Monday, November 23, 2020

Netflix की वेब सीरीज बन चुकी है हिंदू विरोधी, दर्ज हुई FIR

 

23 नवंबर 2020


 इस दौर में ओटीटी प्लेटफॉर्म की कंपनियों की नीति केवल इतनी ही रह गई है कि उनका बिजनेस ज्यादा से ज्यादा होना चाहिए। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन इसकी आलोचना करता है या कौन सराहना या फिर किसे इससे चोट पहुँचती है।




 विदेशी ओटीटी प्लेटफॉर्म Netflix का हाल भी कुछ ऐसा ही है, जिसमें आए दिन ऐसा कंटेंट दिखाया जाता है जो कि हिंदुओं की भावनाओं को आहत करता है, लेकिन फिर भी इस प्लेटफॉर्म के यूजर भारत में बढ़ रहे हैं। आलोचनाओं के सहारे ही सही, लेकिन इसकी पहुँच लोगों तक बढ़ रही है, जो कि लोगों के लिए भी एक रेड अलर्ट है कि अब इसे बहिष्कृत करने का सही समय आ चुका है।

 Netflix के खिलाफ हिंदू भावनाओं को आहत करने की मुहिम छिड़ गई है। Netflix की वेब-सीरीज ‘A Suitable Boy’ को लेकर लोगों का गुस्सा भड़क पड़ा है। इसके एक दृश्य में लड़का और लड़की मंदिर में बेहद ही अश्लील हरकतें करते दिख रहे हैं। जबकि बैकग्राउंड में भगवान की पूजा अर्चना और भजन किए जा रहे हैं।

इस दृश्य से हिंदू समुदाय के लोगों की भावनाएँ आहत हुई हैं। लोग इसे तुरंत Netflix से हटाने के साथ ही कंपनी से इसके लिए माफी माँगने की बात करने लगे हैं। लोगों की इस मुहिम का असर ये हुआ है कि अब तक #BoyCottNetflix हैशटैग के तहत करीब 64 हजार ट्वीट किए जा चुके हैं।

 इसको लेकर बीजेपी के युवा मोर्चा के मंत्री गौरव शर्मा ने मध्य प्रदेश पुलिस से शिकायत की है और केस दर्ज कराया है। यही नहीं ट्विटर पर लोगों ने सरकार से Netflix समेत सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म को सरकारी नियमों के अंतर्गत लाने की माँग की है। जिससे इनके गलत कार्यक्रमों पर नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जा सके, ताकि इन्हें सबक मिल सके, और ये सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म अपने कार्यक्रमों में लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने से बचें।

 इस मामले में मध्य प्रदेश के गृह मंत्री भी काफी सख्ती से पेश आए हैं। उन्होंने इसको लेकर वीडियो संदेश के माध्यम से कहा है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म Netflix में हिंदू मंदिर के अंदर इस प्रकार की अश्लील हरकतें आपत्तिजनक हैं और इसके खिलाफ अधिकारियों को कार्रवाई करने के आदेश दे दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने कहा है कि Netflix को इस तरह से हिंदू भावनाओं को आहत करने से बचना चाहिए।

 Netflix की वेब सीरीज का ये दृश्य विक्रम सेठ की किताब A Suitable Boy के दूसरे एपिसोड का है, जो कि मध्य प्रदेश के ही महेश्वर घाट स्थित शिव मंदिर का है। इसको लेकर बीजेपी नेता गौरव ने कहा है कि इसके खिलाफ जनता सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करेगी।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि Netflix ने कोई आपत्तिजनक कंटेंट प्रसारित किया हो। ये ओटीटी प्लेटफॉर्म आए दिन इसी तरह की वेब सीरीज प्रसारित करता रहता है जो कि हिंदू समुदाय और उसकी संस्कृति को नीचा दिखाती है।

 Netflix पर सभी ने अनुराग कश्यप की सेक्रेड गेम्स देखी है, जो कि वामपंथी एजेंडा चलाती है। इस सीरीज में जिस तरह से अहम ब्रह्मास्मि का प्रयोग करके अपराध के दृश्य दिखाए गए, उससे हिन्दू समुदाय को धक्का लगा है। इसके अलावा एक सीरीज घोउल (Ghoul) भी है जो भारत के हिंदुओं को इस्लाम विरोधी प्रदर्शित करती है। Netflix ने ऐसी अनेक फिल्में प्रसारित की हैं, जिसमें किसी न किसी दृश्य में हिंदुओं या उनकी संस्कृति के प्रति नफरत भरी हो।

 हिंदू विरोध के बावजूद लोग अभी भी इसे पसंद करते हैं। कुछ लोग ऐसे हैं, जो केवल इसके कंटेंट की आलोचना करने के लिए ही इसे देखते हैं। ऐसे कंटेंट को देखने के बाद वे Netflix की ट्विटर से लेकर सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फजीहत करते हैं। वहीं ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें हिन्दू विरोधी कंटेंट देखने में मजा आता है। इसलिए अब सरकार को ऐसे प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ ही कुछ नियम भी तय करने चाहिए, जिससे हिंदुओं को इस तरह से अपमानित करने वाले कंटेंट पर लगाम लग सके।

 इससे पहले नेटफ्लिक्स की वेब सीरिज सेक्रेड गेम्स-2 को लेकर खूब विवाद हुआ था। शिरोमणि अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने सेक्रेड गेम्स के डायरेक्टर अनुराग कश्यप के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। सेक्रेड गेम्स 2 में सिख पुलिस अधिकारी का किरदार निभाने वाले सैफ अली खान के एक सीन को लेकर अकाली दल के नेता ने अनुराग कश्यप पर सिख धर्म के अपमान करने का आरोप लगाया था।

 बता दें कि पिछले कई सालों से इस्लामिक संगठनों द्वारा किए गए हमलों को सफेदजामा पहनाने की कोशिश की जा रही है और नेटफ्लिक्स इस प्रोपेगेंडा में सबसे आगे है। इन सभी हमलों को छिपाने के लिए इसने कई ऐसी सीरीज निकाली, जो हिन्दुओं की छवि को धूमिल करती है। लेकिन इनमें इतना साहस नहीं है कि वो इस्लामिक स्टेट, बोको हराम जैसे आतंकी संगठनों पर कोई वेब सीरीज बना कर दुनिया को दिखाए।

 आतंकवाद पर पर्दा डालने के लिए इन निर्माता कंपनियों ने हिन्दुओं को निशाने पर लिया है तथा हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। उनकी छवि को नकारात्मक तरीके से पेश किया जा रहा है ताकि लोगों में दिखावटी डर को बढ़ावा दे सके, जिसका वास्तविकता से कोई नाता ही नहीं है।

