Wednesday, October 21, 2015

Psychological Strategy Applied By Media To Hide The Conspiracy

🚩🚩जागो हिन्दुस्तानी🚩🚩
🔥साजिश को सच का रूप देने की मीडिया द्वारा मनोवैज्ञानिक रणनीति 
⛳संत आसारामजी बापू के खिलाफ चल रहे पूर्वनियोजित षड्यंत्र को एक साइकोलॉजिस्ट होने के नाते मैं आपको बताना चाहती हूँ ।
💥इसके आठ मुख्य पहलू हैं जो आपको समझने में मदद करेंगे कि किन-किन चीजों का किस तरह उपयोग किया जा रहा है ताकि साजिश को सच का रूप दिया जा सके ।
👉(१) जनता के विशिष्ट वर्गों पर निशाना (Target population) : समाज के शिक्षित, जागरूक, उच्च एवं मुख्यतः युवा वर्ग को निशाना बनाया गया क्योंकि इनको विश्वास दिलाने पर ये तुरंत प्रतिक्रिया करते हैं ।
👉(२) षड्यंत्र का मुद्दा (Topic of Conspiracy) : देश की ज्वलंत समस्या ‘महिलाओं पर अत्याचार’ को मुख्य टॉपिक बनाया है, इस भावनात्मक विषय पर हर कोई तुरंत प्रतिक्रिया करके विरोध दर्शाता है ।
👉(३) रणनीति (Strategy) : मार्केटिंग रणनीति का उपयोग करके दर्शकों को पूरी तरह से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है । कंज्यूमर साइकोलॉजी के अनुसार कोई विज्ञापन अगर हमें पहली बार पसंद नहीं आता है लेकिन जब हम बार-बार उसे देखते रहते हैं तो हमें पता भी नहीं चलता है कि कब हम उस विज्ञापन को गुनगुनाने लग गये । बिल्कुल ऐसे ही आसाराम बापू के मामले को बार-बार दिखाने से दर्शकों को असत्य भी सत्य जैसा लगने लगता है ।
👉(४) प्रस्तुतीकरण का तरीका (Execution) : पेड मीडिया चैनलों के एंकर आपके ऊपर हावी होकर बात करना चाहते हैं । वे सिर्फ खबर बताना नहीं चाहते बल्कि आपको किसी भी तरीके से प्रभावित करना चाहते हैं ।
👉(५) भाषा (Language) : खबर को बहुत चटपटे शब्दों के द्वारा असामान्य तरीके से बताते हैं । ‘बात गम्भीर है, मामूली झड़प’ आदि शब्दों की जगह ‘संगीन, वारदात, गिरोह, बड़ा खुलासा, स्टिंग ऑपरेशन’ ऐसे शब्दों के सहारे मामूली मुद्दे को भी भयानक रूप दे देते हैं ।
👉(६) आधारहीन कहानियाँ बनाना (Making Baseless Stories) : ‘स्टिंग ऑपरेशन’ आदि आधारहीन कहानियाँ बनाकर मामले को रुचिकर बना के उलझाने की कोशिश करते हैं ।
👉(७) मुख्य हथियार (Major Tools) : बहुत सारे विडियो जो दिखाये जाते हैं वे तोड़-मरोड़ के बनाये जाते हैं । ऐसे ऑडियो टेप भी प्रसारित किये जाते हैं । यह टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग है । इसके अलावा कमजोर, नकारात्मक मानसिकतावालों को डरा के या प्रलोभन देकर उनसे बुलवाते हैं । आश्रम से निकाले गये २-४ भगोड़ों को मोहरा बनाते हैं ताकि झूठी विश्वसनीयता बढ़ायी जा सके ।
👉(८) मनोवैज्ञानिक वातावरण तैयार करना (Creating Psychological Environment) : आसाराम बापू की जमानत की सुनवाई से एक दिन पहले धमकियों की खबरें उछाली जाती हैं, कभी पुलिस को, कभी माता-पिता और लड़की को तो कभी न्यायाधीश को । ये खबरें कभी भी कुछ सत्य साबित नहीं हुर्इं ।
💥अब आप खुद से प्रश्न पूछिये और खुद ही जवाब ढूँढ़िये कि क्या ये आरोप सच हैं या एक सोची-समझी साजिस हैं❓
🔥केवल पेड मीडिया चैनल ही नहीं बल्कि इसीके समान प्रिंट मीडिया भी खतरनाक तरीके से जनमानस को प्रभावित कर रहा है । इन दोनों से सावधान रहना चाहिए ।
🌹-शिल्पा अग्रवाल,
प्रसिद्ध मनोविज्ञानी
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