Thursday, October 4, 2018

आतंकवादियों ने 1 साल में ही लगभग एक लाख निर्दोषों का किया क़त्ल...

04 October 2018
http://azaadbharat.org
🚩आतंकवाद को धर्म या मजहब से नहीं जोड़ा जा सकता, आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता | ये थ्योरी हिन्दुस्तान सहित कई देशों में अक्सर दोहराई जाती है, लेकिन हिंदुस्तान में इसकी अहमियत काफी ज्यादा है | हालाँकि दुनिया में ऐसे भी देश हैं जो खुलकर आतंकवाद का धर्म बताते हैं, लेकिन मुख्य रूप से यही धारणा प्रचलित है कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता है |

Terrorists have killed nearly one lakh innocent people in 1 year ...
🚩आतंक का कोई धर्म न होने वाली धारणा के बीच इस्लामिक जिहादी बर्बरता के जो नये आंकड़े आए हैं, वो न सिर्फ हैरान करने वाले हैं, बल्कि काफी भयावह भी हैं |  इस्लामिक जिहादी बर्बरता का नया आंकड़ा कुछ इस प्रकार है कि 2017 में दुनिया भर में इस्लामिक आतंकवादियों ने 84 हजार से ज्यादा निर्दोष लोगों की हत्याएं की हैं, हजारों अव्यवस्क लड़कियों की इज्जत लूटी हैं, हजारों अव्यस्क लड़कियों को सेक्स स्लेव यानी गुलाम बना कर रखा, कोई एक नहीं बल्कि 66 देशों में इस्लामिक आतंकवादियों ने हिंसा की खतरनाक साजिश रची है और हिंसा को साजिशपूर्ण ढंग से अंजाम देने का कार्य भी किया है |
🚩इस्लामिक जिहादी बर्बरता के यह आकंडे और यह निष्कर्ष ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की संस्था ‘इस्टीट्यूट फॉर ग्लोबर चेज’ ने दिए हैं । ये आंकडे कोई हवा-हवाई नहीं हैं. बल्कि ये आकंडे चाकचौबंद हैं, यह निष्कर्ष भी चाकचौबंद हैं |
🚩इस्लामिक बर्बरता के नए आंकड़ों ने दुनिया को शर्मसार कर दिया है, दुनिया को चिंता में डाल दिया है, दुनिया को फिर से यह सोचने के लिए बाध्य कर दिया है कि आखिर इस इस्लामिक बर्बरता के रोकने के सिद्धांत और नीति क्या हैं, अब तक जितने भी प्रयास हुए हैं वे सबके सब नकाफी साबित हुए हैं, बेअसर साबित हुए हैं | इस्लामिक आतंकवाद से जुड़े घृणा और हिंसा का दायरा दिनों-दिन बढ़ता ही चला जा रहा है, सिर्फ बर्बर सामाजिक व्यवस्था वाले देशों की ही बात नहीं है बल्कि सभ्यताशील और विकसित सामाजिक व्यवस्था वाले देशों में भी इस्लामिक घृणा और इस्लामिक हिंसा ने अपने पैर पसारे हैं |
🚩अब यहां यह प्रश्न उठता है कि इस्लामिक बर्बरता के इन घृणित आंकडों से भी दुनिया कोई सबक लेगी और इस्लामिक बर्बरता के खिलाफ कोई चाकचौबंद अभियान चलेगा ?
🚩इन आंकड़ों में बताया गया है कि 121 देशों में इस्लामिक आतंकवादी सक्रिय हैं जहां पर उनका नेटवर्क गंभीर रूप से सक्रिय हैं और इस नेटवर्क को सुरक्षा एजेंसियां भी समाप्त करने में विफल रही हैं | सर्वाधिक खतरा उन देशों से पर बढ़ा है जहां पर इस्लामिक राज नहीं है पर इस्लामिक राज के लिए किसी न किसी प्रकार का मजहबी हिंसक अभियान जारी है, इस्लामिक आतंकवादी सरेआम कहते हैं कि दुनिया को कुरान का शासन मानना ही होगा अन्यथा हिंसा का शिकार होना होगा, हम तलवार के बल पर पूरी दुनिया में कुरान का शासन लागू करेंगे |
🚩कुछ समय पूर्व तक दुनिया भी खुशफहमी की शिकार हो गई थी कि इस्लामिक जिहाद कोई समस्या नहीं है |
🚩अब यहां यह प्रश्न है कि आखिर दुनिया खुशफहमी की शिकार क्यों हो गई थी ?
दुनिया इसलिए खुशफहमी की शिकार हो गई थी कि उसने इस्लामिक आतंकवाद से जुड़े अवधारणा की चाकचौबंद समझ विकसित नहीं कर पाई थी | इराक में आईएस की पराजय के बाद दुनिया यह समझ लिया था कि इस्लामिक आतंकवाद और इस्लामिक घृणा पर विजय मिल चुकी है और अब दुनिया इस्लामिक आतंकवाद, इस्लामिक घृणा से पूरी तरह से मुक्त हो जाएगी, इस्लामिक आतंकवादियों का जो 121 देशों में नेटवर्क कायम है, वह नेटवर्क अब आसानी से समाप्त कर दिया जाएगा |