 नेटफ्लिक्स की प्रवृत्ति हमेशा से हिंदू विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देने की रही है। इसने ‘Ghoul’, ‘Sacred Games’ और ‘लैला’ के रूप में ऐसी कई वेब सीरिज बनाई है, जो हिंदू विरोधी भावनाओं को जन्म दे रही है और साथ ही इससे विश्व में हिंदू धर्म की नकारात्म छवि पेश की जा रही है। लैला वेब सीरीज में सनातन धर्म के अनुयायियों को सबसे हिंसक और दमनकारी मानसिकता वाले लोगों के तौर पर दिखाया गया है, जो सिर्फ लोगों को बाँटकर उन पर राज करना चाहते हैं।

 वेब सीरीज में आर्यावर्त समाज को भयंकर जातिवाद, कट्टरवाद और असहिष्णुता से ग्रसित दिखाया गया है। जहां मामूली अपराध करने पर भी कड़ी सजा दी जाती है। यहाँ आपके लिए यह जानना जरूरी है कि यह वेब सीरीज प्रयाग अकबर द्वारा इसी नाम से लिखित विवादित किताब पर आधारित है जिसमें लेखक ने सच्चाई और तथ्यों की जगह सिर्फ अपने एजेंडे का ही प्रचार किया है। अब समय आ गया है कि भारतीय जनता ऐसी वेब सीरीज बनाने वाली कंपनियों का बहिष्कार करे और ऐसे कंटेंट के खिलाफ आवाज उठाए जिससे विश्व में हिंदुओं की छवि धूमिल हो। - रचना कुमारी
🔺 Follow on Telegram: https://t.me/ojasvihindustan





🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Sunday, November 22, 2020

देशवासियों व सरकार के नाम आसाराम बापू ने लिखा पत्र

22 नवम्बर 2020


जोधपुर जेल से हिंदु संत आशारामजी बापू ने देशवासियों व सरकार के नाम गाय माता की महत्ता बताकर एक पत्र भेजा हुआ है जिसको पढ़कर हर कोई सराहना कर रहा है । सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ है आप भी इसे पढ़िए।

पत्र में बापू आशारामजी ने लिखा था कि गौपालक और गौप्रेमी धन्य हो जायेंगे...

ध्यान दें...




गोझरण अर्क बनानेवाली संस्थाएँ एवं जो लोग गोमूत्र से फिनायल व खेतों के लिए जंतुनाशक दवाइयाँ बनाते हैं, वे 8 रुपये प्रति लीटर के मूल्य से गोमूत्र ले जाते हैं । गाय 24 घंटे में 7 लीटर मूत्र देती है तो 56 रुपये होते हैं । उसके मूत्र से ही उसका खर्चा आराम से चल सकता है । गाय के गोबर, दूध और उसकी उपस्थिति का फायदा देशवासियों को मिलेगा ही ।

 ऋषिकेश और देहरादून के बीच आम व लीची का बगीचा है। पहले वह 1लाख 30 हजार रुपये में जाता था, बिल्कुल पक्की व सच्ची बात है । उनको गायें रखने की सलाह दी गयी तो वे 15 गायें, जो दूध नही देती थी, लगभग निःशुल्क ले आये । उस बगीचे का ठेका दूसरे साल 2 लाख 40 हजार रुपये में गया । अब उन्होंने बताया कि गायें उस धरती पर घूमने से, गोमूत्र व गोबर के प्रभाव से अब वह बगीचा 10 लाख रुपये में जाता है । अपने खेतों में गायों का होना पुण्यदायी, परलोक सुधारनेवाला और यहाँ सुख-समृद्धि देनेवाला साबित होगा ।

अगर गोमूत्र, गौ-गोबर का खेत-खलिहान में उपयोग हो जाय तो उनसे उत्पन्न अन्न, फल, सब्जियाँ प्रजा का कितना हित करेंगी, कल्पना नहीं कर सकते !!
विदेशी दवाइयों के निमित्त कई हजार करोड़ रुपये विदेशों में जाते हैं और देशवासी उन दवाइयों के दुष्प्रभाव के शिकार हो जाते हैं ।

बापु आशारामजी ने पत्र में आगे लिखा कि प्रजा हितैषी जो सरकारें हैं, उन मेरी प्यारी सरकारों को प्यार भरा प्रस्ताव पहुँचाओगे तो मुझे खुशी होगी । मानव व देश का भला चाहने वाले प्रिंट मीडिया व इलेक्ट्रोनिक मीडिया इस बात के प्रचार का पुनीत कार्य करेंगे तो मानव के स्वास्थ्य व समृद्धि की रक्षा करने का पुण्य भी मिलेगा, प्रसन्नता भी मिलेगी व भारत देश की सुहानी सेवा करने वाले मीडिया को देशवासी कितनी ऊँची नजर से देखेंगे और दुआएँ देंगे । उनकी 7-7 पीढ़ियाँ इस सेवाकार्य से सुखी, समृद्ध व सद्गति को प्राप्त होंगी।

 केमिकल की फिनायल व उसकी दुर्गंध से हवामान दूषित होता है । गौ-फिनायल से आपकी सात्त्विकता, सुवासितता बढ़ेगी ही ।

सज्जन सरकारें, प्रजा का हित चाहनेवाली सरकारें मुझे बहुत प्यारी लगती हैं । गौ-गोबर के कंडे से जो धुआँ निकलता है, उससे हानिकारक कीटाणु नष्ट होते हैं । शव के साथ श्मशान तक की यात्रा में मटके में गौ-गोबर के कंडे जलाकर ले जाने की प्रथा के पीछे हमारे दूरद्रष्टा ऋषियों की शव के हानिकारक कीटाणुओं से समाज की सुरक्षा लक्षित है ।

अगर गौ-गोबर का 10 ग्राम ताजा रस प्रसूतिवाली महिला को देते हैं तो बिना ऑपरेशन के सुखदायी प्रसूति होती है ।

गोधरा (गुज.) के प्रसिद्ध तेल-व्यापारी रेवाचंद मगनानी की बहू के लिए गोधरा व बड़ौदा के डॉक्टरों ने कहा था : ‘‘इनका गर्भ टेढ़ा हो गया है । उसी के कारण शरीर ऐसा हो गया है, वैसा हो गया है... सिजेरियन (ऑपरेशन) ही कराना पड़ेगा ।’’ आखिर अहमदाबाद गये । वहाँ 5 डॉक्टरों ने मिलकर जाँच की और आग्रह किया कि ‘‘जल्दी सिजेरियन के लिए हस्ताक्षर करो; या तो संतान बचेगी या तो माँ, और यदि संतान बचेगी तो वह अर्धविक्षिप्त होगी । अतः सिजेरियन से एक की जान बचा लो ।’’

