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Monday, January 9, 2017

सिर्फ गरीब किसान के कर्ज माफी के लिए नहीं है केंद्र सरकार के पास पैसा..!!

बैंकों के कर्ज से परेशान होकर 80 फीसदी किसानों ने की खुदकुशी..!!!

कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या करने वाले किसानों की बात जब उठती है तो साहूकारों और महाजनों को अपराधी के तौर पर पेश किया जाता है। साहूकारों और महाजनों पर आरोप लगाया जाता है कि वो कर्ज वसूलने के लिए किसानों को इस कदर परेशान करते हैं कि वो आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाते हैं। 

हालांकि साहूकार भी किसानों को कम परेशान नही करते हैं,
लेकिन एनसीआरबी के ताजा सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं!!!

farmer-suicide-due-to-debt-loans-from-banks

एनसीआरबी के आकड़ों के मुताबिक कर्ज न चुका पाने के कारण खुदकुशी करने वालों किसानों में से 80 फीसदी ने बैंकों से कर्ज लिया था ।

 एनसीआरबी के आकड़ों के मुताबिक 2014 की तुलना में 2015 में किसानों के आत्महत्या करने की दर में 41.7 फीसदी का इजाफा हुआ है। 1995 से  31 मार्च 2013 तक के आंकड़े बताते हैं कि अब तक 2,96 438 किसानों ने आत्महत्या की है ।

सरकारी सूत्रों के अनुसार 2014 में 5650 और 2015 में 8000 से अधिक मामले सामने आए। 

योजना आयोग के पूर्व सदस्य अभिजीत सेन ने बताया कि बैंक लोन वसूलने में लचीला रुख नहीं अपनाते हैं। उन्होंने बताया कि कर्ज वसूलने में माइक्रो फानैन्स कंपनियों का ज्यादा बुरा हाल है। यहां तक कि वो लोन वसूलने के लिए गुडों का भी इस्तेमाल करते हैं।

माल्या जैसों का हजारों करोड़ माफ, किसानों का क्यों नही..???

2014 में देश की जनता ने केंद्र में भाजपा को बहुमत देकर देश की सत्ता सौंपी तो देश के किसानों और मजदूरों ने सोचा था कि उनके अच्छे दिन आ सकते हैं।  लेकिन आकंड़े देखकर तो लगता है कि सरकार से किसानो को कोई राहत नही मिल पा रही है ।


बैंकों से लिए कर्ज के कारण मरने को मजबूर हो जाता है किसान..!!

गरीब किसान बैंकों से कर्ज लेकर खेती करता है और जब बे मौसम बरसात, ओले और तेज हवाओ और सूखे से उसकी फसल नष्ट हो जाती है तो वो कर्ज नहीं चुका पाता है तो बैंक उससे कर्ज वसूलने के लिए उसके खेतों को नीलाम करके अपना कर्ज वसूलती है। जिसकी वजह से वो आत्महत्या करने को मजबूर हो जाता है। 

हजारों करोड़ के डिफाल्टर गरीबों का कर्ज माफ..!!

वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने विजय माल्या समेत 63 डिफाल्टरों का तकरीबन सात हजार करोड़ रुपए का बकाया लोन माफ करने का फैसला किया है। डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, एसबीआई ने बकाया वसूल नहीं कर पाने पर शीर्ष 100 विलफुल डिफाल्टरों में से 63 पर 7016 करोड़ रुपए का लोन माफ करने का फैसला किया है।

बताते चलें कि 63 डिफाल्टरों की ये राशि कुल 100 डिफाल्टरों का 80 फीसदी है। यह छूट बैंक की प्रक्रिया बैड लोन के अंतर्गत की गई है। सभी कंपनियों को बैंक ने विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया।

विजय माल्या के अलावा किंगफिशर एयरलाइंस का तकरीबन 1201 करोड़ रुपए, केएस ऑयल का 596 करोड़ रुपए, सूर्या फार्मास्यूटिकल का 526 करोड़ रुपए, जीईटी पावर का 400 करोड़ रुपए और साई इंफो सिस्टम का 376 करोड़ रुपए शामिल है। डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक, उसने इस बारे में एसबीआई के अधिकारियों से जानकारी मांगनी चाही तो उसे कोई जवाब नहीं मिला।

सिर्फ गरीब किसान के कर्ज माफी के लिए नहीं है केंद्र सरकार के पास पैसा..!!

