Wednesday, February 7, 2018

वेलेंटाइन डे मनाने वाला खुद अपने को ही ले जा रहा है भयंकर बर्बादी के रास्ते : रिपोर्ट

February 7, 2018

भारत देश की संस्कृति वेलेंटाइन डे नही है, लेकिन आज के कुछ नासमझ युवक-युवतियां वेलेंटाइन डे मनाने को लालायित रहते हैं लेकिन उनको आगे का परिणाम पता नही होता इसलिए बेचारे ऐसा करते है ।
Celebrating Valentine's Day itself is taking itself to the path of the devastating waste: report

आपको बता दें कि भारत में वेलेंटाइन डे की गंदगी अपने व्यापार का स्तर बढ़ाने के लिए अंतराष्ट्रीय कम्पनियां लेकर आई हैं और वो ही कम्पनियां  मीडिया में पैसा देकर वेलेंटाइन डे का खूब प्रचार प्रसार करवाती है जिसके कारण उनका व्यापार लाखों नही, करोड़ो नही, अरबों नही लेकिन खरबों में हो जाता है, इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया जनवरी से ही वेलेंटाइन डे यानि पश्चिमी संस्कृति का प्रचार करने लगता हैं जिसके कारण विदेशी कम्पनियों के गिफ्ट, कंडोम, नशीले पदार्थ आदि 10 गुना बिकते है जिसके कारण उनको खरबों रुपये का फायदा होता है ।

भारत में इसके भयंकर परिणाम देखे बिना ही वेलेंटाइन डे मनाना शुरू कर दिया गया जबकि विदेशों में वेलेंटाइन डे मनाने के भयावह परिणाम सामने आए हैं । 

आँकड़े बताते हैं कि आज पाश्चात्य देशों में वेलेंटाइन डे जैसे त्यौहार मनाने के कारण कितनी दुर्गति हुई है । इस दुर्गति के परिणामस्वरूप वहाँ के निवासियों के व्यक्तिगत जीवन में रोग इतने बढ़ गये हैं कि भारत से 10 गुनी ज्यादा दवाइयाँ अमेरिका में खर्च होती हैं जबकि भारत की आबादी अमेरिका से तीन गुनी ज्यादा है ।
मानसिक रोग इतने बढ़े हैं कि हर दस अमेरिकन में से एक को मानसिक रोग होता है | दुर्वासनाएँ इतनी बढ़ी है कि हर छः सेकण्ड में एक बलात्कार होता है और हर वर्ष लगभग 20 लाख कन्याएँ विवाह के पूर्व ही गर्भवती हो जाती हैं | मुक्त साहचर्य (free sex)  का हिमायती होने के कारण शादी के पहले वहाँ का प्रायः हर व्यक्ति जातीय संबंध बनाने लगता है । इसी वजह से लगभग 65% शादियाँ तलाक में बदल जाती हैं । हर 10 सेकण्ड में एक सेंधमारी करते है, 1999 से 2006 तक आत्महत्या का वार्षिक दर प्रति वर्ष लगभग एक प्रतिशत था लेकिन 2006 से 2014 के बीच में आत्महत्या दर प्रतिवर्ष दो प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। आत्महत्या की दर में 24 प्रतिशत वृद्धि हो गई है ।

पाश्चात्य संस्कृति के इन आंकड़ों को देखकर भी अगर आप वेलेंटाइन डे मनाने को आकर्षित होते है तो आप अपना जीवन खुद बर्बादी के रास्ते ले जा रहे हो । आपको मानसिक, शारीरिक रोग घेर लेंगे फिर आप डॉक्टरों के पास चक्कर लगाते रहो जिसके कारण आर्थिक परेशानी भी उठाने की नोबत आ सकती है फिर आत्महत्या तक कर सकते हैं।