परिवार ने मेरे से सिजेरियन की आज्ञा माँगी । मैंने मना करते हुए गौ-गोबर के रस का प्रयोग बताया । न माँ मरी न संतान मरी और न कोई अर्धविक्षिप्त रहा । प्रत्यक्ष प्रमाण देखना चाहें तो देख सकते हैं । अभी वह लड़की महाविद्यालय में पढ़ती होगी । अच्छे अंक लाती है । माँ भी स्वस्थ है । कई लोग देख के भी आये । कइयों ने उनके अनुभव की विडियो क्लिप भी देखी होगी । गौ-गोबर के रस द्वारा सिजेरियन से बचे हुए कई लोग हैं ।

विदेशी जर्सी तथाकथित गायों के दूध आदि से मधुमेह, धमनियों में खून जमना, दिल का दौरा, ऑटिज्म, स्किजोफ्रेनिया (एक प्रकार का मानसिक रोग), मैड काऊ, ब्रुसेलोसिस, मस्तिष्क ज्वर आदि भयंकर बीमारियाँ होने का वैज्ञानिकों द्वारा पर्दाफाश किया गया है । परंतु भारत की देशी गाय के दूध में ऐसे तत्त्व हैं जिनसे एच.आई.वी. संक्रमण, पेप्टिक अल्सर, मोटापा, जोड़ों का दर्द, दमा, स्तन व त्वचा का कैंसर आदि अनेक रोगों से रक्षा होती है । उसमें स्वर्ण-क्षार भी पाये गये हैं । गाय के दूध-घी का पीलापन स्वर्ण-क्षार की पहचान है । लाइलाज व्यक्ति को भी गौ-सान्निध्य व गौसेवा से 6 से 12 महीने में स्वस्थ किया जा सकता है ।

पुनः गोमूत्र, गोबर से निर्मित खाद एवं गौ-उपस्थिति का खेतों में सदुपयोग हो ! भारत को भूकम्प की आपदाओं से बचाने के लिए मददगार है गौसेवा !

लोग कहते हैं कि ‘आप 8000 गायों का पालन-पोषण करते हैं !’ तो मैं तुरंत कहता हूँ कि ‘वे हमारा पालन-पोषण करती हैं । उन्होंने हमसे नहीं कहा कि हमारा पालन-पोषण करो, हमें सँभालो । हमारी गरज से हम उनकी सेवा करते हैं, सान्निध्य लेते हैं ।’

महाभारत (अनुशासन पर्व : 80.3) में महर्षि वसिष्ठजी कहते हैं : ‘‘गाय मेरे आगे रहें । गाय मेरे पीछे भी रहें । गाय मेरे चारों ओर रहें और मैं गायों के बीच में निवास करूँ ।’’

हे साधको ! देशवासियों ! सुज्ञ सरकारों ! इस बात पर आप सकारात्मक ढंग से सोचने की कृपा करें ।               
-आप सभीका स्नेही
आशाराम बापू, जोधपुर
(नोट : यह संदेश अगस्त 2016 का है)

आपको बता दे कि बापू आशारामजी ने कत्लखानों में जाति हजारों गायों को बचाकर अनेकों गौशाला बनाई उसमें अधिकितर गाये दूध देने वाली नही है फिर भी उनका पालन व्यवस्थित तरीके से किया जता है। और विदेशी कम्पनियों की कमर तोड़ दी थी और धर्मांतरण की दुकानें बंद करवा दी थी । 14 फरवरी वेलेंटाइन डे की जगह मातृ-पितृ पूजन दिवस और 25 दिसंबर को क्रिसमस की जगह तुलसी पूजन शुरू करवा दिया । ऐसे अनेकों कारण हैं जिसके कारण उन्हें फंसाया गया है ।

 Follow on Telegram: https://t.me/ojasvihindustan





🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Saturday, November 21, 2020

गौहत्या पर रोक व गौपालन क्यों जरूरी है जानिए हिंदू, मुस्लिम, अंग्रेज विद्वानों से

21 नवम्बर 2029


गाय को पशु नही माना जाता है गाय को माता का दर्जा दिया है क्योंकि गाय माता में 33 करोड़ देवता बसते हैं। गाय के दूध, दही, घी, गोबर और गौझरन से असाध्य रोग भी मिट जाते हैं यह वैज्ञानिकों ने भी सिद्ध किया है।

गाय माता के लिए विद्वानों के विचार...




जब तक गौमाता का रुधिर (रत) भूमि पर गिरता रहेगा, कोई धार्मिक, सामाजिक अनुष्ठान सफल नहीं होगा।
-श्री देवरहा बाबा

यदि हम संसार में हिन्दू कहलाकर जीवित रहना चाहते हैं तो सर्वप्रथम हमें प्राणपण से गौरक्षा करनी होगी ।
-श्री प्रभुदत्त ब्रह्मचारी

एक गाय अपने जीवनकाल में 4,10,440 मनुष्यों हेतु एक समय का भोजन जुटा सकती है, जबकि उसके मांस से केवल  80 मांसाहारी एक समय अपना  पेट भर सकते हैं। गौवंश धर्म, संस्कृति व स्वाभिमान का प्रतीक रहा है ।
- स्वामी दयानंद सरस्वती

गाय का दूध रसायन, गाय का घी अमृत तथा मांस बीमारियों का घर है ।
- पैगंबर हजरत मोहम्मद साहेब

कुरान और बाइबिल, दोनों धार्मिक ग्रंथों का मैंने अध्ययन किया है । उन ग्रंथों के अनुसार अप्रत्यक्ष रूप से भी गौहत्या करना जघन्य पाप है ।
- आचार्य विनोबा भावे

गाय उन्नति और प्रसन्नता की जननी है । गाय कई प्रकार से अपनी जननी से भी श्रेष्ठ है ।
- महात्मा गाँधी

जब से गाय एवं अन्य पशुओं की निर्दयतापूर्वक हत्या प्रारंभ हुई है, तब से हम अपने बच्चों के भविष्य के प्रति चिंतित हो गये हैं ।
- श्री लाला लाजपत राय

चाहे मुझे मार डालो, पर गाय पर हाथ न उठाओ ।
- लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक

भारत में गौ-पालन सनातन धर्म है ।
-प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद

भारतीय संविधान की पहली धारा संपूर्ण गौवंश- हत्या निषेध की होनी चाहिए ।
- पं. मदनमोहन मालवीयजी की अंतिम इच्छा

गौहत्या हेतु  मुस्लिम-आग्रह मूर्खता की पराकाष्ठा है ।
- सुलतान अहमद खान

मेरे विचार से भारत की वर्तमान परिस्थिति में गौहत्या-निषेध से बढकर कोई वैज्ञानिक तथा विवेकपूर्ण कृत्य नहीं है ।
- श्री जयप्रकाश नारायण

गौवंश के प्रति प्रशासन का अपमानजनक व्यवहार ब्रिटिश शासन के घृणित कार्य  के  रूप में जाना जायेगा ।
- लार्ड लिनलिथगो

गाय हमारी अर्थव्यवस्था का आधार है ।
- श्री ज्ञानी जैलसिंह (भूतपूर्व राष्ट्रपति)

न तो कुरान और न अरब देशों की प्रथा ही गाय की कुर्बानी (हत्या) की इजाजत देती है ।
- हकीम अजमल खान

पवित्र गौमाता को राष्ट्रीय माता का दर्जा देकर उसकी रक्षा कानून और सरकार को करनी चाहिए जिसे सदा के लिए इस विषय पर शांति बनी रहेगी ।

🔺 Follow on Telegram: https://t.me/ojasvihindustan





🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Friday, November 20, 2020

गोपाष्टमी पर्व क्यों मनाया जाता है?, उस दिन हमें क्या करना चाहिए?