एक तरफ जहाँ बैंक अमीर डिफाल्टरों के हजारों करोड़ यूँ ही माफ कर देता है और दूसरी तरफ गरीब किसानों का उतना कर्ज भी माफ नहीं कर पा रही है जो इन डिफाल्टरों का 20 फीसदी भी नहीं होगा।

कुछ दिनों पहले केंद्र सरकार ने अडानी ग्रुप के ऊपर लगे 200 करोड़ के जुर्माने को भी माफ कर दिया ।

केंद्र सरकार का ये दोगलापन किसानों के साथ कब तक जारी रहेगा.???

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि महाराष्ट्र में एक मंडी में किसान टमाटर लेकर आया तो एक किलो टमाटर की कीमत केवल पांच पैसे लगाई गई जिससे किसान ने उसे वापिस लाकर अपने खेतों में डाल दिया ऐसे ही कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ की एक मंडी ने टमाटर की कीमत 2 रूपये किलो लगाई तो उसने सड़कों पर टमाटर फेंक दिए जिससे सड़कें लाल हो गई थी । 

मध्य प्रदेश में भी कुछ दिन पहले मंडी में प्याज का भाव नही दिया गया तो सड़कों पर प्याज डाल दी गई । 

ये तो एक उदाहरण तौर पर बताया गया है लेकिन किसान दिन-रात मेहनत करता है जब फसल लेकर मंडी में आता है तो उसको निराश होने पड़ता है क्योंकि सिंचाई के पानी, खाद्य, बीज, कीटनाशक दवाइयों आदि का पैसा भी फसल की बिक्री से नही निकल पाता है । जो किसान ने कड़ी मेहनत की उसको तो वो गिनता ही नही।

पूर्व सरकार से ही किसानों का बहुत शोषण होता रहा है । किसानों के बढ़ते संकट का निवारण करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को ध्यान देना चाहिए।

अब केंद्र सरकार को अन्नदाता किसानों को कर्ज से मुक्त कर देना चाहिए और उनके लिए पानी, बिजली, बीज, खाद्य, दवाइयां आदि सस्ते भाव देकर उनको राहत देनी चाहिये जिससे किसान भी अपना जीवन परिवार के साथ खुशहाली से जी सके ।

बैंकों के कर्ज से परेशान होकर 80 फीसदी किसानों ने की खुदकुशी..!!!

बैंकों के कर्ज से परेशान होकर 80 फीसदी किसानों ने की खुदकुशी..!!!

कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या करने वाले किसानों की बात जब उठती है तो साहूकारों और महाजनों को अपराधी के तौर पर पेश किया जाता है। साहूकारों और महाजनों पर आरोप लगाया जाता है कि वो कर्ज वसूलने के लिए किसानों को इस कदर परेशान करते हैं कि वो आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाते हैं। 

हालांकि साहूकार भी किसानों को कम परेशान नही करते हैं,
लेकिन एनसीआरबी के ताजा सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं!!!