🚩ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की संस्था ‘इस्टीट्यूट फॉर ग्लोबर चेज’ के नए आंकड़ों और नए निष्कर्षों ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया की वह समझ झूठी और सतही थी | इराक में आईएस की पराजय जरूर हुई है, आईएस पर इराकी सुरक्षा बलों ने विजयी हासिल जरूर की है पर इराक के अंदर भी आईएस पूरी तरह से जमींदोज हो गया है, यह कहना मुश्किल है, खबर तो यह है कि इराक के अंदर आज भी आईएस अप्रत्यक्ष तौर पर सक्रिय है और खासकर सुन्नी मुस्लिम समुदाय के अंदर में आज भी आईएस को लेकर सहानुभूति है, संरक्षण की नीति है |
🚩यहाँ यह जानना जरूरी है कि इराक के अंदर में शिया मुस्लिम समुदाय बहुसंख्यक हैं और सुन्नी मुस्लिम समुदाय की संख्या कम है | आईएस सुन्नी आतंकवादी संगठन है, सबसे बड़ी बात यह है कि किसी समय में इराक और सीरिया में ही आईएस सक्रिय था, जहां पर दुनिया भर के मुस्लिम युवक-युवतियां आईएस की ओर से लड़ने के लिए गए थे, लेकिन अब आईएस ने इराक और सीरिया से बाहर निकल कर पूरी दुनिया भर में अपना पैर पसार लिया है, अपना नेटवर्क कायम कर लिया है |
🚩 इस्लाम के नाम पर दुनिया भर से जो मुस्लिम लड़के-लड़कियां आईएस में शामिल हुए थे और आईएस के लिए लड़ रहे थे, वे पराजय के बाद अपने-अपने देश लौट चुके हैं और अपने-अपने देश में इस्लाम के शासन के लिए जेहाद कर रहे हैं |
🚩दुनिया में एक मात्र आईएस ही खूंखार, हिंसक या फिर मानवता को शर्मसार करने वाला आतंकवादी संगठन नहीं है, बल्कि दुनिया में दो सौ से अधिक मुस्लिम आतंकवादी संगठन हैं जो सीधे तौर पर इस्लाम की मान्यताओं को लेकर जेहादी हैं | सिर्फ  इतना ही नहीं बल्कि स्थानीय स्तर पर दुनिया में हजारों और लाखों मुस्लिम आतंकवादी संगठन हैं |
🚩स्थानीय स्तर का मुस्लिम आतंकवादी संगठन भी कम खतरनाक नहीं होता है । स्थानीय स्तर का मुस्लिम आतंकवादी संगठन बड़े आतंकवादी संगठनों के लिए जमीन तैयार करता है, आतंकवादी मानसिकताओं का प्रचार-प्रसार करता है, आतंकवाद का बीजारोपण करता है। बड़े  आतंकवादी संगठन पर कार्यवाही तो आसान होता है पर स्थानीय स्तर पर सक्रिय आतंकवादी संगठनों पर कार्यवाही बड़ी मुश्किल होती है, क्योंकि इनकी पहचान अति गोपनीय होती है और मुस्लिम समुदाय ऐसे संगठनों की पहचान जाहिर करना इस्लाम विरोधी मान लेते हैं |
🚩यही कारण है कि खूंखार आतंकवादी संगठनों के लिए जमीन तैयार करने वाले स्थानीय स्तर के आतंकवादी संगठनों पर कार्यवाही नहीं हो पाती है | खासकर अफ्रीका महाद्वीप के अंदर में इस्लामिक हिंसा ने कुछ ज्यादा ही मुश्किल पैदा की है और खासकर महिलाओं की जिंदगी हिंसाग्रस्त बना डाली है | अफ्रीका महाद्वीप का कोई एक देश नहीं, बल्कि कई देश इस्लामिक आतंकवाद की चपेट में है |
🚩सूडान, नाइजीरिया, सोमालिया, सेनगल, इथोपिया जैसे दर्जनों ऐसे देश हैं, जहां पर इस्लाम के शासन के लिए गृहयुद्ध जारी है |
🚩“बोको हरम” नामक इस्लामिक संगठन आईएस से भी खतरनाक है | बोको हरम ने ईसाईयत को समाप्त करने की कसम खाई है और उसके निशाने पर ईसाईयत ही है | अफ्रीका में ईसाईयत और इस्लाम के बीच में मार-काट मची है और प्रभुत्व के लिए हिंसा भी चरम पर है |
🚩ईसाई जहां आत्मसुरक्षा के लिए सक्रिय हैं वहीं इस्लाम के मानने वाले लोग इस्लाम के शासन कायम करने के लिए जेहादी बने हुए हैं | बोको हरम ने अफ्रीका में कोई एक-दो सौ नहीं बल्कि कई हजार ईसाई लड़कियों का अपहरण कर सेक्स गुलाम बना डाला | सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि सेक्स गुलाम बनाई गई लड़कियों को अरब के शेखों के हाथों बेचने जैसे घृणित कार्य भी किए हैं ।
🚩ये सारे आंकड़े इस बात का साफ़ संकेत हैं कि आपको आतंक को धर्म से नहीं जोड़ना है तो मत जोड़िए, लेकिन इस्लामिक जिहाद के नाम पर हो रही बर्बरता, नरसंहार के खिलाफ दुनिया को एकजुट होकर खड़ा होना ही होगा अन्यथा, आगे की स्थिति काफी  भयावह होने वाली है ।
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