20 नवम्बर 2020


 वर्ष में जिस दिन गायों की पूजा-अर्चना आदि की जाती है वह दिन भारत में ‘गोपाष्टमी’ के नाम से जाना जाता है । इस साल गोपाष्टमी 22 नवम्बर को मनाई जाएगी।

गोपाष्टमी का इतिहास:-




गोपाष्टमी महोत्सव गोवर्धन पर्वत से जुड़ा उत्सव है । गोवर्धन पर्वत को द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से लेकर सप्तमी तक गाय व सभी गोप-गोपियों की रक्षा के लिए अपनी एक अंगुली पर धारण किया था । गोवर्धन पर्वत को धारण करते समय गोप-गोपिकाओं ने अपनी-अपनी लाठियों का भी टेका दे रखा था, जिसका उन्हें अहंकार हो गया कि हम लोगों ने ही गोवर्धन को धारण किया है । उनके अहं को दूर करने के लिए भगवान ने अपनी अंगुली थोड़ी तिरछी की तो पर्वत नीचे आने लगा । तब सभी ने एक साथ शरणागति की पुकार लगायी और भगवान ने पर्वत को फिर से थाम लिया ।

उधर देवराज इन्द्र को भी अहंकार था कि मेरे प्रलयकारी मेघों की प्रचंड बौछारों को मानव श्रीकृष्ण नहीं झेल पायेंगे परंतु जब लगातार सात दिन तक प्रलयकारी वर्षा के बाद भी श्रीकृष्ण अडिग रहे, तब आठवें दिन इन्द्र की आँखें खुली और उनका अहंकार दूर हुआ । तब वे भगवान श्रीकृष्ण की शरण में आए और क्षमा मांगकर उनकी स्तुति की । कामधेनु ने भगवान का अभिषेक किया और उसी दिन से भगवान का एक नाम ‘गोविंद’ पड़ा । वह कार्तिक शुक्ल अष्टमी का दिन था । उस दिन से गोपाष्टमी का उत्सव मनाया जाने लगा, जो अब तक चला आ रहा है ।

कैसे मनायें गोपाष्टमी पर्व ?

इस साल 22 नवम्बर को गोपाष्टमी है उस दिन गायों को स्नान कराएं । तिलक करके पूजन करें व गोग्रास दें । गायों को अनुकूल हो ऐसे खाद्य पदार्थ खिलाएं, सात परिक्रमा व प्रार्थना करें तथा गाय की चरणरज सिर पर लगाएं । इससे मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं एवं सौभाग्य की वृद्धि होती है ।

गोपाष्टमी के दिन सायंकाल गायें चरकर जब वापस आयें तो उस समय भी उनका आतिथ्य, अभिवादन और पंचोपचार-पूजन करके उन्हें कुछ खिलायें और उनकी चरणरज को मस्तक पर धारण करें, इससे सौभाग्य की वृद्धि होती है ।

भारतवर्ष में गोपाष्टमी का उत्सव बड़े उल्लास से मनाया जाता है । विशेषकर गौशालाओं तथा पिंजरापोलों के लिए यह बड़े महत्त्व का उत्सव है । इस दिन गौशालाओं में एक मेला जैसा लग जाता है । गौ कीर्तन-यात्राएँ निकाली जाती हैं । यह घर-घर व गाँव-गाँव में मनाया जानेवाला उत्सव है । इस दिन गाँव-गाँव में भंडारे किये जाते हैं ।

विश्व के लिए वरदानरूप : गोपालन

देशी गाय का दूध, दही, घी, गोबर व गोमूत्र सम्पूर्ण मानव-जाति के लिए वरदानरूप हैं । दूध स्मरणशक्तिवर्धक, स्फूर्तिवर्धक, विटामिन्स और रोगप्रतिकारक शक्ति से भरपूर है । घी ओज-तेज प्रदान करता है । इसी प्रकार गोमूत्र कफ व वायु के रोग, पेट व यकृत (लीवर) आदि के रोग, जोड़ों के दर्द, गठिया, चर्मरोग आदि सभी रोगों के लिए एक उत्तम औषधि है । गाय के गोबर में कृमिनाशक शक्ति है । जिस घर में गोबर का लेपन होता है वहाँ हानिकारक जीवाणु प्रवेश नहीं कर सकते । पंचामृत व पंचगव्य का प्रयोग करके असाध्य रोगों से बचा जा सकता है । ये हमारे पाप-ताप भी दूर करते हैं । गाय से बहुमूल्य गोरोचन की प्राप्ति होती है ।

देशी गाय के दर्शन एवं स्पर्श से पवित्रता आती है, पापो का नाश होता है । गोधूलि (गाय की चरणरज) का तिलक करने से भाग्य की रेखाएँ बदल जाती हैं । ‘स्कंद पुराण’ में गौ-माता में सर्व तीर्थों और सभी देवताओं का निवास बताया गया है ।

गायों को घास देने वाले का कल्याण होता है । स्वकल्याण चाहनेवाले गृहस्थों को गौ-सेवा अवश्य करनी चाहिए क्योंकि गौ-सेवा में लगे हुए पुरुष को धन-सम्पत्ति, आरोग्य, संतान तथा मनुष्य-जीवन को सुखकर बनानेवाले सम्पूर्ण साधन सहज ही प्राप्त हो जाते हैं ।

विशेष : ये सभी लाभ देशी गाय से ही प्राप्त होते हैं, जर्सी व होल्सटीन से नहीं ।
(स्त्रोत : संत श्री आशारामजी आश्रम द्वारा प्रकाशित "गाय" साहित्य से)

🔺 Follow on Telegram: https://t.me/ojasvihindustan





🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Thursday, November 19, 2020

जानिए अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस कब से और किसलिए मनाया जाता है?