भारत के युवक-युवतियां अगर पाश्चात्य संस्कृति की ओर गए तो परिणाम भयंकर आने वाला है ।
अब युवक-युवतियों के कहना होगा कि क्या हम प्यार नही करे तो उनको एक सलाह है कि दुनिया में आपको सबसे पहले प्यार किया था आपके माँ-बाप ने । आप दुनिया में आने वाले थे, तबसे लेकर आज तक आपको वो प्यार करते रहे लेकिन उनका प्यार तो आप भूल गये उनको ठुकरा दिया । जब आप बोलना भी नही जानते थे तब उन्होंने आपका भरण पोषण किया । आपको ऊंचे से ऊँचे स्थान पर पहुचाने के लिए खुद भूखे रहकर भी आपको उच्च शिक्षा दिलाई । उनका केवल एक ही सपना रहा कि मेरे बेटा/बेटी सबसे अधिक तेजस्वी ओजस्वी और महान बने । ऐसा अनमोल उनका प्यार आप भुलाकर किसी  लड़के-लड़की के चक्कर में आकर अपने माँ-बाप का कितना दुःख दे रहे हैं, वो तो वो ही जाने इसलिए आप अपने को बर्बादी से बचाना चाहते है, माँ-बाप के प्यार का बदला चुकाना चाहते है तो आपको एक ही सलाह है कि आप मीडिया, टीवी, अखबार पढ़कर वेलेंटाइन डे नही मनाकर उस दिन अपने माता-पिता का पूजन करें ।

शास्त्रों में माता-पिता की भारी महिमा...

शिव-पुराण में आता हैः

पित्रोश्च पूजनं कृत्वा प्रक्रान्तिं च करोति यः।
तस्य वै पृथिवीजन्यफलं भवति निश्चितम्।।

अपहाय गृहे यो वै पितरौ तीर्थमाव्रजेत।
तस्य पापं तथा प्रोक्तं हनने च तयोर्यथा।।

पुत्रस्य य महत्तीर्थं पित्रोश्चरणपंकजम्।
अन्यतीर्थं तु दूरे वै गत्वा सम्प्राप्यते पुनः।।

इदं संनिहितं तीर्थं सुलभं धर्मसाधनम्।
पुत्रस्य च स्त्रियाश्चैव तीर्थं गेहे सुशोभनम्।।

जो पुत्र माता-पिता की पूजा करके उनकी प्रदक्षिणा करता है, उसे पृथ्वी-परिक्रमाजनित फल सुलभ हो जाता है। जो माता-पिता को घर पर छोड़ कर तीर्थयात्रा के लिए जाता है, वह माता-पिता की हत्या से मिलने वाले पाप का भागी होता है क्योंकि पुत्र के लिए माता-पिता के चरण-सरोज ही महान तीर्थ हैं। अन्य तीर्थ तो दूर जाने पर प्राप्त होते हैं परंतु धर्म का साधनभूत यह तीर्थ तो पास में ही सुलभ है। पुत्र के लिए (माता-पिता) और स्त्री के लिए (पति) सुंदर तीर्थ घर में ही विद्यमान हैं।
(शिव पुराण, रूद्र सं.. कु खं.. - 20)

माता गुरुतरा भूमेः खात् पितोच्चतरस्तथा।

'माता का गौरव पृथ्वी से भी अधिक है और पिता आकाश से भी ऊँचे (श्रेष्ठ) हैं।'
(महाभारत, वनपर्वणि, आरण्येव पर्वः 313.60)

अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्।।

'जो माता-पिता और गुरुजनों को प्रणाम करता है और उनकी सेवा करता है, उसकी आयु, विद्या, यश और बल चारों बढ़ते हैं।' (मनुस्मृतिः 2.121)

जो अपने माता-पिता का नहीं, वह अन्य किसका होगा ! जिनके कष्टों और अश्रुओं की शक्ति से अस्तित्व प्राप्त किया, उन्हीं के प्रति अनास्था रखने वाला व्यक्ति पत्नी, पुत्र, भाई और समाज के प्रति क्या आस्था रखेगा ! ऐसे पाखण्डी से दूर रहना ही श्रेयस्कर है। - बोधायन ऋषि

अतः हे देश के कर्णधार युवक-युवतियों आप भी वेलेंटाइन डे का त्याग करके उस दिन मातृ-पितृ पूजन मनाएं ।
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