Monday, January 21, 2019

वो काली रात जब लाखों हिंदूओ को कश्मीर छोड़ने को किया मजबूर

18 जनवरी  2019
www.azaadbharat.org
🚩 1990 जनवरी 19 इतिहास का वो काला दिन जब लाखों हिन्दू बंधुओं को जिहादियों ने धमकी देकर उन्हें वहां से विस्थापित होने के लिए विवश किया था  ।
https://youtu.be/LPcfGSS04hQ
🚩 19 जनवरी जब-जब यह तारीख आती है, #कश्मी री #पंडितों के जख्मल हरे हो जाते हैं । यही वह तारीख है जिस दिन #जम्मू9 कश्मीीर में बसे कश्मीतरी पंडितों को अपने ही #देश में शरणार्थी बनकर रहने को मजबूर कर दिया गया । इस तारीख ने उनके लिए जिंदगी के मायने ही बदल दिए थे ।

🚩कश्मीेरी पंडितों को बताया काफिर-
देश की आजादी के बाद धरती के जन्नत कश्मीर में जहन्नुम का मौहाल बन चुका था । 19 जनवरी 1990की काली रात को करीब तीन लाख कश्मीरी पंडितों को अपना आशियाना छोड़कर पलायन को मजबूर होना पड़ा था । अलगावादियों ने हिन्दुओ के घर पर एक नोटिस चस्पा की गई । जिसपर लिखा था कि ‘या तो मुस्लिम बन जाओ या फिर कश्मीर छोड़कर भाग जाओ…या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ ।’
🚩 20 जनवरी 1999 को कश्मीैर की मस्जिदों से कश्मीखरी पंडितों को काफिर करार दिया गया । #मस्जिदों से लाउडस्पी2करों के जरिए ऐलान किया गया, 'कश्मीीरी पंडित या तो मुसलमान धर्म अपना लें, या चले जाएं या फिर मरने के लिए तैयार रहें ।' यह ऐलान इसलिए किया गया ताकि #कश्मी री पंडितों के घरों को पहचाना जा सके और उन्हेंे या तो इस्लादम कुबूल करने के लिए मजबूर किया जाए या फिर उन्हें् मार दिया जाए ।
🚩कश्मीरी पंडितों के सर काटे गए, कटे सर वाले शवों को चौक-चौराहों पर लटकाया गया था  ।
🚩बड़ी संख्याि में कश्मीएरी पंडितों ने अपने घर छोड़ दिए । आंकड़ों के मुताबिक 1990 के बाद करीब 7 लाख कश्मीरी पंडित अपने घरों को छोड़कर कश्मीीर से विस्थापित होने को मजबूर हुए ।
🚩सरेआम हुए थे बलात्कार!!
🚩एक कश्मीरी पंडित नर्स के साथ #आतंकियों ने #सामूहिक #बलात्कार किया और उसके बाद मार-मार कर उसकी #हत्या कर दी । घाटी में कई कश्मीरी पंडितों की बस्तियों में सामूहिक बलात्कार और #लड़कियों के #अपहरण किए गए ।
🚩मस्जिदों में भारत एवं हिंदू विरोधी भाषण दिए जाने लगे । सभी कश्मीरियों को कहा गया कि इस्लामिक ड्रेस कोड अपनाएं ।
🚩डर की वजह से वापस लौटने से कतराते!!
🚩आज भी कश्मीेरी पंडितों के अंदर का #डर उन्हेंी वापस लौटने से रोक देता है । #कश्मीोरी पंडितों ने घाटी छोड़ने से पहले अपने घरों को कौड़‍ियों के दाम पर बेचा था । 27 वर्षों में कीमतें तीन गुना तक बढ़ गई हैं । आज अगर वह वापस आना भी चाहें तो नहीं आ सकते क्योंेकि न तो उनका घर है और न ही घाटी में उनकी जमीन बची है । इस मौके पर #अभिनेता #अनुपम #खेर ने एक कविता शेयर की है । आप भी देखिए अनुपम ने कैसे कश्मीररी पंडितों का दर्द बयां किया है ।
https://youtu.be/LPcfGSS04hQ
🚩 कर्नाटक के श्री प्रमोद मुतालिक, #श्रीराम सेना (राष्ट्रिय अध्यक्ष)  ने बताया कि यह कश्मीरी हिंदुओं के विस्थापन का प्रश्न नहीं, तो यह पूरे #भारत की समस्या है । #हिंदुओं को 1990 में कश्मीर में से क्यों निकाला गया ? क्या वो कोई दंगा कर रहे थे ? या उनके घर में हथियार थे ?
उन्हें केवल इसलिए वहां से निकल दिया गया कि वो ’हिन्दू´ हैं । आज यही समस्या भारत के विविध राज्यों में उभरनी शुरू हो गई है । इसलिए आज एक भारत #अभियान की आवश्यकता है ।