19 नवम्बर 2020


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) की तरह हर साल 19 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस (International Men's Day) मनाया जाता है। हालांकि, जिस उत्साह और सपोर्ट के साथ महिला दिवस मनाया जाता है, उस तरह का एक्‍साइटमेंट व क्रेज पुरुष दिवस के लिए देखने को नहीं मिलता। यह दिन मुख्य रूप से पुरुषों को भेदभाव, शोषण, उत्पीड़न, हिंसा और असमानता से बचाने और उन्हें उनके अधिकार दिलाने के लिए मनाया जाता है। आपको बता दें कि 80 देशों में 19 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है और इसे युनेस्को का भी सहयोग प्राप्त है।




ऐसे हुई पुरुष दिवस की शुरुआत:

अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस का इतिहास:

1923 में कई पुरुषों द्वारा 8 मार्च को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की तर्ज पर अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाए जाने की मांग की गई थी। इसके चलते पुरुषों ने आंदोलन भी किया था। उस वक्त पुरुषों ने 23 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाने की मांग की थी। इसके बाद 1968 में अमेरिकन जर्नलिस्ट जॉन पी. हैरिस ने एक आर्टिकल लिखते हुए कहा था कि सोवियत प्रणाली में संतुलन की कमी है। उन्होंने लिखा था कि सोवियत प्रणाली महिलाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाती है लेकिन पुरुषों के लिए वो किसी प्रकार का दिन नहीं मनाती। फिर 19 नवंबर 1999 में त्रिनिदाद और टोबैगो के लोगों द्वारा पहली बार अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया गया। डॉ. जीरोम तिलकसिंह ने जीवन में पुरुषों के योगदान को एक नाम देने का बीड़ा उठाया था। उनके पिता के बर्थडे के दिन विश्व पुरुष दिवस मनाया जाता है। धीरे धीरे दुनियाभर में इसे 19 नवंबर को मनाया जाने लगा।

भारत ने साल 2007 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया। इसके बाद से ही भारत में हर साल 19 नंवबर को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस का महत्व :
अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मुख्य रूप से पुरुष और लड़कों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने, लिंग संबंधों में सुधार, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और पुरुष रोल मॉडल्स को उजागर किए जाने के लिए मनाया जाता है।

InternationalMensDay की वेबसाइट के मुताबिक, दुनिया में महिलाओं से 3 गुना ज्यादा पुरुष सुसाइड करते हैं। 3 में से एक पुरुष घरेलू हिंसा का शिकार है। महिलाओं से 4 से 5 साल पहले पुरुष की मौत होती है। महिलाओं से दोगुना पुरुष दिल की बीमारी के शिकार होते हैं। पुरुष दिवस पुरुषों की पहचान के सकारात्मक पहलुओं पर काम करता है।

पुरुष दिवस मनाने के मुख्य उद्देश्य :

- पुरुष रोल मॉडल को बढ़ावा देना।
- समाज, समुदाय, परिवार, विवाह, बच्चों की देखभाल और पर्यावरण के लिए पुरुषों के सकारात्मक योगदान का जश्न मनाना।
- पुरुषों के स्वास्थ्य और भलाई पर ध्यान केंद्रित करना; सामाजिक, भावनात्मक, शारीरिक और आध्यात्मिक तौर पर।
- पुरुषों के खिलाफ भेदभाव को उजागर करना।
- लिंग संबंधों में सुधार और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना।
- एक सुरक्षित, बेहतर दुनिया बनाना।

आज पुरुषों की दुर्दशा:

19 नवम्बर को विश्व पुरूष दिवस मनाया जाता है उनके अधिकारों की रक्षा के लिए पर जिस तरह आज देश मे झूठे दहेज व रेप केस की बाढ़ आ गई है उसको रोकना होगा नही तो निर्दोष पुरुष बलि चढ़ते रहेंगे।

महिलाओं कि सुरक्षा के लिए कानून जरूरी है परंतु आज साजिश या प्रतिशोध की भावनाओं से निर्दोष लोगों को फँसाने के लिए बलात्कार के आरोप लगाकर कानून का भयंकर दूरुपयोग हो रहा है।

न्यायाधीश निवेदिता शर्मा ने बताया कि पुरूषों के खिलाफ रेप के झूठे मामलों से बचाने के लिए ऐसे कानून बनाये जाये जो उन्हें बचा सके।

निर्दोष लोगों को फँसाने के लिए बलात्कार के नये कानूनों का व्यापक स्तर पर हो रहा इस्तेमाल आज समाज के लिए एक चिंतनीय विषय बन गया है । राष्ट्रहित में क्रांतिकारी पहल करनेवाली सुप्रतिष्ठित हस्तियों, संतों-महापुरुषों एवं समाज के आगेवानों के खिलाफ इन कानूनों का राष्ट्र एवं संस्कृति विरोधी ताकतों द्वारा कूटनीतिपूर्वक अंधाधुंध इस्तेमाल हो रहा है । इसको रोकने के लिए कानून में संशोधन करना अत्यंत जरूरी है ।

बदला लेने के लिए अथवा पैसे एठने के लिए कुछ मनचली लड़कियां या गिरोह कार्य कर रहे है जो निर्दोष पुरुषों पर झूठे दहेज या रेप के आरोप लगा देते है इसके कारण निर्दोष पुरुषों की जिंदगी बर्बाद हो जाती है, उसको जेल जाना पड़ता है, समय व पैसे की बर्बादी होती है और इज्जत चली जाती है वो अलग और उसके साथ उसकी माँ-बहन, पत्नी-बेटी भी जुड़ी होती है तो उनपर भी अत्याचार होता है क्योंकि घर मे उनका पालन पोषण करने वाला पुरुष होता है उसको झूठे केस में जेल भेज देंगे तो उन पर क्या बीतेगी?

सरकार को अब महिला आयोग की तरह पुरूष आयोग भी बनाना चाहिए, जो महिलाएं झूठे केस करती है उनको भी सजा का प्रावधान होना चाहिए नही तो एक के बाद एक निर्दोष पुरुष बलि चढ़ते ही रहेंगे।

Official  Links:👇🏻

🔺 Follow on Telegram: https://t.me/ojasvihindustan





🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Wednesday, November 18, 2020

मुम्बई में उल्हासनगर बन रहा है ईसाई नगर, 2 लाख हिन्दू बनाये गए ईसाई

 

18 नवंबर 2020


हिन्दू बहुसंख्यक देश में हिन्दुओं का इस प्रकार से खुलेआम धर्मांतरित होना, यह अभीतक के शासनकर्ताओं द्वारा हिन्दुओं को धर्मशिक्षा न देने का ही गंभीर परिणाम है ! यह अबतक के शासनकर्ताओं के लिए लज्जाप्रद है ! इस स्थिति को बदलने के लिए अब हिन्दू राष्ट्र ही चाहिए ।




