि #डॉक्टरों का कहना है कि सूखे रासायनिक रंगों से होली खेलने से शुष्कता, एलर्जी एवं #रोमकूपों में #रसायन अधिक समय तक पड़े रहने से भयंकर त्वचा रोगों का सामना करना पड़ता है ।
💥केमिकल रंगों से होली खेलने के बाद भी बहुत अधिक #पानी खर्च करना पडता है । एक-दो बार खूब पानी से नहाना पड़ता है क्योंकि रासायनिक रंग जल्दी नहीं धुलते । प्राकृतिक रंग जल्दी ही धुल जाते हैं ।

💥#प्राकृतिक रंगो से होली खेलने से पानी की अधिक खपत का प्रलाप करने वाली #मीडिया को #शराब, #कोल्डड्रिंक्स, #गौहत्या के लिए हररोज बरबाद किया जा रहा #करोड़ों #लीटर पानी क्यों नही दिखता...???
💥महाराष्ट्र के नेता विनोद तावडे ने सबूतों के साथ पानी के आँकड़े पेश किये, जो बहुत ही चौंकानेवाले हैं ।
💥उन्होंने दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों लीटर पानी की बरबादी और उस बरबादी में लगातार की जा रही आश्चर्यजनक वृद्धि के 2012 के आँकड़े पेश किये -अभी तो और अधिक बढ़ा गया है।
💥1) मिलेनियम बियर इंडिया लिमिटेड :- इस शराब बनानेवाली कंपनी को जनवरी 2012 में प्रतिदिन 1,288 करोड़ लीटर पानी दिया जा रहा था, जिसे नवंबर 2012 तक करीब दुगना करके 2,014 करोड़ लीटर कर दिया गया । अर्थात् केवल 10 महीनों में 726 करोड़ लीटर्स की बढ़ोतरी !
💥2) फॉस्टर्स इंडिया लिमिटेड :- इस शराब की कंपनी को जनवरी 2012 में 888.7 करोड़ लीटर पानी मिलता था, नवम्बर 2012 में उसे बढ़ाकर 1,000.7 करोड़ लीटर पानी दिया जाने लगा ।
💥3) इंडो-यूरोपियन बीवरेजेस :- इस कंपनी को जनवरी 2012 में 252.1 करोड़ लीटर पानी दिया जा रहा था, जो अब बढ़कर 470.1 करोड़ लीटर तक पहुँच गया है । अर्थात् 200 करोड़ लीटर्स की बढ़ोतरी !
💥4) औरंगाबाद ब्रेवरी :- इस विशाल शराब की भट्ठी को जारी पानी के कोटे को 1,400.3 से बढ़ाकर
1,462.1 करोड़ लीटर कर दिया गया है । अर्थात् 60 करोड़ लीटर्स की बढ़ोतरी !
💥‘डीएनए न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार 1 लीटर कोल्डड्रिंक बनाने में 55 लीटर पानी बरबाद होता है ।
💥कत्लखाने में 1 किलो गोमांस के लिए 15,000 लीटर पानी बरबाद होता है । कोल्डड्रिंक्स और शराब के कारखानों में मशीनरी और बोतलें धोने में तथा बनाने की प्रक्रिया में करोड़ों लीटर पानी बरबाद होता है ।
💥बड़े-बड़े #होटलों में आलीशान #स्विमिंग टैंक्स के लिए लाखों लीटर पानी का सप्लाई बेहिचक किया जाता है !
💥यह हकीकत यह होते हुए भी मीडिया द्वारा कभी इसका विरोध नही किया गया ।
💥'#प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ के अनुसार रासायनिक रंगों से होली खेलना अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना है ।
💥डॉ. #फ्रांसिन पिंटो के अनुसार रासायनिक रंगों से होली खेलने के बाद उन्हें धोने के लिए प्रति व्यक्ति 35 से 500 लीटर तक पानी खर्च करना पड़ता है ।
💥यह केमिकल युक्त पानी पर्यावरण के लिए घातक है । घर भी रंगों से खराब हो जाते हैं । उन्हें धोने में प्रति कम-से-कम #100 लीटर पानी बरबाद हो जाता है ।
💥#होली का #त्यौहार पूरे देश में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह पर्व मूल में बड़ा ही स्वास्थ्यप्रद एवं मन की प्रसन्नता बढ़ाने वाला है लेकिन दुःख के साथ कहना पड़ता है कि इस पवित्र उत्सव में नशा, वीभत्स गालियाँ और केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग करके कुछ लोगों ने #ऋषियों की हितभावना,समाज की #शारीरिक, #मानसिक, #बौद्धिक और प्राकृतिक उन्नति की भावनाओं का लाभ लेने से समाज को वंचित कर दिया है।
💥प्राकृतिक रंगों से होली खेले बिना जो लोग ग्रीष्म ऋतु बिताते हैं,उन्हें #गर्मीजन्य उत्तेजना, चिड़चिड़ापन, खिन्नता, मानसिक अवसाद (डिप्रेशन), तनाव, अनिद्रा इत्यादि तकलीफों का सामना करना पड़ता है ।
💥त्वचा विशेषज्ञ डॉ. आनंद कृष्णा कहते हैं कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सारा साल हम जो त्वचा और बालों का ध्यान रखते हैं वह होली के अवसर पर भूल जाते हैं और केमिकल रंगों से इनको भारी नुकसान पहुँचाते हैं । 
🌹प्राकृतिक रंग बनाने की सरल विधियाँ...
