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Sunday, May 29, 2016

पक्षपाती मीडिया और हम

🚩सुदर्शन न्यूज़ चैनल के चेयरमैन श्री #सुरेश #चाव्हानके जी ने #अमेरिका की एक सभा में #मीडिया का दोगलापन जाहिर किया ।
💥देखिये वीडियो
http://youtu.be/LevKk0Kbs0o
💥आज भारत का #मीडिया क्या कर रहा है...???
💥#भारत के #साधु-संतों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर रहा है ।
💥क्योंकि किसी भी देश की #संस्कृति 2000 साल से ज्यादा टिकती नही है लेकिन भारत की संस्कृति लाखों सालों से टिकी है ।
💥#भारत की #हिन्दू #संस्कृति क्यों टिकी है...???
💥उसके लिए उन्होंने (#ईसाई मिशनरियाँ) मंथन किया तो पता चला कि यहाँ की संस्कृति को टिकाने के लिए साधु-संतो की मुख्य भूमिका है ।
💥जिन्होंने #सत्संग, #प्रवचनों, #भजनों, #कथाओं, #साहित्यों से #हिन्दू-संस्कृति को जोड़े रखा है ।
💥फिर उन्होंने सोचा कि अगर #भारतीय #संस्कृति को नष्ट करना है तो #साधु-संतो को खत्म करना होगा । नही करेंगे तो कितने भी तूफान आ जाये, #अंग्रेज आ जाये, कितने भी #औरंगजेब जन्म ले ले पर यहाँ पर #देशविरोधियों से लोहा लेने के लिए #शिवाजी जैसे पैदा होते रहेंगे ।
💥जब तक भारत में #रामदास जैसे संत होंगे तो शिवाजी जैसे वीर भी पैदा होते रहेंगे । शिवाजी जैसे वीरो को रोकना है तो रामदास जैसे संतो को खत्म करना होगा इसलिए साधु-संतो को बदनाम कर अपमानित करने का #ईसाई #मिशनरियों के इशारे से मीडिया द्वारा साधु-संतों को खत्म करने का #लाईव #अभियान चल रहा  है ।
💥उस अभियान के तहत #साधु-संतो को अपमानित व बदनाम किया जा रहा है  ।
💥मेरे को किसी ने पूछा कि इनको संतो बाबा बापूओं के इतने अच्छे कार्य समझ में क्यों नही आते..???
💥मैंने बोला जो अपने बाप को नही समझ सकते वो बापू (संतों) को क्या समझेंगे । वो ऐसे माहौल में रहते है कि साधु-संत और संतों की परम्परा क्या होती है बापू क्या होते है उनको पता ही नही है ।
💥#मीडिया दूसरे #एजेंडे (ईसाई मिशनरियों द्वारा भारतीय संस्कृति को खत्म करने की साजिश ) से काम कर रहे है इसलिए साधु-संतो को दिन-रात अपमानित करते रहते है ।
💥#भारत में कैसा भेदभाव मीडिया करती है।
💥#मदर_टेरेसा अपना कार्य ( हिंदुओं का धर्मान्तरण) करने के लिए अधर्म का कार्य करें फिर भी सारी मीडिया उसके #पक्ष में बोलती है पर मदर टेरेसा के खिलाफ नही बोलती है ।
💥लेकिन #हिन्दू साधु-संत हिन्दू संस्कृति के लिए कितने अच्छे काम करते है पर उनको प्रतिष्ठा नही मिलती जितनी ईसाई मिशनरियों की मिलती है इसलिए भारत की मीडिया से भारत की जनता को ये प्रश्न पूछना पड़ेगा कि आखिर इतना भेदभाव क्यों है ?
💥हर भारतीय को बिकाऊ मीडिया का त्याग करना चाहिए ।
🚩जय हिन्द🚩
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Saturday, November 21, 2015