जिस सिंधी समुदाय ने अखंड हिन्दुस्तान के विभाजन के समय हिन्दू धर्म जीवित रहे; इसके लिए पाकिस्तान में स्थित अपनी भूमि, संपत्ति और सबकुछ त्याग दिया, वही सिंधी समुदाय अब ईसाईयों के लालच की बलि चढ़ रहा है और उच्चवर्गीय सिंधीवर्ग अब मिशनरियों का प्रचार कर रहा है, यह दुर्भाग्यजनक स्थिति बन गई है ।

उल्हासनगर में धर्मांतरण की घटनाओं को रोकना अब स्थानीय हिन्दुओं के नियंत्रण के बाहर जा चुका है । यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही, तो आनेवाले कुछ वर्षों में यहां के सिंधी अर्थात हिन्दू नष्ट होकर उल्हासनगर को महाराष्ट्र के पहले ईसाई नगर के रूप में घोषित होने में समय नहीं लगेगा ।

मुंबई : ठाणे जनपद का उल्हासनगर अब ईसाई मिशनरियों के लिए धर्मांतरण का अड्डा बन गया है । विगत 5-6 वर्षों से षड्यंत्र के अंतर्गत यहां के लाखों हिन्दुओं का धर्मांतरण किया गया है । स्थानीय सिंधी संगठन और प्रतिनिधियों ने यह चौंका देनेवाली जानकारी दी है कि मिशनरियों ने यहां के बहुसंख्यक सिंधी समुदाय को अपना लक्ष्य बनाया है और विगत 5-6 वर्षों में यहां के 28 हजार परिवारों के डेढ़ लाख से भी अधिक सिंधी लोगों का धर्मांतरण किया गया है । यहां के सिंधी समुदाय के इस धर्मांतरण को अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र कहा जा रहा है ।

स्थानीय लोगों ने यह जानकारी दी कि, उल्हासनगर में जमीन के भाव बहुत अधिक होते हुए भी इस परिसर में 18 बड़े चर्चों का निर्माण किया गया है । नगर में ईसाई मिशनरियों ने अपना इतना बड़ा जाल बनाया है कि इस क्षेत्र में कुल 25 से भी अधिक छोटे-बड़े चर्च और 100 से भी अधिक प्रार्थनास्थल बनाए गए हैं । वर्ष 1947 में देश के विभाजन के समय, इसके लिए सिंधी समुदाय भारत में आ गया । ईसाई मिशनरियों द्वारा विगत कुछ वर्षों से सिंधी समुदाय का अत्यंत नियोजनतापूर्वक तथा गुप्त पद्धति से धर्मांतरण किया जा रहा है । इस विषय में यहां के पत्रकार और सूचना अधिकार कार्यकर्ता श्री. सत्यम पुरी ने यहां की भयावह वास्तविकता बताते हुए कहा कि, उल्हासनगर के अधिकांश परिवार का न्यूनतम एक तो व्यक्ति ईसाई बन ही गया है ।

ईसाईयों द्वारा बांटी गई पत्रिकाएं-

1. यहां के अनेक लोगों ने यह बताया कि ये धर्मांतरित सिंधी लोग अपने समुदाय के अन्य लोगों को भी धर्मांतरित होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं । यहां के जो व्यापारी और उनके परिवार ईसाई बन गए हैं, वे ईसाई पंथ के प्रचार हेतु अपने प्लैट, जमीन, साथ ही अपनी गाड़ियाँ भी ईसाई मिशनरियों को उपलब्ध करा रहे हैं ।

2. धर्मांतरित सिंधी व्यापारी वर्ग और उच्चस्तर के सिंधी लोग अपने परिजन और समुदाय के अन्य लोगों को भी धर्मांतरण के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं ।

3. स्थानीय हिन्दू इन धर्मांतरण की घटनाओं के विरुद्ध वैधानिक पद्धति से संघर्ष कर रहे हैं; परंतु उनके प्रयास कम पड़ रहे हैं ।

धर्मांतरित सिंधी स्वयं का नाम न बदलकर सिंधी लड़कियों से विवाह कर उनसे कर रहे हैं धोखाधड़ी-

श्री. सत्यम पुरी ने बताया कि सिंधी समुदाय में लड़कियों की संख्या लड़कों की संख्या की अपेक्षा कम है । ये लड़कियां इन धर्मांतरित सिंधी लड़कों के साथ विवाह करने राजी नहीं होती; इसलिए ईसाई प्रिस्ट इन धर्मांतरित सिंधी युवकों को अपना पहले का ही नाम चालू रखने के लिए कहते हैं । उसके कारण उनसे विवाह करनेवाली लड़कियों को विवाह के पश्‍चात उसके पति द्वारा ईसाई पंथ का स्वीकार करने की बात ज्ञात होती है । तत्पश्‍चात ये धर्मांतरित युवक अपनी पत्नी पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाते हैं । इस प्रकार की घटनाएं आज घर-घर में हो रही हैं।

झूठे चमत्कार बताकर किया जाता है धर्मांतरण-
उल्हासनगर के निकट ही ताबोर आश्रम नामक एक ईसाई संस्था की स्थापना की गई है । यह तथाकथित आश्रम धर्मांतरण का बड़ा केंद्र बन गया है । साथ ही, नगर के विविध स्थानोंपर अंधविश्‍वास फैलानेवाले कार्यक्रम निरंतर चालू रहते हैं । ऐसे कार्यक्रमों के प्रचार के अंतर्गत विविध स्थानों पर ‘अपाहिज व्यक्ति चल सकेगा, अंधा देख पाएगा और इसके लिए ईसा मसीह के शरण में आएं’, ऐसे वाक्य छपे हुए पोस्टर्स लगाए हुए दिखाई देते हैं । (क्या महाराष्ट्र की अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति को यह अंधश्रद्धा नहीं दिखाई देती ?  या उन्हें ईसाईयों के विरुद्ध कुछ बोलना नहीं है ? – संपादक) ऐसा होते हुए भी प्रशासन की ओर से ऐसे अंधविश्‍वास फैलानेवाले कार्यक्रमों के विरुद्ध किसी प्रकार की कार्यवाही होते हुए नहीं दिखाई देती । विविध चैनलों से इन कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण भी किया जाता है ।

धर्मांतरित धनवान लोगों द्वारा आदिवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण का मिशनरियों का षड्यंत्र-

 मिशनरियों द्वारा धनवान सिंधी लोगों का धर्मांतरण कर उन्हें आसपास के गांवों में वहां के आदिवासी और निर्धन लोगों के धर्मांतरण के लिए भेजा जाता है । उल्हासनगर के धनवान लोगों द्वारा किए गए धर्मांतरण का उदाहरण प्रस्तुत कर ये धर्मांतरित सिंधी लोग निर्धन लोगों का धर्मांतरण करते हैं ।