💥* #केसरिया रंग : पलाश के फूलों को रात को पानी में भिगो दें। सुबह केसरिया रंग को ऐसे ही प्रयोग में लायें या उबालकर, उसे ठंडा करके होली का आनंद उठायें।
💥* #सूखा हरा रंग : केवल मेंहदी चूर्ण या उसे समान मात्रा में आटे में मिलाकर बनाये गये मिश्रण का प्रयोग करें।
💥* #गीला पीला रंग : 2 चम्मच हल्दी चूर्ण 2 लीटर पानी में डालकर अच्छी तरह उबालें।
💥#गीला लाल रंग : दो चम्मच मेंहदी चूर्ण को एक लीटर पानी में अच्छी तरह घोल लें।
🚩होली के पर्व की शुरुआत हमारे ऋषियों द्वारा जिस उद्देश्य को ध्यान में रखकर की गयी थी उसके बारे में बताते हुए संत #आसारामजी बापू कहते हैं कि ‘‘यह होली का त्यौहार हास्य-विनोद करके छुपे हुए #आनंद-स्वभाव को जगाने के लिए है।
💥इस पर्व के स्वास्थ्य हितकारी पहलुओं  को जो हो गया-सो हो गया...अथार्त् 
💥हो… ली… बीत गई सो बीत गई, उससे राग-द्वेष मत कर।
💥‘‘होली के दिनों में सुबह 20-25 #नीम के कोमल पत्ते और एक काली मिर्च चबा के खाने से व्यक्ति वर्षभर निरोग रहता है।
💥पलाश के फूलों से होली खेलने की परम्परा का फायदा बताते हुए आशारामजी बापू कहते हैं कि ‘‘#पलाश कफ, पित्त, कुष्ठ, दाह, वायु तथा रक्तदोष का नाश करता है। साथ ही रक्तसंचार में वृद्धि करता है एवं मांसपेशियों का स्वास्थ्य, मानसिक शक्ति व संकल्पशक्ति को बढ़ाता है।
💥 रासायनिक रंगों से होली खेलने में प्रति व्यक्ति लगभग 35 से 300 लीटर पानी खर्च होता है, जबकि सामूहिक प्राकृतिक-वैदिक होली में प्रति व्यक्ति लगभग 30 से 60 मि.ली. से कम पानी लगता है ।
💥इस प्रकार देश की जल-सम्पदा की हजारों गुना बचत होती है । पलाश के फूलों का रंग बनाने के लिए उन्हें इकट्ठे करनेवाले #आदिवासियों को #रोजी-रोटी मिल जाती है । पलाश के फूलों से बने रंगों से होली खेलने से शरीर में गर्मी सहन करने की क्षमता बढ़ती है, मानसिक संतुलन बना रहता है ।
💥इतना ही नहीं, पलाश के फूलों का रंग रक्त-संचार में वृद्धि करता है, मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मानसिक शक्ति व इच्छाशक्ति को बढ़ाता है । शरीर की सप्तधातुओं एवं सप्तरंगों का संतुलन करता है ।
💥इधर
💥केमिकल रंगों का और उससे फलने-फूलनेवाला 'अरबों रुपयों का दवाइयों का व्यापार आज संत आशारामजी बापू के कारण प्रभावित हो रहा था।
🚩संत आशारामजी बापू के सामूहिक प्राकृतिक होली अभियान से शारीरिक मानसिक अनेक बीमारियों में लाभ होकर देश का करोड़ों रुपयों का स्वास्थ्य-खर्च बच रहा है । साथ ही पानी की भी बचत हो रही है । पर मीडिया ने तो ठेका लिया है समाज को गुमराह करने का..
🚩5-6 हजार लीटर प्राकृतिक रंग, जो कि लाखों रुपयों का स्वास्थ्य व्यय बचाता है, के ऊपर बवाल मचाने वाली मीडिया को शराब, कोल्डड्रिंक्स उत्पादन तथा कत्लखानों में गोमांस के लिए प्रतिदिन हो रहे करोड़ों लीटर पानी की बरबादी जरा भी समस्या नही लगती।ऐसा क्यों ???
🚩आप समझदार हैं, समझ ही गये होंगे...

💥कुछ सालो में पता चल ही गया होगा क़ि जब भी कोई हिन्दू त्यौहार नजदीक आता है तो दलाल मीडिया और भारत का तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग हमारे हिन्दू त्यौहारों में खोट निकालने लग जाता है
💥जैसे #दीपावली नजदीक आते ही छाती कूट कूट कर पटाखों से होने वाले प्रदूषण का रोना रोने वाली मीडिया को 31 दिसम्बर को #आतिशबाजियों का प्रदूषण नही दिखता। आतिशबाजियों से क्या ऑक्सीजन पैदा होती है?
💥ऐसे ही #शिवरात्रि के पावन पर्व पर दूध की बर्बादी की दलीलें देने वाली मीडिया हज़ारो दुधारू गायों की हत्या पर मौन क्यों हो जाती है?
💥अब होली आई है तो #बिकाऊ मीडिया पानी बजत की दलीलें लेकर फिर उपस्थित होंगी ।
💥लेकिन
पानी बचाना है तो साल में 364 दिन बचाओ पर होली अवश्य मनाओं
क्योंकि बदलना है तो अपना व्यवहार बदलो....त्यौहार नहीँ ।
🚩Official Jago hindustani Visit
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💥Blogspot -  http://goo.gl/1L9tH1
🚩🚩जागो हिन्दुस्तानी🚩🚩
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