Sunday, January 29, 2017

भारत में पत्रकारिता का इतिहास एवं आज की पत्रकारिता..!!

भारत में पत्रकारिता का इतिहास एवं आज की  पत्रकारिता..!!

1780 को आज के दिन मतलब 29 जनवरी 1780 को भारत में पहला अंग्रेजी अखबार बंगाल गजट छपा था। तब से लेकर अब तक देश में हजारों न्‍यूज पेपर्स, टीवी चैनल्‍स और ऑनलाइन वेबसाइट्स आ चुकी हैं। 

आज प्रतियोगिता की अंधी दौड़ के चक्‍कर में कई बार गलत रिपोर्टिंग के चलते ऐसे हालात भी पैदा हुए हैं जिससे किसी एक को नहीं बल्कि पूरे सिस्‍टम को भी नुकसान उठाना पड़ गया। 

पहले की पत्रकारिता और आज की पत्रकरिता में आये भारी बदलाव !!

विश्व में पत्रकारिता का आरंभ सन् 131 ईस्वी पूर्व रोम में हुआ था । 

उस समय पत्थर या धातु की पट्टी होती थी, जिस पर समाचार अंकित होते थे ।  

15वीं शताब्दी में अखबार छापने की मशीन का अविष्कार किया गया ।

भारत में पहला अखबार 29 जनवरी 1780 में प्रकाशित हुआ । इसका प्रकाशक ईस्ट इंडिया कंपनी का भूतपूर्व अधिकारी विलेम बॉल्ट्स था । यह अखबार कोलकाता से अंग्रेजी में छपता था ।

1819 में बंगाली भारतीय भाषा में पहला समाचार-पत्र प्रकाशित हुआ था। ।

1822 में गुजराती और 1826 में हिंदी में प्रथम समाचार-पत्र का प्रकाशन प्रारंभ हुआ ।

अंग्रेजों ने तो देश को तोड़ने के लिए पत्रकारिता शुरू की थी । लेकिन देशभक्तों ने पत्रकारिता इसलिए शुरू की ताकि जनता तक सही खबरें पहुँच सके और समय-समय पर देश की आंतरिक स्थिति से जनता को अवगत कराकर जागरूक किया जा सकें तथा देश में हो रही अन्यायपूर्ण गतिविधियों क खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाई जा सकें ।

जिससे देश की संस्कृति सुरक्षित रहें और देश में अमन चमन बना रहें ।

परन्तु समय के हेर-फेर में पत्रकारिता में कुछ स्वार्थी और बेईमान लोग घुस गए, जिन्हें देश की अस्मिता से कुछ लेना-देना नही, बस केवल पैसों और अपने नाम के लिए काम करने लगे ।

ऐसे स्वार्थी लोग आज अन्न भारत देश का खाते हैं और काम विदेशी NGO'S के लिए करते हैं ।

इतिहास में वर्णित है कि हमारी भारतीय संस्कृति को मिटाने का प्रयास तो समय-समय पर होता ही आया है ।

भारत के गौरवपूर्ण इतिहास पर दृष्टि डालें तो पता चलता है कि भारत की गरिमा बढ़ाने वाले यहाँ के साधु-संत हैं। जिन्होंने समाज को सही मार्गदर्शन देकर भौतिक व आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर किया है ।

अब अगर भारतीय संस्कृति को नष्ट करना है तो यहाँ के साधु-संतो के प्रति जनता के मन में नफरत पैदा करनी होगी तभी भारतीय संस्कृति को नष्ट किया जा सकता है ।

इसलिए संत और समाज के बीच विदेशी फंड से चलने वाली भारतीय मीडिया ने खाई का काम किया है ।

आज आप देख सकते हैं कि जितना समाजसेवी सुप्रतिष्ठित हस्तियों और साधु-संतो के खिलाफ मीडिया द्वारा बोला जाता है उतना तो बड़े से बड़े देशद्रोही के खिलाफ भी मीडिया नहीं बोलती!
 पर फिर भी कई भोले-भाले लोग अपनी सूक्ष्म मति का उपयोग न करके मीडिया की मनगढ़ंत बातों को सच मान कर अपने ही धर्म के विरुद्ध बोलने लग जाते हैं । 

कई सालों से देश में हजारों विदेशी NGO'S ने अपना काम शुरू कर दिया है।

1984 में ये विदेशी NGO'S भारत में 
टी.वी. लेकर आये । पहले टी.वी. के माध्यम से भारत की जनता को धार्मिक सीरियल दिखाना चालू किया और DDन्यूज शुरू हुआ । जिससे लोगो में टीवी देखने और न्यूज द्वारा देश की गतिविधियाँ जानने की रूचि बढ़े।

फिर जब जनता को टीवी देखने की आदत पड़ गई तब देश की संस्कृति को तोड़ने के इरादे से धीरे-धीरे प्यार भरी फिल्में चालू की गई । उसके बाद अर्धनग्न अवस्था वाली फिल्में, संस्कृति विरोधी सीरियल और साधु संतों, हिन्दू संगठनों तथा देश की संस्कृति विरोधी न्यूज की शुरूवात कर दी गई ।

ऐसा सब दिखा भारतीय संस्कृति को नीचा और विदेशी संस्कृति को ऊँचा दिखाकर लोगों का ब्रेनवाश किया गया । इसी कारण आज के युवावर्ग में अपनी संस्कृति के प्रति नफरत तथा पाश्चत्य सभ्यता के प्रति आकर्षण बढ़ गया है।

आज समाज में खुलेआम गन्दी फिल्में, भारतीय संस्कृति विरोधी न्यूज दिखाई जाती है क्योंकि 90% भारत न्यूज चैनल के मालिक विदेशी है । उनको भारत की जनता का ब्रेनवाश करने के लिए ईसाई मिशनरियों और मुस्लिम संगठनो द्वारा खूब पैसा मिल रहा है ।

अतः मेरे भारतवासियों सावधान हो जाओ...!!!

अपनी संस्कृति की गरिमा पहचानों...!!!

याद करो वो दिन...जब मुगल और अंग्रजो ने अनेको साल हम पर राज किया था । भारत के मंदिर तोड़े गए, हमारी माँ-बहनों की इज्जत लूटी गई, हमारी देश की सम्पति लूटी गई थी ।

उस समय शिवाजी, महाराणा प्रताप , भगत सिंह , चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रन्तिकारी आये और देश को आजाद करवाया ।

हे  भारतवासियों ! भारत के लाखों लोगो ने जो देश की आजादी के लिए अपना बलिदान दिया है उसको खोने न देना ।

आज जो देश की अस्मिता बनाये रखने में सबसे बड़ी दुश्मन बन कर खड़ी है वो है
विदेशी फंड से चलने वाली भारतीय पत्रकारिता ।

अतः सबसे पहले ऐसी बिकाऊ मीडिया का बहिष्कार कर सिर्फ और सिर्फ देशभक्त चैनल सुदर्शन न्यूज ही देखें जो निष्पक्ष और सच्चाई समाज तक पहुँचाने में आगे आता है ।

जय हिन्द!!
जय भारत!!
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