🚩 डॉ. चारुदत्त पिंगळे, राष्ट्रीय मार्गदर्शक, हिन्दू जनजागृति समिती ने बताया कि जिस प्रकार महाभारत के काल में #भगवान #श्रीकृष्ण ने 5 गांव मांगे थे किंतु कौरवों ने वो भी देने से इन्कार कर दिया था , तदुपरांत #महाभारत हुआ । उसी प्रकार आज कश्मीरी हिंदुओं के लिए पूरे भारत के हिन्दुत्वनिष्ठ और राष्ट्रप्रेमी संगठन पनून कश्मीर मांग रहे हैं, परंतु आज #सरकार #चुप है ।
🚩कश्मीर भारत माता का #मुकुट है । कश्मीर भूभाग नहीं, कश्यप ऋषि की तपोभूमि है । वहां से हिंदुओं का पलायन हुआ है, परंतु उन्हाेंने हार नहीं मानी है  । कश्मीर में पनून कश्मीर और भारत हिन्दू राष्ट्र बनने तक हम कार्य करते रहेंगे यह हमारा धर्मदायित्व है  ।
🚩अधिवक्ता श्रीमती चेतना शर्मा, हिन्दू स्वाभिमान, उत्तर प्रदेश ने बताया कि राजनैतिक दलों ने हर जगह जाति का नाम देकर हर मामले को राजनैतिक करने का प्रयास किया है । परंतु आज समय आ गया है कि जो स्थिति जैसी है, वैसा ही सत्य रूप दुनिया के सामने लाया जाए । जब भी, जहां भी जनसांख्यिकी बदली है, वहां कश्मीर बना है । अब उत्तर प्रदेश की भी स्थिति वैसी ही होना शुरु हो गई है । कैराना में जो हुआ, वही आज उत्तर प्रदेश के बाकी क्षेत्रों में भी होने लगा है । अब मात्र 10 वर्ष में या तो भारत हिन्दू राष्ट्र होगा , या हिन्दू विहीन राष्ट्र !
🚩आपको बता दें कि 14 सितंबर, 1989 को बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष टिक्कू लाल टपलू की हत्या से कश्मीर में शुरू हुए आतंक का दौर समय के साथ और वीभत्स होता चला गया ।
🚩टिक्कू की हत्या के महीने भर बाद ही जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता मकबूल बट को मौत की सजा सुनाने वाले सेवानिवृत्त सत्र #न्यायाधीश नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी गई । फिर 13 फरवरी को श्रीनगर के टेलीविजन #केंद्र के निदेशक लासा कौल की निर्मम हत्या के साथ ही आतंक अपने चरम पर पहुंच गया था । उस दौर के अधिकतर #हिंदू नेताओं की हत्या कर दी गई । उसके बाद 300 से अधिक हिंदू-महिलाओ और पुरुषों की आतंकियों ने हत्या की ।
🚩सुप्रीम कोर्ट में 27 साल पहले हुए पंडितों पर नरसंहार की जांच करने से इंकार कर दिया ।  जिसमें 700 लोगों की मौत हुई थी । कोर्ट ने कहा कि इतने साल से आप कहां थे, अब 27 साल बाद इन मामलों में सबूत कैसे मिलेंगे ?  कुल मिला कर अब वो सभी हिन्दू कम से कम भारत के तंत्र से न्याय से सदा वंचित ही रहेंगे जबकि अदालत ने ही लगभग 30 साल पुराने मेरठ के हाशिमपुरा दंगो में मारे गए मुस्लिमों के केस में कई PAC के जवानों को सज़ा दी ।
🚩उन कश्मीर पंडितो की हालात की कल्पना कीजिये जब उनके घरों में सामान बिखरा पड़ा था । गैस स्टोव पर देग़चियां और रसोई में बर्तन इधर-उधर फेंके हुए थे । घरों के दरवाज़े खुले थे । हर घर में ऐसा ही समां था । ऐसा लगता था कि कोई बहुत बड़ा भूकंप के कारण घर वाले अचानक अपने घरों से भाग खड़े हुए हों..कश्मीरी पंडित हिंसा, आतंकी हमले और हत्याओं के माहौल में जी रहे थे । सुरक्षाकर्मी थे लेकिन उन्हें किस ने मना किया था चुप रह कर सब देखते रहने के लिये ये आज तक रहस्य है...शुरू में उन्हें दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं । “जम्मू में पहले हम सस्ते होटल में रहे, छोटी-छोटी जगहों पर रहे । बाद में एक धर्मशाला में रहे.. इतना  ही नहीं, उनके पेट भीख माग कर भी  पले... ।
🚩केंद्र #सरकार कब हिंदुओं के नाम से जाने वाले हिंदुस्तान में हिंदुओं को #सुरक्षित करेगी ?
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