Friday, February 16, 2018

गाय को गौमाता का दर्जा दिलाने के लिए होगा विशाल आंदोलन, गोपालमणि का खुल्ला पत्र

February 16, 2018

भारत में प्राचीन काल से ही गाय की पूजा होती रही है क्योंकि गाय में 33 करोड़ देवताओं का वास माना गया है इसलिए गाय को माता का दर्जा भी दिया है, कहते है कि बच्चा जन्मे और किसी कारणवश उसकी माता का निधन हो जाये तो बच्चे को गाय का दूध पिलाने पर जिंदा रह सकता है । कहते है कि जननी दूध पिलाती, केवल साल छमाही भर ! गोमाता पय-सुधा पिलाती, रक्षा करती #जीवन भर !!

दुनिया में किसी भी प्राणी का मल-मूत्र पवित्र नही माना जाता । यहाँ तक कि मनुष्य का भी मल-मूत्र पवित्र नही माना जाता है केवल गाय ही ऐसा प्राणी है जिसका गोबर और गौ-मूत्र पवित्र माना जाता है । यहाँ तक कि #पूजा पाठ में भी गोबर और गौ-मूत्र का उपयोग किया जाता है ।
Govamata will have a huge movement to give cow status,
 Gopalani's open letter

गौ माता के #गोबर से गैस बनती है जो आपके #रसोई घर में उपयोग आ सकती है । उसका खाद जिस जमीन पर पड़ता है वो बंजर जमीन भी उपजाऊ हो जाती है और उस जमीन का धान्य बहुत पौष्टिक होता है ।

गौ-माता के सूखे कंडे में घी डालकर धुँआ किया जाये तो 1 टन #ऑक्सीजन बनता है ।

गौ मूत्र में मुख्यत 16 खनिज तत्व पाये जाते हैं जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं । यहाँ तक कि कैंसर जैसी भयंकर बीमारियां भी मिटा देती है ।

गाय माता के शरीर से पवित्र गुगल जैसी सुगंध आती है जो वातावरण को शुद्ध और पवित्र करती है ।

आपको बता दें कि 1966 में धर्मसम्राट संत करपात्रीजी महाराज ने गौरक्षा आंदोलन के लिए बड़ा आंदोलन किया था अब 51 वर्ष बाद फिर से 18 फरवरी 2018 को दिल्ली के रामलीला मैदान में गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाकर गोवंश हत्यामुक्त भारत बनाने के लिए एक ऐतिहासिक स्वर्णिम आंदोलन गौक्रांति अग्रदूत गोपाल मणि जी  के सान्निध्य में सभी साधु-संतों, धर्मरक्षक विभूतियों और लाखों गौभक्तो की उपस्थिति के साथ होने जा रहा है।

संत गोपाल मणि जी का खुल्ला पत्र

संत गोपालमणि गौमाता के लिए क्यों करना चाहते है बड़ा आंदोलन, उसके लिए उनके नाम से सोशल मीडिया पर एक पत्र घूम रहा है ।

पत्र में संत गोपालमणि ने लिखा है कि 
प्रिय गौभक्तो जय गौमाता,
_18 फरवरी 2018_ दिन रविवार को होने जा रहा है गौमाता प्रतिष्ठा आंदोलन।