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एनसीआरबी के आकड़ों के मुताबिक कर्ज न चुका पाने के कारण खुदकुशी करने वालों किसानों में से 80 फीसदी ने बैंकों से कर्ज लिया था ।

 एनसीआरबी के आकड़ों के मुताबिक 2014 की तुलना में 2015 में किसानों के आत्महत्या करने की दर में 41.7 फीसदी का इजाफा हुआ है। 1995 से  31 मार्च 2013 तक के आंकड़े बताते हैं कि अब तक 2,96 438 किसानों ने आत्महत्या की है ।

सरकारी सूत्रों के अनुसार 2014 में 5650 और 2015 में 8000 से अधिक मामले सामने आए। 

योजना आयोग के पूर्व सदस्य अभिजीत सेन ने बताया कि बैंक लोन वसूलने में लचीला रुख नहीं अपनाते हैं। उन्होंने बताया कि कर्ज वसूलने में माइक्रो फानैन्स कंपनियों का ज्यादा बुरा हाल है। यहां तक कि वो लोन वसूलने के लिए गुडों का भी इस्तेमाल करते हैं।

माल्या जैसों का हजारों करोड़ माफ, किसानों का क्यों नही..???

2014 में देश की जनता ने केंद्र में भाजपा को बहुमत देकर देश की सत्ता सौंपी तो देश के किसानों और मजदूरों ने सोचा था कि उनके अच्छे दिन आ सकते हैं।  लेकिन आकंड़े देखकर तो लगता है कि सरकार से किसानो को कोई राहत नही मिल पा रही है ।


बैंकों से लिए कर्ज के कारण मरने को मजबूर हो जाता है किसान..!!

गरीब किसान बैंकों से कर्ज लेकर खेती करता है और जब बे मौसम बरसात, ओले और तेज हवाओ और सूखे से उसकी फसल नष्ट हो जाती है तो वो कर्ज नहीं चुका पाता है तो बैंक उससे कर्ज वसूलने के लिए उसके खेतों को नीलाम करके अपना कर्ज वसूलती है। जिसकी वजह से वो आत्महत्या करने को मजबूर हो जाता है। 

हजारों करोड़ के डिफाल्टर गरीबों का कर्ज माफ..!!

वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने विजय माल्या समेत 63 डिफाल्टरों का तकरीबन सात हजार करोड़ रुपए का बकाया लोन माफ करने का फैसला किया है। डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, एसबीआई ने बकाया वसूल नहीं कर पाने पर शीर्ष 100 विलफुल डिफाल्टरों में से 63 पर 7016 करोड़ रुपए का लोन माफ करने का फैसला किया है।

बताते चलें कि 63 डिफाल्टरों की ये राशि कुल 100 डिफाल्टरों का 80 फीसदी है। यह छूट बैंक की प्रक्रिया बैड लोन के अंतर्गत की गई है। सभी कंपनियों को बैंक ने विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया।

विजय माल्या के अलावा किंगफिशर एयरलाइंस का तकरीबन 1201 करोड़ रुपए, केएस ऑयल का 596 करोड़ रुपए, सूर्या फार्मास्यूटिकल का 526 करोड़ रुपए, जीईटी पावर का 400 करोड़ रुपए और साई इंफो सिस्टम का 376 करोड़ रुपए शामिल है। डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक, उसने इस बारे में एसबीआई के अधिकारियों से जानकारी मांगनी चाही तो उसे कोई जवाब नहीं मिला।

सिर्फ गरीब किसान के कर्ज माफी के लिए नहीं है केंद्र सरकार के पास पैसा..!!

एक तरफ जहाँ बैंक अमीर डिफाल्टरों के हजारों करोड़ यूँ ही माफ कर देता है और दूसरी तरफ गरीब किसानों का उतना कर्ज भी माफ नहीं कर पा रही है जो इन डिफाल्टरों का 20 फीसदी भी नहीं होगा।

कुछ दिनों पहले केंद्र सरकार ने अडानी ग्रुप के ऊपर लगे 200 करोड़ के जुर्माने को भी माफ कर दिया ।

केंद्र सरकार का ये दोगलापन किसानों के साथ कब तक जारी रहेगा.???