धर्मांतरण का विरोध करनेवालों को झूठे अपराधों के प्रकरणों में फंसाया जा रहा है-

जानकारी के लिए बता दें कि यहां के एक बस्ती में जब धर्मान्तरण चल रहा था, तब वहां के स्थानीय हिन्दुओं ने उसका वैधानिक पद्धति से विरोध किया । तब ईसाई लोगों ने पुलिस थाने में हिन्दुओं के विरुद्ध उनका कार्यक्रम बिखेर देने का तथा हिन्दुओं द्वारा गालीगलोच किए जाने का झूठा परिवाद प्रविष्ट कर हिन्दुओं पर दबाव बनाने का प्रयास किया ।

विविध हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन यहां के धर्मांतरण की इन गंभीर घटनाओं का वैधानिक पद्धति से विरोध कर रहे हैं । स्थानीय हिन्दुत्वनिष्ठ धर्मांतरण के कार्यक्रम के विषय में पुलिस थाने में परिवाद प्रविष्ट करना, जिस स्थानपर ये कार्यक्रम किए जाते हैं, उस स्थान के मालिकों का उद्बोधन करना जैसे प्रयास कर रहे हैं; परंतु उसकी अनदेखी कर धर्मांतरण की घटनाएं चल ही रही हैं । आज इस समस्या ने अत्यंत गंभीर रूप धारण किया है ।

सरकार का इसपर ध्यान न देना मतलब खुद का भी वोट बैंक कम करना हुआ, ईसाई बन जायेंगे तो हिंदू पार्टी को ही वोट कम जाएंगे।

 स्वामी विवेकानंद कहते थे कि एक हिंदू अगर धर्मान्तरित होता है तो एक हिंदू कम हुआ नही बल्कि हिंदू समाज का एक दुश्मन बढ़ा इसलिए सरकार इस पर सख्त कमद उठाना चाहिये और ईसाई मिशनरियों का गोरखधंधा बंद करवा देना चाहिए ।

🔺 Follow on Telegram: https://t.me/ojasvihindustan





🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Tuesday, November 17, 2020

"आश्रम" वेब सीरीज बनाने के पीछे के षड्यंत्र का पर्दाफाश…

17 नवंबर 2020


वैसे तो ये कोई नई बात नहीं है कि बॉलीवुड द्वारा हिंदू विरोधी पहली फ़िल्म बनाई गयी हो, यह सिलसिला पिछले कई दशकों से चल रहा है और समाज को सबसे ज्यादा अगर गुमराह किया हो तो वह बॉलीबुड ने किया है। बॉलीवुड ने समाज को यही दिया कि शादी करती हुई लड़की को मंडप से उठा लेना, बलात्कार, चोरी, डकैती, अधनंगे कपड़े पहनना, मां-बाप को वृद्धाश्रम छोड़ देना, लव जिहाद को बढ़ावा देना, भारतीय संस्कृति को हीन बताना, साधु-संतों, देवी देवताओं मदिरों और पंडितों का मजाक उड़ाना ओर पाश्चात्य संस्कृति को महान बताना यही तो ये लोग करते आये हैं।




आश्रम वेब सीरीज फ़िल्म निर्माता प्रकाश झा ने बनाई है लेकिन उसके पीछे बड़ा रहस्य है, प्रकाश झा की इतनी हैसियत नहीं है कि वे करोड़ो रूपये की फ़िल्म बना ले फिर करोड़ो रूपये खर्च करके उसका प्रोमोशन करे क्योंकि विज्ञापन से कुछ लाख रुपये ही आयेंगे लेकिन उसको जिस तरह प्रमोट किया जा रहा है उससे लग रहा है कि उसमे कई करोड रुपये खर्च किये है इसके पीछे कही न कही राष्ट्र व भारतीय संस्कृति को तोडने वाली ताकते लगी हुई है। क्योंकि "आश्रम" नाम पवित्र शब्द है उस पर करोडों लोग श्रद्धा करते है, वहाँ पर जाकर शांति पाते हैं इसके कारण धर्मांतरण कराने वाली मिशनरी और विदेशी प्रोडक्ट बेचने वाली कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है क्योंकि साधु-संतों के प्रति श्रद्धा रखने वाले आश्रम में जाते है और वहाँ उनको भारतीय संस्कृति के अनुसार जीने का सही तरीका मिलता है फिर वे अपने धर्म के प्रति आस्थावान हो जाते हैं जिसके कारण वे ईसाई मिशनरियों के चुंगल में नहीं आते हैं औऱ वे विदेशी प्रोडक्ट भी नहीं खरीदते जिसके कारण ईसाई मिशनरियों का जो लक्ष्य है भारत में धर्मांतरण करके अपनी वोटबैंक बढ़ाकर सत्ता हासिल करना ओर जो विदेशी कंपनियों के सामान नहीं बिकने पर उनको अरबो-खबरों रूपये का घाटा होता इसके कारण ये लोग अनेक प्रकार के षड्यंत्र रचकर हिंदुओं की आश्रम व साधु-संतों के प्रति आस्था को नष्ट करने के लिए साज़िशें रच रहे हैं और प्रकाश झा जैसे जयचंद गद्दारी करके अपने ही धर्म के खिलाफ फिल्में बनाते है असली कारण यही है।

देखा जाए तो चर्चो में बलात्कार के हजारों किस्से आ चुके हैं, मदरसों में भी यौन शोषण के कई किस्से आ चुके है पर अभी तक उस पर फ़िल्म कोई न बनाता है और न ही कोई हिम्मत करता है क्योंकि उसके लिए न फंडिंग मिलेगी और उपर से कमलेश तिवारी की तरह हत्या हो जाएगी इसलिए वास्तविक में जहाँ पर गड़बड़ी हो रही है उस पर वे ध्यान नहीं देते है पर हिंदी सहिष्णु है और उनके खिलाफ षड्यंत्र रचने के लिए भारी फंडिंग मिलती है इसके कारण प्रकाश झा जैसे जयचंद हिंदू विरोधी फिल्में बनाते हैं।

प्रकाश झा के खिलाफ शिकायत दर्ज

करणी सेना की तरफ से वेब सीरीज को बैन करने की मांग की है। सेना के लोगों का कहना है कि सीरीज के जरिए, साधु संतों को बदनाम करने की कोशिश की गई है। उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई है। करणी सेना के महामंत्री सुरजीत सिंह ने इस मामले पर कहा कि हमने प्रकाश झा के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। हमें सीरीज के टाइटल को लेकर अपनी आपत्ति जताई है। हम चाहते है कि इसे लेकर पुलिस उचित करवाई करे। करनी सेना की हिंदुनिष्ठ लोग सरहाना कर रहे हैं क्योंकि अब इसके पीछे का षड्यंत्र हिंदुस्तानी लोग समझने लगें हैं।