Bruno Saw Hypocrisy In Christianity

🔥कडवा सच कह डाला
💥विज्ञान के इतिहास में ब्रूनो का नाम निराली आभा से चमकता रहा है । उसका जन्म नेपल्स के निकट1548  में हुआ था । जब वह 15 साल का था तब उसके पिता ने उसे ईसाई मठ में भेज दिया । वहाँ उसे सर्वत्र दांभिकता दिखाई दी । वह ढोंगी जीवन की आलोचना करने लगा । वहाँ के धर्माधिकारी उस पर बहुत बिगडे ।
💥अतः उसने वह जगह छोड दी और भ्रमण करने लगा । इसी समय उसने खगोलशास्त्री कोपर्निस का ग्रंथ पढा । तब से वह उन वैज्ञानिक सिद्धांतों का प्रचार करने लगा । रोम, वेनिस, पाडुआ आदि नगरों में व्याख्यान देता हुआ वह पेरिस आया ।
💥वह एक उत्कृष्ट वक्ता था । उसका व्यक्तित्व बहुत प्रभावी था । उसके तर्कों के सामने कोई नहीं टिकता था । पेरिस में नामी धर्म पंडित उसके सामने हार गये और हजारों युवक उसके अनुयायी बन गये वहाँ से वह इंग्लैंड गया । वहाँ वह 6 साल तक रहा फिर वह पेरिस आया और यूरोप में भ्रमण करने लगा ।
💥वह कहता था : ‘तुम्हारी बाइबल में कैसी कैसी गलत बातें लिखि हैं ! यह पृथ्वी विश्व का केन्द्र है, मनुष्य ईश्वर का लाडला है प्यारा है, उसके इिश ईश्वर ने चन्द्र, सूर्य, बनाये हैं इसलिए चन्द्र सूर्य धरती की परिक्रमा करते हैं आदि बातें मिथ्या हैं ।
💥विज्ञान ने यह सिद्ध कर दिया है कि यह विश्व अनंत है, तुम्हारी यह धरती सूर्य की परिक्रमा करती है । सारे ब्रह्मांड में यह धरती धूलिकण के समान है ।
💥ब्रूनो की ये बातें सुनकर ईसाई धर्म के अधिकारी घबरा गये । रोम कैथोलिक पंथ के प्रमुख पोप क्रोधित हो गये । ब्रूनो को पकडने के लिए उन्होंने आदेश दिया ।
💥जब बू्रनो घूमता हुआ वैनिस पहुँचा तो उसे पकड लिया गया और कारागार में डाल दिया गया । वहाँ उसे बहुत पीडायें दी गयीं । उससे कहा कि ‘तुम लोकप्रिय रोमन कैथोलिक धर्म को मानो और पोप से माफी माँगो तो तुम्हें छोड दिया जायेगा ।
💥ब्रूनो बार-बार उत्तर देता : ‘नहीं, कभी नहीं । सामान्य जन तो अज्ञ और अंधश्रद्धालू होते हैं । उनकी मान्यता के लिए मैं शास्त्र से सिद्ध किये हुए सत्य को कभी नहीं छोडूगा ।
💥सन् 1599 ईसवी मेंं उस पर पाखंडी, ईश्वर विरोधी, लोक शत्रु धर्मद्रोही आदि झूठे आरोप लगाकर उसे न्यायालय में लाया गया । जज ने उसे जिंदा जलाने की सजा दी ।
💥उसने वहीं गरज कर कहा : ‘मुझे मृत्यु का भय नहीं है, मैं तो सत्य के लिए मर रहा हूँ । तुम तो असत्य के पुतले हो तुम्हारे पीछे यम का डंडा सदा रहेगा ।
💥27 फरवरी 1600 ईसवी को उसे चिता पर खडा किया गया और कहा गया कि ‘ईसाई धर्म मानो, क्रूस को चूमो । उसने कहा : ‘कभी नहीं । 
💥आग सुलगाई गयी । ज्वालाएँ धधक गयीं तब भी वह गरजकर बोला : ‘यश या अपयश मिलना यह संयोग की बात है परंतु हमारे वंशज इतना तो निश्चित कहेगें कि ब्रूनो डरा नहीं उसने निर्भयता से मृत्यु का स्वागत किया ।
💥सत्य के लिए उसने बलिदान दिया लेकिन असत्य की और ले जाने वाला ईसाइ धर्म नही अपनाया । डर के जीने की अपेक्षा निर्भयता के साथ मरना मैं श्रेष्ठ मानता हूँ ।
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