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि महाराष्ट्र में एक मंडी में किसान टमाटर लेकर आया तो एक किलो टमाटर की कीमत केवल पांच पैसे लगाई गई जिससे किसान ने उसे वापिस लाकर अपने खेतों में डाल दिया ऐसे ही कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ की एक मंडी ने टमाटर की कीमत 2 रूपये किलो लगाई तो उसने सड़कों पर टमाटर फेंक दिए जिससे सड़कें लाल हो गई थी । 

मध्य प्रदेश में भी कुछ दिन पहले मंडी में प्याज का भाव नही दिया गया तो सड़कों पर प्याज डाल दी गई । 

ये तो एक उदाहरण तौर पर बताया गया है लेकिन किसान दिन-रात मेहनत करता है जब फसल लेकर मंडी में आता है तो उसको निराश होने पड़ता है क्योंकि सिंचाई के पानी, खाद्य, बीज, कीटनाशक दवाइयों आदि का पैसा भी फसल की बिक्री से नही निकल पाता है । जो किसान ने कड़ी मेहनत की उसको तो वो गिनता ही नही।

पूर्व सरकार से ही किसानों का बहुत शोषण होता रहा है । किसानों के बढ़ते संकट का निवारण करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को ध्यान देना चाहिए।

अब केंद्र सरकार को अन्नदाता किसानों को कर्ज से मुक्त कर देना चाहिए और उनके लिए पानी, बिजली, बीज, खाद्य, दवाइयां आदि सस्ते भाव देकर उनको राहत देनी चाहिये जिससे किसान भी अपना जीवन परिवार के साथ खुशहाली से जी सके ।

Monday, August 22, 2016

आखिर किसान क्यों हुए खुदकुशी करने को मजबूर और कब मिलेगी राहत !!!

🚩#भारत में #किसानों के #आत्महत्या की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है !
🚩आखिर क्यों..???
🚩कब लगेगी किसानों की आत्महत्या पर रोक...???
🚩किसान #मिट्‌टी से सोना उपजाते हैं। वे अपने श्रम से #संसार का पेट भरते हैं। कितने भी #आधुनिक विकास कर लो लेकिन जब #किसान खेती नही करेगा तो हम क्या खायेंगे ?
🚩किसान बहुत परिश्रमी होते हैं । वे खेतों में जी-तोड़ श्रम करते हैं । वे मेहनत करके अनाज, फल और #सब्जियाँ उगाते हैं । तभी हम अन्य काम कर पाते है इसलिए देश में किसान हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है ।
🚩#देश में किसानों की बढ़ती जा रही हैं आत्महत्याएं...!!!
🚩1995 से  31 मार्च 2013 तक के आंकड़े बताते हैं कि अब तक 2,96 438 किसानों ने आत्महत्या की है ।
🚩देश में 2014 और 2015 में किसानों की खुदकुशी के मामले में 40 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।
🚩 #सरकारी #सूत्रों के अनुसार, 2014 में 5650 और 2015 में 8000 से अधिक मामले सामने आए। 
🚩एक #अंग्रेजी_समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार #महाराष्ट्र में किसानों की खुदकुशी के मामले सबसे अधिक हैं। यहाँ कमी नहीं आ रही है।

Jago Hindustani - After-all-why-farmers-forced-to-commit-suicide

🚩2014 से 2015 के बीच राज्य में 18 फीसदी मामले बढ़े हैं। किसानों की खुदकुशी की संख्या 2568 से बढ़कर 3030 हो गई। वहीं #तेलंगाना 2015 में दूसरे स्थान पर रहा। वहां 898 से बढ़कर 1350 मामले सामने आए। 
🚩#कर्नाटक में 2014 से 2015 के बीच चौंकाने वाले आंकड़े सामने आये। 2014 में 231 किसानों ने खुदकुशी की थी वहीं 2015 में 1300 से अधिक किसानों ने आत्महत्या कर ली। यह राज्य सभी #राज्यों में तीसरे स्थान पर आ गया। 
🚩सूत्रों का कहना है कि 2015 में एमपी और #छत्तीसगढ़ में 100 से अधिक मामले सामने आए। #गुजरात, उत्तर प्रदेश, #पंजाब , #बिहार, #हरियाणा, #राजस्थान, #झारखंड, #पश्चिम_बंगाल और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों से किसानों की खुदकुशी के मामले भी मिले है ।