वास्तविकता तो यह है कि कितने साधु-संतों ने घोर तपस्या की है फिर वे समाज में आकर उनको सही मार्ग दिखाते हैं, समाज को व्यसनमुक्त बनाने का प्रयास करते हैं, संयमी और सदाचारी समाज को बनाते हैं, गरीबों-आदिवासियों को सहायता करते हैं। गौ माता की रक्षा करते हैं। बच्चों, युवाओं व महिलाओं के उत्थान के लिए केंद्र खोलते हैं। धर्मान्तरण पर रोक लगाते हैं। चिंता, टेंशन में रह रहे लोगों को शांति देते हैं, स्वदेशी का प्रचार करते हैं, सभी को स्वस्थ, सुखी और सम्मानित जीवन जीने की कला सिखाते हैं। राष्ट्र व धर्म की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर देते हैं।

वैसे आपको बता दें कि ऐसी फिल्में देखकर श्रद्धालुओं में तो तनिक भी फर्क नही पड़ा है उपर से हिंदू लोग प्रकाश झा के खिलाफ हो गए हैं।

🔺 Follow on Telegram: https://t.me/ojasvihindustan





🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ

Monday, November 16, 2020

मीडिया ने आसाराम बापू की इस बड़ी खबर को कर दिया गायब, जानिए कोनसी खबर है

16 नवंबर 2020


 टीआरपी और पैसे की अंधीदौड़ में अधिकितर मीडिया कई बार झूठी खबरें दिखा देती है और सहीं खबरें छुपा देती है। इसके कारण आज मीडिया ने विश्वसनीयता खो दी है।




 दीपावली के पावन पर्व पर एक तरफ हम मिठाई खाते हैं, नये कपड़े पहनते हैं, खुशियां मनाते हैं, लेकिन उन गरीबों का क्या जिनके पास पैसे नहीं हैं वो कैसे दीपावली मनायेंगे? गरीब भी अच्छी दिवाली मना जा सकें इस निमित्त हिंदू संत आशाराम बापू के अनुयाइयों ने देशभर में आदिवासी क्षेत्रों में जाकर मिठाई, कपड़े, खजूर, चप्पल, बर्तन आदि जीवनोपयोगी सामग्री एवं नगद पैसे और शिरा पुलाव आदि का
 इस अभियान से आदिवासी लोगों की दीपावली अच्छी मनी और दूसरा कि जो मिशनरियां धर्मांतरण करवाती थीं उनका धंधा चौपट हो गया और आदिवासियों की हिंदू धर्म के प्रति आस्था बढ़ी, लेकिन खेद की बात है कि जो मीडिया चिल्ला चिल्लाकर हिंदू संत आशाराम बापू के खिलाफ झूठी कहानियां बनाकर बदनाम कर रही थी उसने यह खबर कहीं भी नहीं दिखाई।

 आपको बता दें कि बापू आशारामजी द्वारा 50 सालों से समाज उत्थान के कार्य कर रहे हैं । उन्होंने सत्संग के द्वारा देश व समाज को तोड़ने वाली ताकतों से देशवासियों को बचाया। कत्लखाने जा रही हजारों गायों को कटने से बचाया, कई गौशालाओं की व्यवस्था की। लाखों लोगो को धर्मान्तरण से बचाया व धर्मान्तरित लाखों हिंदुओं को अपने धर्म में वापसी कराई । गरीब आदिवासी क्षेत्रों में जहाँ खाने की सुविधा तक नहीं थी वहाँ "भोजन करो, भजन करो दक्षिणा पाओ", गरीबों में राशन कार्ड के द्वारा अनाज का वितरण, कपड़े, बर्तन व जीवन उपयोगी सामग्री एवं मकान आदि का वितरण किया जाता है ।
 
 प्राकृतिक आपदाओं में जहाँ प्रशासन भी नहीं पहुँच सका वहाँ बापू आशारामजी की के शिष्यों द्वारा कई सेवाकार्य (निःशुल्क भोजन भंडार, कम्बल, कपड़े का वितरण व स्वास्थ्य शिविर लगाए जाते हैं) होते हैं । इसके अलावा महिला सुरक्षा (WOMEN SAFETY & EMPOWERMENT) के कई अभियान चलाए, नारी जाति के सम्मान व उनमें पूज्यभाव के लिए सबको प्रोत्साहित किया, बड़ी कंपनीयों में काम कर रही महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई, महिला संगठन बनाया।

 परिवार में सुख-शांति व परस्पर सद्भाव से जीना सिखाया, पारिवारिक झगड़ों से मुक्ति दिलायी, महिलाओं के मार्गदर्शन व सर्वांगीण विकास हेतु देशभर में ‘महिला उत्थान मंडलों’ की स्थापना की तथा नारी उत्थान हेतु कई अभियान चलाये। बापू आसारामजी ने बाल व युवा पीढ़ी में नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों के सिंचन हेतु हजारों बाल संस्कार केन्द्रों, युवा सेवा संघों व गुरुकुलों की स्थापना की, आज की युवापीढ़ी को माता पिता का सम्मान सिखाकर वैलेंटाइन के बदले में मातृ-पितृ पूजन दिवस मानना सिखाया । 25 दिसम्बर को संस्कृति की रक्षा के लिए तुलसी पूजन दिवस अभियान एक नई पहल की। केमिकल रंगों से बचा कर प्राकृतिक रंगों से होली खेलने की पहल की, जिससे पानी व स्वास्थ्य की रक्षा हो। व्यसन मुक्ति के अभियान चलाकर करोड़ों लोगों को व्यसन मुक्त कराया। बच्चों, युवाओं व महिलाओं में अच्छे संस्कार के लिए ढेरों अभियान चलाये जाते हैं । World's Religions Parliament, शिकागो अमेरिका में 1993 में स्वामी विवेकानन्दजी के बाद यदि कोई दूसरे संत ने प्रतिनिधित्व किया है तो वे बापू आसारामजी, जिन्होंने हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व कर सनातन संस्कृति का परचम लहराया। इन सेवाकार्यों से देश-विदेश के करोड़ों लोग किसी भी तरह के धर्म- जाति -मत - पंथ -सम्प्रदाय-राज्य व लिंग के हो भेदभाव के बिना लाभान्वित हो रहे हैं ।

 मीडिया ने हिंदू संत आशारामजी बापू द्वारा देश व धर्म के हित में हो रहे अनेक सेवाकार्य को नहीं दिखाया, पर उनके खिलाफ अनेक झूठी कहानियां बनाकर जनता को गुमराह किया ।

🔺 Follow on Telegram: https://t.me/ojasvihindustan





🔺 Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