ये आंदोलन भारत की धर्मप्रेमी जनता, 80 कोटि सनातनियों की आस्था से जुड़ा विषय है क्योंकि गौमाता ही सनातन धर्म की मूल है। जिस गौमाता के दूध की खीर से भगवान राम अवतरित हुए, जिस गौमाता के पीछे भगवान कृष्ण भागते रहे, जिस गौमाता की रक्षा के लिए भगवान परशुराम ने अपने पिता की हत्या का प्रतिशोध लिया, जिस गौमाता के कारण ही हमारे 16 संस्कार पूर्ण होते है, जो गौमाता भारत माता का साकार स्वरूप है, जो गौमाता आज़ादी की क्रांति का मूल है, जो गौमाता धर्म, अर्थ, काम और  मोक्ष देने वाली है, जो गौमाता भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो गौमाता भारत को विश्वगुरु बना सकती है, जो गौमाता किसानों को गोबर का मूल्य दिला सकती है, जो गौमाता दूध से ही कुपोषण को दूर कर सकती है, जो गौमाता प्रकृति को प्राणवायु दे सकती है, जो गौमाता आरोग्य की मूल है,जो गौमाता स्वयं प्रकृति है, जो गौमाता भारत का स्वरूप है उस गौमाता को 70 वर्षो में काटा जा रहा है इससे बड़े शर्म, दुर्भाग्य और पाप क्या होगा भला।

पत्र में आगे बताया कि सोचिये गौमाता को हम विश्वमाता कहते हैं और माता मानते है लेकिन भारत सरकार के दस्तावेजों में गाय पशु है और पशु काटने के 36000 से अधिक वैध-अवैध कत्लखाने है भारत में, इसलिए *जब तक गाय पशु है तब तक कौन उसे बचा सकता है और जब गाय माता है तो कौन माई का लाल उसे काट सकता है*। इसलिए 18 फरवरी 2018 के आंदोलन गौमाता को इस देश में संवैधनिक रूप से माता का सम्मान दिलाने का है और पांच मांगो के साथ चल रहा है -

 1. गौ माता को राष्ट्रमाता के पद पर सुशोभित करें एंव गौ मंत्रालयों का अलग से गठन हो।

2. किसानों को गोबर का मूल्य दो। गोबर की खाद का उपयोग हो,गोबर गैस का चूल्हा जलाने एंव गोबर गैस को सी.न.जी गैस में परिवर्तन कर मोटर गाड़ी चलाने में उपयोग हो।

3 . 10 वर्ष तक के बालक-बालिकाओ को सरकार की ओर से भारतीय गाय का दूध नि:शुल्क उपलब्ध हो ,प्रत्येक गाँव में भारतीय नंदी की व्यवस्था हो।

4. गोचरान  भूमि गौवंश के लिये ही मुक्त हो।

5.गौ-हत्यारों को मृत्यु दण्ड दिया जायें।

इसलिए आपसे निवेदन है गौमाता के इस महान अहिंसक और शांतिपूर्ण यज्ञ में भाग लेकर अपनी पूरी ताकत से इस आंदोलन में जुड़े, लगे और पोस्टर, पम्पलेट, होर्डिंग, सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इसका प्रचार करें और कराएं ।

उस पत्र में आगे लिखा है कि ये हमें सोचना होगा कि भारत के इतिहास में जब इतना बड़ा आंदोलन होने जा रहा है तो हम सबको पीछे नही रहना है। ये मौका दोबारा नही आएगा, बार बार नहीं आएगा, इसलिए इस संदेश को पढ़ रहा हर व्यक्ति 18 फरवरी 2018 के आंदोलन में अपनी भागीदारी तय करें ताकि भविष्य का इतिहास आपको प्रश्रचिन्ह में ना रखे।_

अधिक से अधिक गौभक्तों, सनातनियों और धर्मप्रेमी जनता को इस आंदोलन से जोड़े क्योंकि ये हमारी संस्कृति का विषय है, माँ के सम्मान का विषय है, गौरक्षा का विषय है।

गौ-माता भारत देश की रीड की हड्डी है । जो सभी को स्वस्थ्य #सुखी जीवन जीने में मदद रूप बनती है । सभी को आजीवन गौ-माता की रक्षा के लिए कटिबद्ध रहना चाहिए ।

गौमाता की इतनी उपयोगीता और उसकी हत्या हो रही है उससे लगता है कि अब वक्त आ गया है कि सभी को मिलकर #गौ-माता को #राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाकर तन-मन-धन से इसकी रक्षा करनी चाहिए ।
Post a Comment