🚩आखिर किसान क्यों हुए खुदकुशी करने को मजबूर...???
🚩सूखे से प्रभावित होती फसल और बढ़ते कर्ज के बोझ से अन्नदाताओं की सांसें फूलने लगी हैं। 2014 और 2015 में #मध्य_भारत के राज्यों को सूखे का सामना करना पड़ा। इससे निपटने के लिए सरकार ने अभी तक कोई ठोस कदम नही उठाएं है ।
आंकड़ों को आधार बनाकर ब्यानबाजी जरूर होती रही बस ।
🚩असल में खेती की बढ़ती लागत और #कृषि_उत्पादों की गिरती कीमत किसानों की निराशा की सबसे बड़ी वजह रही है ।
🚩किसानों के खर्च में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है इसमें सिंचाई के लिए बनाने वाले बोरवेल के लिए भूजल स्तर में भारी गिरावट के चलते महंगे हो गए,  बोने वाले बीज महंगे हो गये , बिजली महँगी हो गई उसके बाद भी जब फसल आती है तब दाम बहुत कम हो जाते है जिससे किसानों को घाटा होता है और किसान आत्महत्या कर लेते है ।
🚩बे-मौसम की बारिश, ओले और तेज हवाओं ने किसानों की तैयार फसलों को बर्बाद किया, उसका झटका बहुत से किसान नहीं झेल पाए हैं।
🚩#सरकार से लोन नही मिलती है लोन भी मिलती है तो बहुत कम ।
नीचे गिरते #जल स्तर के चलते वहां बोरवेल के लिए #बैंकों से कर्ज नहीं मिलते है और साहूकारों से कर्ज लेना किसानों के लिए घातक साबित होता है ।
🚩कई किसानों के #बच्चों की #शिक्षा से लेकर लड़कियों की शादियां तक अटकी हुई हैं ।
🚩फसलों की गिरती कीमतें !
🚩जब किसानों की फसलें तैयार होती है तो कीमतों में भारी गिरावट आती है इसलिए किसानों की आय बहुत कम होती है ।
🚩किसानों ने आत्महत्याएं की, इससे साफ है कि आर्थिक रूप से उनका बहुत कुछ दाँव पर लगा था, जो बर्बाद हो गया । केंद्र और राज्य सरकारों के तमाम ब्यानों में भी उसे भरोसा नहीं दिखा क्योंकि ये कभी किसान की मदद के लिए बहुत कारगर कदम नहीं उठा पाई हैं ।
🚩इस तरह की आपदा के बाद किसानों को राहत के लिए दशकों पुरानी व्यवस्था और मानदंड ही जारी हैं ।
🚩सरकार ने इस व्यवस्था को व्यवहारिक बनाने और वित्तीय राहत प्रक्रिया को तय समय सीमा में करने के लिए कदम नहीं उठाए हैं ।
🚩भले ही जनधन में 13 करोड़ से ज्यादा खाते खुल गये हों, आधार नंबर से जुड़ने वाले #बैंक खाते लगभग पूरी आबादी को कवर करने की ओर जा रहे हों, लेकिन किसानों की मदद के लिए अभी भी बेहद पुरानी, लंबी और लचर व्यवस्था ही जारी है ।
🚩किसानों के बढ़ते संकट का निवारण करने के लिए सरकार द्वारा किसानों का कर्ज माफ किया जाये , सिंचाई के लिए बोरवेल बनवाकर दिये जाएँ और फसल के दाम में वृद्धि हो ।
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